4 December AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢











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आज की अभ्युदय वाणी

सुप्रभात बालमित्रों!


4 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 4 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "अपनी खुशियों के प्रत्येक क्षण का आनन्द लें"
"Cherish all your happy moments."

यह कथन हमें यह बताता है कि जीवन में खुशियों के हर छोटे-बड़े क्षण को संजो कर रखना चाहिए। अक्सर हम जीवन की भागदौड़ में अपने सुखद पलों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सच में, ये ही पल हमें सच्ची खुशी और संतोष प्रदान करते हैं। खुशियों का आनंद लेना न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारे समग्र जीवन को भी सकारात्मक बनाता है। ये छोटे-छोटे सुखद क्षण हमारे तनाव और चिंताओं को कम करने में मदद करते हैं और हमें जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। तो चलिए, आज से ही अपने खुशियों के प्रत्येक क्षण का पूरा आनंद लें और जीवन को भरपूर जियें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: DAUGHTER : डॉटर पुत्री, बेटी, कन्या, आत्मजा।

वाक्य प्रयोग: He is proud of his daughter. वह अपनी बेटी पर गर्व करता है।

🧩 आज की पहेली
लाल लाल आँखें, लंबे लंबे कान, रुई के फाहे सा, बोलो क्या है उसका नाम?
उत्तर : खरगोश
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 4 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1860: गोवा के मारगाव के अगस्टिनो लॉरेंसो ने पेरिस विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि ली। वह विदेशी विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि लेने वाले पहले भारतीय बने।
  • 1829: राजा राममोहन राय के प्रयासों से तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को अवैध घोषित कर इस कुप्रथा पर रोक लगाई थी।
  • 1910: भारत के 8वें राष्ट्रपति, स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ रामस्वामी वेंकटरमण का जन्म हुआ।
  • 1959: भारत और नेपाल के बीच गंडक सिंचाई एवं विद्युत परियोजना पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और विकास को बढ़ावा मिला।
  • 1967: इस दिन भारत ने अपने पहले रॉकेट 'रोहिणी आरएच 75' का सफल प्रक्षेपण किया, जिसने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
  • 1996: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह के लिए अंतरिक्ष यान 'मार्स पाथफ़ाउंडर' प्रक्षेपित किया, जो मंगल की सतह का अन्वेषण करने और महत्वपूर्ण डेटा संग्रह करने के लिए एक महत्वपूर्ण मिशन था।
  • 2010: अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस हर साल 4 दिसंबर को दुनिया के सबसे तेज़ जमीनी जानवर, चीता के संरक्षण के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और उन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए मनाया जाता है। इसकी शुरुआत Cheetah Conservation Fund (CCF) की संस्थापक डॉ. लॉरी मार्कर द्वारा 2010 में 'खयाम' नामक चीते की स्मृति में की गई थी।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे भारत के आठवें राष्ट्रपति, “रामस्वामी वेंकटरमण” के बारे में।

रामस्वामी वेंकटरमण भारत के आठवें राष्ट्रपति, स्वतंत्रता सेनानी और प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ थे। उनका जन्म 4 दिसम्बर 1910 को तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ था। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त की और वकालत शुरू की। देश की आज़ादी की लड़ाई में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया और भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल होने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद उन्होंने भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे संसद सदस्य रहे और केंद्र सरकार में उद्योग मंत्री तथा वित्त मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया। अपनी योग्यता और अनुभव के कारण वे 1984 में भारत के उपराष्ट्रपति बने। इसके बाद 1987 में वे भारत के आठवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए और 1992 तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति के रूप में उनका कार्यकाल शांत, संतुलित और गरिमामय माना जाता है। वे एक विद्वान, सादगीपूर्ण और कर्तव्यनिष्ठ नेता थे जिन्होंने हमेशा देश की एकता और लोकतंत्र को मजबूत बनाने का प्रयास किया। 27 जनवरी 2009 को उनका निधन हो गया, लेकिन देश के प्रति उनकी सेवाएँ हमेशा याद की जाती हैं।

👁️ आज का दैनिक विशेष – भारतीय नौसेना दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 4 दिसंबर को मनाये जाने वाले “भारतीय नौसेना दिवस” के बारे में:

भारतीय नौसेना दिवस (Indian Navy Day) हर साल 4 दिसंबर को साल 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय नौसेना की भूमिका को याद करने के लिए मनाया जाता है। दरअसल, 4 दिसंबर 1971 को भारतीय नौसेना ने 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' के तहत पाकिस्तान के कराची नौसैनिक अड्डे पर हमला बोल दिया था। इस लड़ाई में भारतीय नौसेना की पाकिस्तानी नौसेना पर जीत की याद में हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है। नौसेना भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है, जिसकी स्थापना 1612 में हुई थी। मौजूदा समय में भारतीय नौसेना विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना है, जिसमें सैनिकों की संख्या 79,000 है। इस दिन शहीद नौसैनिकों के याद में पुष्पचक्र अर्पित करने के बाद पनडुब्बी जहाज, पोत, का शानदार प्रदर्शन किया जाता है। इस दिन, भारतीय नौसेना के सदस्यों और उनके परिवारों को सम्मानित किया जाता है। यह दिन भारतीय नौसेना के बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिन्होंने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “बोलने वाली मांद”

किसी जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन वह पूरे दिन भटकता रहा, लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला। थकान से बेहाल, वह एक गुफा में जाकर बैठ गया। उसने सोचा, "रात में कोई न कोई जानवर यहाँ अवश्य आएगा, और उसे मारकर मैं अपनी भूख मिटा लूंगा।" इस गुफा का मालिक एक सियार था। जब वह रात में लौटा, तो उसने गुफा के अंदर जाते हुए शेर के पैरों के निशान देखे। उसने ध्यान से देखा और समझ गया कि शेर अंदर तो गया है लेकिन वापस नहीं आया है। यह जानकर वह समझ गया कि उसकी गुफा में शेर छिपा है। चतुर सियार ने तुरंत एक उपाय सोचा और गुफा के भीतर नहीं गया। उसने द्वार पर खड़े होकर जोर से आवाज लगाई, "ओ मेरी गुफा, तुम चुप क्यों हो? आज बोलती क्यों नहीं हो? जब भी मैं बाहर से आता हूँ, तुम मुझे बुलाती हो। आज तुम बोलती क्यों नहीं हो?" गुफा में बैठे शेर ने सोचा, "शायद यह गुफा प्रतिदिन सियार को आवाज देकर बुलाती हो और आज मेरे डर से चुप है।" शेर ने सोचा, "आज मैं ही इसे आवाज देकर अंदर बुलाता हूँ।" शेर ने अंदर से आवाज लगाई और कहा, "आ जाओ मित्र, अंदर आ जाओ।" शेर की आवाज सुनते ही सियार समझ गया कि अंदर शेर बैठा है। वह तुरंत वहाँ से भाग गया और इस तरह अपनी जान बचा ली। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि संकट की घड़ी में बुद्धिमानी से काम लेना चाहिए और हमें अपने आसपास के संकेतों को पहचानना तथा उनका सही मूल्यांकन करना आना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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