सुप्रभात बालमित्रों!
5 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 5 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"वातावरण में परिवर्तन से अधिक स्वयं में बदलाव की ज़रूरत होती है।"
"A change of self is needed more than a change of scene."
अक्सर हम सोचते हैं कि हमारी समस्याओं का हल बाहरी वातावरण के बदलाव में है। लेकिन सच में, यदि हम अपने भीतर परिवर्तन लाते हैं, तो हम किसी भी परिस्थिति का सामना करने में सक्षम हो जाते हैं। जब हम अपने विचारों, आदतों और दृष्टिकोण को सुधारने की दिशा में काम करते हैं, तो हम बेहतर व्यक्ति बनते हैं। हम अपने भीतर के बदलाव से ही अपनी बाहरी समस्याओं का हल पा सकते हैं। इस कथन का मर्म यही है कि असली परिवर्तन हमारे भीतर से शुरू होता है। बाहरी परिवेश में बदलाव लाने से पहले हमें अपने अंदर झांकना चाहिए और स्वयं में सुधार करना चाहिए।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Efficacy : प्रभावकारिता। Efficacy का अर्थ है — किसी चीज़ के प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता या सफलता से परिणाम देने की योग्यता। यह शब्द अक्सर दवाओं, उपायों, नीतियों, या किसी विधि की प्रभावशीलता के संदर्भ में प्रयोग होता है।
वाक्य प्रयोग: The efficacy of the vaccine is tested by doctors. टीके की प्रभावकारिता डॉक्टरों द्वारा जाँची जाती है।
उत्तर : जूता
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 5 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1950 – योगी, दार्शनिक, स्वतंत्रता सेनानी श्री अरविंदो घोष का पांडिचेरी में निधन।
- 1960 – भारत में पहली बार सब्सक्राइबर ट्रंक डायलिंग STD सेवा का सफलतापूर्वक उद्घाटन हुआ, जब कानपुर और लखनऊ के बीच देश का पहला ऑटोमेटिक ट्रंक कॉल बिना ऑपरेटर के डायल किया गया। यह कॉल तत्कालीन संचार मंत्री जगजीवन राम ने किया था।
- 1971 – भारत ने बांग्लादेश को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता दी। भूटान के बाद भारत दूसरा देश था जिसने यह मान्यता दी।
- 2013 – दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति तथा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नेल्सन मंडेला का 95 वर्ष की आयु में जोहान्सबर्ग में निधन हुआ। वे लंबे समय से फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थे। यह तिथि विश्व स्तर पर आधिकारिक रूप से दर्ज है।
- 1985 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 40/212 पारित कर 5 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस International Volunteer Day for Economic and Social Development के रूप में मान्यता दी। पहली बार यह दिवस 1986 में मनाया गया।
- 2014 – खाद्य एवं कृषि संगठन FAO ने 5 दिसंबर को विश्व मृदा दिवस World Soil Day के रूप में घोषित किया तथा 2014 में पहली बार इसे विश्व स्तर पर मनाया गया।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “नेल्सन मंडेला” के बारे में।
नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के महान नेता और मानवता के सच्चे उपासक थे। उनका जन्म 18 जुलाई 1918 को म्वेज़ो गाँव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को देश के लोगों की आज़ादी और समान अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। मंडेला ने रंगभेद : नीति काले और गोरे लोगों के बीच भेदभाव के खिलाफ लंबा संघर्ष किया। इस संघर्ष के कारण उन्हें 27 साल तक जेल में रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जेल से निकलने के बाद भी उन्होंने शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। सन 1994 में वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। उनके नेतृत्व में देश में समानता और न्याय की नई शुरुआत हुई। नेल्सन मंडेला को 1993 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि साहस, धैर्य और क्षमा से दुनिया बदली जा सकती है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 5 दिसंबर को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस” के बारे में:
अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस हर साल 5 दिसंबर को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 17 दिसंबर 1985 को पारित एक प्रस्ताव से हुई थी। यह दिवस स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले स्वयंसेवकों के योगदान के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वयंसेवा यानी Volunteering के महत्व को उजागर करना और लोगों को स्वयंसेवक कार्यों में भाग लेने के लिए प्रेरित करना है। इस दिन विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों द्वारा समाज, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा के क्षेत्र में किए गए योगदान का सम्मान किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हर व्यक्ति का योगदान आवश्यक है। स्वयंसेवकों का निःस्वार्थ कार्य समाज में एकता, सहयोग और करुणा की भावना को मजबूत बनाता है। इसलिए, हमें भी समाज सेवा में भाग लेकर एक बेहतर दुनिया के निर्माण में सहयोग देना चाहिए।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “बल से बड़ी बुद्धि”
एक गुफा में एक बड़ा ताकतवर शेर रहता था। वह प्रतिदिन जंगल के अनेक जानवरों को मार डालता था। उस वन के सारे जानवर उसके डर से काँपते रहते थे। एक बार जानवरों ने सभा की। उन्होंने निश्चय किया कि शेर के पास जाकर उससे निवेदन किया जाए कि हर दिन एक पशु शेर के भोजन की व्यवस्था के लिए गुफा में भेज दिया जाए, जिससे बाकी सभी जानवर सुरक्षित रहें। शेर इस प्रस्ताव पर मान गया। एक दिन शेर के पास जाने की बारी एक खरगोश की आ गई। वह खरगोश बुद्धिमान था। जब खरगोश शेर के पास पहुँचा, तो शेर जोर से गरजा और बोला, "तुझे इतनी देर कैसे हुई?" खरगोश बनावटी डर से काँपते हुए बोला, "महाराज, रास्ते में एक शेर ने मुझे रोक लिया। उसने मुझे पकड़ लिया और कहा कि वह हमारे राजा को मार देगा। मैंने उससे कहा कि यदि तुमने मुझे मार दिया, तो हमारे राजा तुम्हारे प्राण ले लेंगे। उसने पूछा, 'कौन है तुम्हारा राजा?' इस पर मैंने आपका नाम बता दिया।"
खरगोश की बात सुनकर शेर का क्रोध बढ़ गया। उसने गरजकर कहा, "चलो, मुझे दिखाओ कि वह दुष्ट शेर कहाँ रहता है?" खरगोश शेर को लेकर एक गहरे कुँए के पास पहुँचा। खरगोश ने कुँए के पास जाकर कहा, "महाराज, वह शेर इस कुँए के अंदर है।" शेर ने कुँए में झाँका, तो उसे अपनी ही परछाई दिखी। शेर ने सोचा कि वह दूसरा शेर है और गुस्से में उसने कुँए में छलांग लगा दी। शेर की मौत हो गई। इस प्रकार, बुद्धिमान खरगोश ने अपनी चतुराई से शेर से पूरे जंगल को बचा लिया। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि बुद्धि और चतुराई से बलवान को भी पराजित किया जा सकता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







