सुप्रभात बालमित्रों!
29 जनवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 29 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "बीमारी की कड़वाहट से व्यक्ति स्वास्थ्य की मिठास समझ पाता है।" "From the bitterness of disease man learns the sweetness of health."
इस कथन का अर्थ है कि जब हम बीमार होते हैं और बीमारी की कड़वाहट का अनुभव करते हैं, तब हमें अच्छे स्वास्थ्य की महत्ता और उसके लाभ का सही अर्थ समझ में आता है। सरल शब्दों में, जब हम बीमार पड़ते हैं और दर्द, कष्ट और असुविधा का सामना करते हैं, तब हमें यह अहसास होता है कि स्वस्थ रहना कितना महत्वपूर्ण और सुखदायक है। यह अनुभव हमें सिखाता है कि हमें अपने स्वास्थ्य की देखभाल कैसे करनी चाहिए और उसे प्राथमिकता देनी चाहिए। क्योंकि जब हम स्वस्थ होते हैं, तभी हम जीवन का पूर्ण आनंद उठा सकते हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: Territory : क्षेत्र Territory का अर्थ होता है एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र या स्थान जिसे किसी व्यक्ति, समूह या देश द्वारा नियंत्रित या अधिकारित किया जाता है।
उदाहरण: "This garden is my territory, and I take care of it." "यह बगीचा मेरा क्षेत्र है, और मैं इसकी देखभाल करता हूँ।"
उत्तर : आम
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 29 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1780: आज ही के दिन भारत का पहला समाचार पत्र, बंगाल गजट, का कोलकाता से प्रकाशन आरंभ हुआ। यह अंग्रेजी भाषा का समाचार पत्र था, जिसके संपादक जेम्स आगस्टस हिक्की थे।
- 1939: रामकृष्ण मिशन सांस्कृतिक संस्थान की स्थापना की गई, जिसका मुख्यालय कोलकाता के गोल पार्क में स्थित है।
- 1953: आज ही के दिन भारतीय संगीत नाटक अकादमी की स्थापना हुई। यह भारत सरकार द्वारा स्थापित भारत की संगीत एवं नाटक की राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी अकादमी है, जिसका मुख्यालय दिल्ली में है। संगीत नाटक अकादमी की स्थापना संगीत, नाटक और नृत्य कलाओं को प्रोत्साहन देने तथा उनके विकास और उन्नति के लिए विविध प्रकार के कार्यक्रमों का संचालन करने के उद्देश्य से की गई थी।
- 1970: प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज और ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर का जन्म हुआ।
- 1988: में आज ही यूनाइटेड एयरलाइंस के विमान बोइंग 747 एसपी ने 36 घंटे 54 मिनट 15 सेकेंड में पूरे विश्व का चक्कर लगाया।
- 1992: भारत दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) का क्षेत्रीय सहयोगी बना।
अभ्युदयवाणी में अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज और ओलंपिक पदक विजेता " राज्यवर्धन सिंह राठौर" के बारे में।
राज्यवर्धन सिंह राठौर भारत के प्रसिद्ध निशानेबाज, ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। उनका जन्म 29 जनवरी 1970 को राजस्थान में हुआ। वे भारतीय सेना में अधिकारी रहे और वहीं से उन्होंने शूटिंग की ओर कदम बढ़ाया। राठौर ने 2004 एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा और ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भी स्वर्ण सहित अनेक पदक जीते। उनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार, राजीव गांधी खेल रत्न और पद्म श्री से सम्मानित किया। खेलों से संन्यास लेने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और संसद सदस्य बने। बाद में वे भारत सरकार में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री भी रहे। अनुशासन, देशभक्ति और उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण राज्यवर्धन सिंह राठौर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत माने जाते हैं।
अभ्युदयवाणी में आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 29 जनवरी को मनाये जाने वाले “ भारतीय समाचार पत्र दिवस” के बारे में:
भारतीय समाचार पत्र दिवस हर साल 29 जनवरी को मनाया जाता है। यह 1780 में भारत के पहले समाचार पत्र, द बंगाल गजट के प्रकाशन का प्रतीक है। इस दिन को समाचार पत्रों के ज्ञान और जागरूकता फैलाने में उनके महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। पहला भारतीय समाचार पत्र "हिकीज़ बंगाल गजट" कहलाता था, जिसे "कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर" भी कहा जाता था। इसे 29 जनवरी, 1780 को जेम्स ऑगस्टस हिकी द्वारा कोलकाता में प्रकाशित किया गया था।
उस समय, प्रिंट मीडिया संचार का एकमात्र माध्यम था जो बहुत महंगा नहीं था और उपयोगी जानकारी प्रदान करता था। हालांकि, अंग्रेजों को पता था कि अखबार उनकी सरकार को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए उन्होंने 1782 में हिकीज़ बंगाल गजट को बंद करने का फैसला किया। समाचार पत्र नई-नई कहानियों के माध्यम से बच्चों को नए शब्दों से परिचित कराते हैं, जिससे उनकी शब्दावली बढ़ती है और संचार कौशल में सुधार होता है। बच्चों के पढ़ने और समझने के कौशल में सुधार होता है। दुनिया में वर्तमान घटनाओं के बारे में समाचार पत्रों में छपे लेखों को पढ़कर उनके बारे में चर्चाएं शुरू की जा सकती हैं। भारतीय समाचार पत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि समाचार पत्र ज्ञान और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व के महानतम दार्शनिकों में से एक, सुकरात, एक बार अपने शिष्यों के साथ बैठे चर्चा कर रहे थे। तभी वहां एक ज्योतिषी आया, जिसने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा, "मैं ज्ञानी हूँ, मैं किसी का चेहरा देखकर उसका चरित्र बता सकता हूँ। बताओ, तुममें से कौन मेरी इस विद्या को परखना चाहेगा?" सभी शिष्य सुकरात की ओर देखने लगे। सुकरात ने मुस्कुराते हुए कहा, "मुझे बताओ।" ज्योतिषी ने कुछ देर सुकरात का चेहरा निहारा और फिर बोला, "तुम्हारे चेहरे की बनावट बताती है कि तुम सत्ता के विरोधी हो। तुम्हारे अंदर द्रोह करने की भावना प्रबल है। तुम्हारी आँखों के बीच की सिकुड़न तुम्हारे अत्यंत क्रोधी होने का प्रमाण देती है। तुम्हारे बेडौल सिर और माथे से पता चलता है कि तुम लालची हो, और तुम्हारी ठुड्डी की बनावट तुम्हारे सनकी होने का संकेत देती है।" यह सुनकर शिष्य क्रोधित हो गए, लेकिन इसके विपरीत, सुकरात प्रसन्न हो गए और उन्होंने ज्योतिषी को इनाम देकर विदा किया। शिष्य सुकरात के इस व्यवहार से आश्चर्यचकित हो गए और पूछा, "गुरूजी, आपने उस ज्योतिषी को इनाम क्यों दिया, जबकि उसने जो कुछ भी कहा वह सब गलत है?" सुकरात ने हंसते हुए कहा, "नहीं, पुत्रो। ज्योतिषी ने जो कुछ भी कहा, वह सच है। उसके बताए सारे दोष मुझमें हैं - मुझे लालच है, क्रोध है, और उसने जो कुछ भी कहा, वह सब है। पर वह एक बहुत ज़रूरी बात बताना भूल गया। उसने सिर्फ बाहरी चीजें देखीं, पर मेरे अंदर के विवेक को नहीं आंक पाया, जिसके बल पर मैं इन सारी बुराइयों को अपने वश में किए रहता हूँ। बस वह यहीं चूक गया, वह मेरे बुद्धि के बल को नहीं समझ पाया।" इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बाहरी रूप और दोषों से ज्यादा महत्वपूर्ण हमारी आंतरिक बुद्धि और विवेक होता है। जो व्यक्ति अपनी बुद्धि का सही उपयोग करता है, वह अपने दोषों पर विजय प्राप्त कर सकता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







