सुप्रभात बालमित्रों!
30 जनवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 30 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "गुस्से से ज्ञान का प्रकाश बुझ जाता है।" "Anger blows out the candle of the mind.
इस कथन का अर्थ है कि जब हम गुस्से में होते हैं, तो हमारा विवेक और ज्ञान कम हो जाता है। गुस्से की वजह से हमारा मन और सोचने-समझने की शक्ति धुंधली हो जाती है, और हम सही निर्णय नहीं ले पाते। गुस्सा हमारे मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है और हमें उन गलतियों की ओर धकेलता है जिन्हें हम सामान्य स्थिति में नहीं करते। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें और अपनी सोच और समझ को सदैव सक्रिय और स्पष्ट रखें। यह हमें जीवन में सही निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान ढूंढने में मदद करता है।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: Arrange व्यवस्थित करना, Arrange का अर्थ होता है किसी वस्तु, कार्यक्रम, गतिविधि, या परिस्थिति को एक विशेष क्रम या तरीके से संगठित करना।
उदाहरण - "Please arrange the books on the shelf in alphabetical order." "किताबों को अलमारी में वर्णमाला क्रम में व्यवस्थित करो।"
उत्तर : पपीता।
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 30 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1882 में आज ही संयुक्त राज्य अमेरिका के 32वें राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट का जन्म हुआ। उन्होंने अमेरिका को महान मंदी से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 1890 में आज ही हिंदी साहित्य के एक प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ। उनकी रचनाएँ जैसे कामायनी, चन्द्रगुप्त आदि हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।
- 1910 में आज ही भारत में हरित क्रांति के राजनीतिक वास्तुकार चिदम्बरम सुब्रह्मण्यम का जन्म हुआ। उन्होंने देश के कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए।
- 1945: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सोवियत पनडुब्बी द्वारा 'विल्हेम गुस्टलोफ़' जहाज को डुबोया गया, जो इतिहास की सबसे भयानक समुद्री आपदाओं में से एक है, जिसमें करीब 9,400 लोग मारे गए।
- 1948 में आज ही महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे ने हत्या कर दी थी। यह भारत के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। इस दिन को महात्मा गांधी की स्मृति में शहीद दिवस, शोक दिवस, नशामुक्ति संकल्प दिवस और कुष्ठ निवारण दिवस के रूप में मानते हैं।
- 1997: महात्मा गांधी की मृत्यु के 47 वर्षों बाद उनकी अस्थियाँ संगम में विसर्जित की गईं।
- 1968: प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार, कवि, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का निधन 78 वर्ष की आयु में भोपाल, मध्य प्रदेश में हुआ।
- 2020: विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने COVID-19 को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया।
अभ्युदयवाणी में अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'चिदंबरम सुब्रमण्यम’ के बारे में:
30 जनवरी, 1910 को जन्मे चिदंबरम सुब्रमण्यम भारत के महान नेताओं में से एक थे जिन्होंने देश को खाद्य संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें भारत की हरित क्रांति का राजनीतिक वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद वे संविधान सभा के सदस्य बने और विभिन्न मंत्रालयों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे। उन्होंने पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी, तीनों के साथ मंत्री पद पर काम किया। कृषि मंत्री रहते हुए उन्होंने उच्च उपज वाली गेहूं की किस्मों को भारत में लाने और उनके प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अमेरिकी वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग के साथ सहयोग किया और किसानों को इन नई किस्मों के बारे में जागरूक किया। इसके अलावा, उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया। चिदंबरम सुब्रमण्यम के प्रयासों से भारत में खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। देश खाद्यान्न के आयात पर निर्भरता से मुक्त होकर एक खाद्यान्न निर्यातक देश बन गया। हरित क्रांति ने लाखों किसानों के जीवन को बेहतर बनाया और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। उन्हें 1998 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए उनके प्रयासों को हमेशा सराहा जाएगा।
अभ्युदयवाणी में आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 30 जनवरी को मनाये जाने वाले “शहीद दिवस” के बारे में:
30 जनवरी, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, जब हम अपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हैं। इसी दिन 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा गांधी की हत्या कर दी गयी थी। महात्मा गांधी ने अहिंसा के मार्ग से भारत को आजाद करवाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। शहीद दिवस पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, रक्षा कर्मचारियों के प्रमुख और तीनों सेना प्रमुख राजघाट समाधि परिसर पर एकत्रित होते हैं और बहुरंगी फूलों से सजे माल्यार्पण करते हैं। सशस्त्र बलों के जवानों द्वारा लास्ट पोस्ट की धुन बजाते हुए बिगुल फूंका जाता है। अंतर-सेवा दल सम्मान के निशान के रूप में हथियारों को उलट देता है। पूरे देश में सुबह 11 बजे भारतीय शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखा जाता है। प्रतिभागी सर्व-धर्म प्रार्थना करते हैं और श्रद्धांजलि गीत गाते हैं। शहीद दिवस हमें अहिंसा का महत्व, देशभक्ति, एकता और सर्वधर्म समभाव सिखाता है और एकजुट होकर काम करने तथा राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।
एक बार की बात है, एक शिल्पकार ने मूर्ति बनाने के लिए एक बड़े से पत्थर को उठाया और अपने औजारों से उस पर कारीगरी शुरू कर दी। औजारों की चोट जब पत्थर पर लगी, तो वह पत्थर बोलने लगा, "मुझे छोड़ दो। इससे मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अगर तुम मुझ पर चोट करोगे, तो मैं बिखर जाऊँगा। किसी और पत्थर पर मूर्ति बना लो।" पत्थर की बात सुनकर शिल्पकार को दया आ गई। उसने उसे छोड़ दिया और वहीँ पर पड़े दूसरे पत्थर पर कारीगरी शुरू कर दी। दूसरा पत्थर शांत रहा और कुछ नहीं बोला। कुछ समय में शिल्पकार ने उस पत्थर से एक बहुत ही सुंदर भगवान की मूर्ति बना दी। गाँव के लोग मूर्ति बनने के बाद उसे लेने आए। उन्होंने सोचा कि उन्हें नारियल फोड़ने के लिए एक और पत्थर की जरूरत होगी। इसलिए उन्होंने वहाँ रखे पहले पत्थर को भी अपने साथ ले लिया। मूर्ति को मंदिर में सजा दिया गया और उसके सामने उसी पत्थर को रख दिया गया। अब जब भी कोई व्यक्ति मंदिर में दर्शन करने आता, वह भगवान की मूर्ति को फूलों से पूजा करता, दूध से स्नान कराता और उस पत्थर पर नारियल फोड़ता था। जब लोग उस पत्थर पर नारियल फोड़ते, तो वह बहुत परेशान होता और सोचता, "मेरी किस्मत ही खराब है।" मूर्ति बने पत्थर ने यह देखकर कहा, "जब शिल्पकार तुम पर कारीगरी कर रहा था, अगर तुम उस समय उसे नहीं रोकते, तो आज मेरी जगह तुम होते। लेकिन तुमने आसान रास्ता चुना और इसलिए अब तुम दुःख उठा रहे हो।" इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कठिनाइयों का सामना किए बिना, सफलता और सम्मान प्राप्त नहीं हो सकता। हमें कठिनाइयों और दर्द से बचने के बजाय, उनका सामना करना चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







