सुप्रभात बालमित्रों!
29 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 29 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
“आपका दृष्टिकोण ही आपकी ऊँचाइयाँ तय करता है।”
“It is your attitude that determines your altitude.”
इस सुविचार का अर्थ है कि जीवन में आप कहाँ तक पहुँचेंगे, कितनी सफलता पाएँगे, यह आपके हालात, किस्मत या साधनों पर पूरी तरह निर्भर नहीं करता—बल्कि आपका रवैया, आपका नजरिया और चुनौतियों को देखने का तरीका सबसे ज़्यादा मायने रखता है। यदि आपका रवैया सकारात्मक है, तो आप मुश्किलों को भी अवसर की तरह देखते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। एक नकारात्मक रवैया छोटे-से काम को भी कठिन बना देता है और आप जल्दी हार मान लेते हैं। आपका आत्मविश्वास, मेहनत, सोच और व्यवहार ही तय करते हैं कि आप जीवन में कितनी ऊँचाई तक पहुँचेंगे। जिस व्यक्ति का attitude मजबूत, सकारात्मक और सीखने वाला होता है, वह समस्याओं से डरता नहीं है, बल्कि आगे बढ़ने के रास्ते खोज लेता है और जीवन में बड़ी ऊँचाइयाँ हासिल करता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: HANDLE : हैंडल: हत्था / पकड़ और संभालना / निपटना
· वाक्य प्रयोग: The handle of this bucket is broken. इस बाल्टी का हैंडल टूट गया है।
· She can handle difficult situations very well. वह कठिन परिस्थितियों को बहुत अच्छी तरह संभाल लेती है।
उत्तर : हलवा
· अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 29 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1530 – मुगल सम्राट बाबर के निधन के बाद उनके पुत्र हुमायूं ने मुगल साम्राज्य की बागडोर संभाली तथा अगरा को अपनी राजधानी बनाया।
- 1844 – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी का कलकत्ता अब कोलकाता में जन्म हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख वकील एवं विचारक थे।
- 1845 – अमेरिकी कांग्रेस ने टेक्सास गणराज्य के विलय की मंजूरी दी, जिससे टेक्सास संयुक्त राज्य अमेरिका का 28वां राज्य बना।
- 1911 – चीनी क्रांति के प्रमुख नेता सुन यात-सेन को नवगठित चीन गणराज्य का प्रथम राष्ट्रपति घोषित किया गया।
- 1942 – हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना मूल नाम जतिन खन्ना का अमृतसर पंजाब में जन्म हुआ।
- 1972 – कोलकाता मेट्रो भारत की पहली मेट्रो रेल का निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू हुआ, जो 1984 में पहला चरण खुला।
- 1977 – मुंबई तत्कालीन बॉम्बे में विश्व का सबसे बड़ा ओपन-एयर थिएटर प्राइव Drive-In थिएटर खुला।
- 1984 – राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 508 में से 401 सीटें जीतकर रिकॉर्ड तोड़ विजय हासिल की।
- 1989 – चेकोस्लोवाकिया में वेल्वेट क्रांति के बाद नाटककार वात्स्लाव हावेल को देश का राष्ट्रपति चुना गया। यह वहाँ के कम्युनिस्ट शासन का शांतिपूर्ण अंत था।
- 1997 – हांगकांग में बर्ड फ्लू H5N1 का पहला मानव संक्रमण पुष्टि हुआ। सरकार ने 18 लाख मुर्गियाँ मारकर महामारी रोकी।
- 2013 – जर्मनी के महान फॉर्मूला-1 ड्राइवर माइकल शूमाकर फ्रांस में स्कीइंग के दौरान गंभीर दुर्घटना में घायल हुए।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष “व्योमेश चंद्र बनर्जी” के बारे में।
व्योमेश चंद्र बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष थे। उनका जन्म 29 दिसंबर 1844 को कोलकाता में हुआ था। वे अपने समय के प्रसिद्ध वकील और विद्वान माने जाते थे। 1885 में जब भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना हुई, तब उसके पहले अधिवेशन की अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की। यह अधिवेशन बंबई अब मुंबई में आयोजित हुआ था। उन्होंने भारतीय राजनेताओं को एक मंच पर लाने, उनके विचारों को दिशा देने और अंग्रेज़ सरकार तक भारतीयों की मांगें पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि भारत की प्रगति संवाद, संगठन और संवैधानिक तरीकों से ही संभव है। वे मध्यमार्गी नेताओं में गिने जाते थे और शांतिपूर्ण ढंग से देश की समस्याओं के समाधान के समर्थक थे। व्योमेश चंद्र बनर्जी ने भारतीय राजनीति को एक व्यवस्थित स्वरूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे 1906 में इंग्लैंड में स्वर्गवासी हो गए, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनके योगदान को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 29 दिसंबर को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस” के बारे में:
अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस यानी International Day for Biological Diversity पृथ्वी के जीवन-जाल की रक्षा का वैश्विक आह्वान है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मनुष्य सहित सभी जीव–जन्तु, पेड़–पौधे, सूक्ष्मजीव और उनके पारिस्थितिक तंत्र एक-दूसरे से गहरे जुड़े हैं; एक कड़ी टूटे तो पूरा ताना-बाना खतरे में पड़ जाता है। 1992 में रियो डी जनेरियो के अर्थ समिट में 150 से अधिक देशों ने जैव विविधता संधि Convention on Biological Diversity पर हस्ताक्षर किए। यह संधि 29 दिसंबर 1993 को प्रभावी हुई, इसलिए शुरू में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 29 दिसंबर को ही मनाया जाता था। वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे 22 मई कर दिया ताकि उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों की शुरुआत के साथ अधिक लोग प्रकृति के बीच जागरूकता कार्यक्रमों में भाग ले सकें। जैव विविधता हमारे भोजन का 90% से अधिक स्रोत, दवाओं का प्रमुख आधार, स्वच्छ हवा-जल का फिल्टर और जलवायु नियंत्रण का सबसे बड़ा उपकरण है। फिर भी हर दिन दर्जनों प्रजातियाँ विलुप्त हो रही हैं। वनों की कटाई, प्रदूषण, अवैध शिकार और जलवायु परिवर्तन इस संकट के प्रमुख कारण हैं। यह दिन सिर्फ़ जागरूकता नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का आह्वान है: वृक्षारोपण, संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार, प्लास्टिक का कम उपयोग, स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण और सतत विकास। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस हमें चेताता है कि प्रकृति को बचाना अपने भविष्य को बचाना है। एक प्रजाति के खोने का मतलब है जीवन के उस अद्वितीय अध्याय का हमेशा के लिए बंद हो जाना, जिसे फिर कभी नहीं पढ़ा जा सकेगा।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “पछतावा”
एक नौजवान ने कड़ी मेहनत और ईमानदारी से पैसे बचाकर अपनी पसंदीदा कार खरीदी थी। वह अपनी कार की बहुत देखभाल करता और बड़े गर्व से उसे चमकाता था। एक रविवार को वह कार को रगड़–रगड़ कर साफ कर रहा था। उसका पाँच वर्षीय बेटा भी पास ही खेलते-खेलते उसे बड़े ध्यान से देख रहा था। कार धोते समय अचानक उसकी नज़र इस बात पर पड़ी कि उसका बेटा कार के बोनट पर किसी नुकीली चीज़ से खुरच-खुरच कर कुछ लिख रहा है। यह देखकर वह ग़ुस्से से आग-बबूला हो गया और बिना सोचे-समझे बेटे को बुरी तरह पीट दिया। ग़ुस्से में उसने इतना मार दिया कि बच्चे की एक उंगली टूट गई। कुछ देर बाद जब उसका ग़ुस्सा शांत हुआ तो उसने सोचा कि जाकर देखूँ कि कार को कितनी खरोंच आई है। जैसे ही वह कार के पास पहुँचा, उसके पैर लड़खड़ा गए और दिल बैठ गया। जहाँ वह खरोंच समझ रहा था, वहाँ उसके बेटे ने छोटे-छोटे अक्षरों में लिखा था— “Papa, I love you.” यह पढ़ते ही वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसे समझ आ गया कि उसने प्यार की भावना को नासमझी में दर्द में बदल दिया। उसका पछतावा कभी खत्म नहीं हो सकता था। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि किसी के बारे में निर्णय लेने या ग़ुस्से में प्रतिक्रिया देने से पहले उसकी नीयत और भावनाओं को समझना बहुत ज़रूरी है। ग़ुस्सा अक्सर रिश्तों को तोड़ता है, जबकि धैर्य और समझ रिश्तों को हमेशा मजबूती देते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







