26 December AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢






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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

26 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 26 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "जीवन केवल जीविका अर्जन नहीं, अपना प्रभाव डालने के बारे में है, ।"
"Life is about making an impact, not making an income."

यह प्रेरक कथन हमें सिखाता है कि केवल जीविका अर्जन से अधिक महत्वपूर्ण है समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालना। जब हम अपने कार्यों और विचारों से दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, तो हम न केवल अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी समृद्ध बनाते हैं। अपने कार्यों से समाज पर प्रभाव डालने का मतलब है कि हम अपनी जिम्मेदारियों को समझें और अपने आस-पास के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करें। यह प्रभाव छोटे-छोटे कार्यों से भी हो सकता है, जैसे किसी की मदद करना, प्रेरित करना, या समाज के लिए कुछ सार्थक करना। इसलिए, जीवन में न केवल जीविका अर्जन पर ध्यान केंद्रित करें, बल्कि अपने कार्यों और विचारों से समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने का प्रयास करें। यही सच्ची संतुष्टि और खुशी का मार्ग है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Appoint : नियुक्त करना 'Appoint' का मतलब है किसी व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर कोई नौकरी या ज़िम्मेदारी देना।

वाक्य प्रयोग: "We've appointed three new teachers this year" हमने इस साल तीन नए शिक्षकों को नियुक्त किया है।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  एक हाथ का प्राणी अचल, हाथ हिलाओ निकले जल।
उत्तर : हैंडपंप
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 26 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1704 – चमकौर का युद्ध हुआ, जिसमें सिख गुरु गोबिंद सिंह के दो छोटे साहिबजादों जोरावर सिंह, 9 वर्ष, एवं फतेह सिंह, 6 वर्ष की शहादत हुई, जो धर्म एवं सत्य के लिए दी गई प्राणों की आहुति का प्रतीक बनी तथा हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • 1899 – जन्मस्थली सुनाम पंजाब में उधम सिंह मूल नाम शेर सिंह का जन्म हुआ, जो जलियांवाला बाग नरसंहार 1919 के बदले 1940 में लंदन में माइकल ओ'डायर की हत्या करने वाले प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी बने।
  • 1904 – दिल्ली से मुंबई के बीच भारत की पहली क्रॉस-कंट्री मोटरकार रैली का उद्घाटन हुआ, जो ब्रिटिश भारत में मोटरिंग उत्साह का प्रतीक बनी तथा बाद में बॉम्बे-नागपुर रैली के रूप में प्रसिद्ध हुई।
  • 1906 – मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के एथेनियम थिएटर में 'द स्टोरी ऑफ द केली गैंग' का प्रीमियर हुआ, जो दुनिया की पहली मल्टी-रील फीचर-लेंथ फिल्म थी तथा ऑस्ट्रेलियाई बुशरेंजर नेड केली की कहानी पर आधारित थी।
  • 1925 – कानपुर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी CPI की स्थापना हुई, जो स्वतंत्रता संग्राम एवं मजदूर-किसान आंदोलन का प्रमुख संगठन बनी।
  • 1933 – अमेरिकी इंजीनियर एडविन एच. आर्मस्ट्रॉन्ग ने FM फ्रीक्वेंसी मॉड्यूलेशन रेडियो का पेटेंट कराया, जो स्थिर हस्तक्षेप कम करने वाली तकनीक थी तथा उच्च-गुणवत्ता वाले रेडियो प्रसारण का आधार बनी।
  • 1947 – भारत के नौवें राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा का निधन हुआ, जो संविधान सभा के सदस्य एवं पूर्व उपराष्ट्रपति थे तथा 1992-1997 तक राष्ट्रपति रहे।
  • 1982 – टाइम मैगजीन ने अपना 'मैन ऑफ द ईयर' अवॉर्ड पहली बार एक व्यक्ति के बजाय कंप्यूटर को प्रदान किया, जो डेटा स्टोरेज, रिट्रीवल एवं प्रोसेसिंग की क्रांतिकारी क्षमता के लिए था।
  • 1997 – ओडिशा के प्रमुख नेता नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल BJD पार्टी की स्थापना की, जो राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी बनी।
  • 2004 – इंडोनेशिया के सुमात्रा के पास 9.1 तीव्रता का भूकंप समुद्री सुनामी पैदा कर भारत तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड सहित 14 देशों में तबाही मचा दी, जिसमें 230,000 से अधिक लोग मारे गए तथा यह आधुनिक इतिहास की सबसे घातक प्राकृतिक आपदा बनी।
  • 2006 – ऑस्ट्रेलियाई लेग-स्पिनर शेन वॉर्न ने सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में अंतर्राष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में 700 विकेट पूरे कर इतिहास रचा।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे महान क्रांतिकारी “उधम सिंह” के बारे में।

शहीद-ए-आज़म उधम सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अदम्य क्रांतिकारियों में से थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचारों के विरुद्ध अपना सम्पूर्ण जीवन बलिदान कर दिया। उनका जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के सुनाम में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता के देहांत के कारण उनका पालन-पोषण अनाथालय में हुआ, लेकिन जीवन की कठिनाइयों ने उनके साहस को और प्रबल बना दिया। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में जनरल डायर द्वारा किए गए भीषण नरसंहार ने उधम सिंह के जीवन की दिशा बदल दी। हजारों निर्दोष लोगों के रक्तपात को अपनी आँखों से देखकर उनके भीतर अंग्रेजी शासन के प्रति गहरा क्रोध उमड़ पड़ा। तभी उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वे इस अमानवीय अत्याचार का बदला अवश्य लेंगे। वर्षों तक विदेशों में रहकर उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों को समर्थन दिया और उचित अवसर की प्रतीक्षा करते रहे। अंततः 13 मार्च 1940 को उन्होंने लंदन में माइकल ओ’डायर की गोली मारकर उस नरसंहार का प्रतिशोध लिया, जिसे भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। घटना के तुरंत बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 31 जुलाई 1940 को फांसी दे दी गई। उधम सिंह का साहस, अटूट देशभक्ति और अद्वितीय बलिदान आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायकों में सदैव स्मरणीय रहेंगे।

👁️ आज का दैनिक विशेष – वीर बाल दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 26 दिसंबर को मनाये जाने वाले “वीर बाल दिवस” के बारे में:

भारत में हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस सिख इतिहास के उन महान वीरों—साहिबजादों—की शहादत को स्मरण करने के लिए समर्पित है, जो धर्म, सत्य और स्वतंत्रता की रक्षा हेतु वीरतापूर्वक बलिदान हो गए। मुगल शासनकाल के दौरान सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्र—साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह—खालसा पंथ के गौरवशाली सदस्य थे, जिसे 1699 में गुरु जी ने धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने और जनता की रक्षा के उद्देश्य से स्थापित किया था। गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों पुत्र कम उम्र में ही युद्धभूमि और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। विशेष रूप से साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी को मात्र 9 और 7 वर्ष की आयु में मुगल शासन द्वारा शहीद कर दिया गया। उनके अतुलनीय साहस और बलिदान को राष्ट्र में सदा अमर रखने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जनवरी 2022 को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर घोषणा की कि 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक, शैक्षिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि छोटे-बड़े सभी बच्चे साहिबजादों के साहस, त्याग, दृढ़ संकल्प और धार्मिक स्वतंत्रता के महत्व से परिचित हो सकें। वीर बाल दिवस हमें यह संदेश देता है कि सच्चा साहस उम्र का मोहताज नहीं होता और धर्म तथा मानवता की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान सदैव अमर रहता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “लालची चिड़िया”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “लालची चिड़िया”

एक बार की बात है, एक छोटी चिड़िया भोजन की तलाश में दूर-दूर तक उड़ती फिर रही थी। उड़ते-उड़ते वह जंगल से बाहर एक ऐसे रास्ते पर पहुँची जहाँ से अनाज से भरी गाड़ियाँ मंडी की ओर जाती थीं। रास्ते में बोरे हिलने के कारण थोड़ा-बहुत अनाज नीचे गिर जाता था और सड़क पर बिखर जाता था। इतने सारे दाने देखकर चिड़िया खुशी से फूली न समाई। उसने सोचा कि अब उसे भोजन ढूँढने के लिए कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन इसी के साथ उसके मन में लालच घर कर गया। उसने निश्चय किया कि वह इस जगह के बारे में किसी को नहीं बताएगी और रोज यहाँ आकर पेट भर खाना खाएगी। शाम को जब वह अपने दल में लौटी, तो साथियों ने देर से आने का कारण पूछा। लालची चिड़िया ने एक झूठी कहानी गढ़ ली। उसने कहा कि रास्ते पर इतनी तेज़-तेज़ गाड़ियाँ चलती हैं कि उसे अपनी जान बड़ी मुश्किल से बचानी पड़ी। यह सुनकर बाकी चिड़ियाँ डर गईं और उन्होंने तय किया कि वे उस रास्ते पर कभी नहीं जाएँगी। इस तरह वह चिड़िया कई दिनों तक अकेले ही उस रास्ते पर जाकर दाना खाती रही। पर एक दिन दाना चुगते-चुगते वह इतनी मग्न हो गई कि उसे अपनी ओर तेज़ी से आती गाड़ी की आवाज़ भी सुनाई नहीं दी। गाड़ी रुकने के बजाय तेज़ी से आगे बढ़ती गई और उसका पहिया चिड़िया के ऊपर से गुजर गया। लालच के कारण चिड़िया अपनी ही जाल में फँस गई और अपनी जान गँवा बैठी। यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच बुरी बला है। लालच हमें गलत रास्ते पर ले जाता है और कई बार हमें नुकसान पहुँचा देता है। जीवन में हमेशा संतोष, सच, और संयम का रास्ता अपनाना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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