सुप्रभात बालमित्रों!
25 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों! आज 25 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: ज्ञान का निवेश सर्वोत्तम भुगतान करता है। An investment in knowledge pays the best interest. -Benjamin Franklin
बेंजामिन फ्रैंकलिन का यह कथन बताता है कि ज्ञान का निवेश न केवल व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से समृद्ध बनाता है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के विकास की नींव भी है। जब हम ज्ञान अर्जित करते हैं, तो हम अपनी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ अपनी सोच, दृष्टिकोण और जीवन-स्तर को भी ऊँचा उठाते हैं। ज्ञान वह शक्ति है जो हमें नई ऊँचाइयों तक पहुँचने, कठिनाइयों का समाधान खोजने और अवसरों को पहचानने की क्षमता प्रदान करती है। यह हमें दूरदर्शिता, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास से भर देता है। निस्संदेह, ज्ञान में किया गया निवेश हमें दीर्घकालिक सफलता, स्थिरता और संतुष्टि प्रदान करता है। इसलिए, जीवन में ज्ञान अर्जित करना, उसे निरंतर बढ़ाना और व्यवहार में लाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: GINGLE : जिंगल : छोटा मधुर गाना। जिंगल एक छोटा और यादगार गीत होता है, जिसे आमतौर पर विज्ञापनों, रेडियो और टेलीविजन शो में उपयोग किया जाता है। यह गाना संक्षिप्त होता है और इसका उद्देश्य श्रोताओं के मन में बस जाना होता है।
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 25 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- • 1656 – डच खगोलशास्त्री और गणितज्ञ क्रिस्टियान ह्यूजेंस ने पहली पेंडुलम घड़ी का निर्माण किया, जिससे समय मापन की सटीकता में बड़ी क्रांति आई।
- • 1741 – स्वीडन के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री एंडर्स सेल्सियस ने सेंटीग्रेड (Celsius) तापमान पैमाना प्रस्तुत किया, जो आज विश्वभर में तापमान मापने की मानक प्रणाली बन चुका है।
- • 1864 – महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म हुआ।
- • 1924 – कानपुर में पहला अखिल भारतीय कम्युनिस्ट सम्मेलन आयोजित किया गया, जो भारतीय वामपंथी आंदोलन के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
- • 1924 – भारत के 10वें प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ। वे उदारवादी सोच, लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रभावशाली वक्तृत्व के लिए प्रसिद्ध रहे। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, संसद की समितियों के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने भारत की घरेलू और विदेश नीति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2015 में उन्हें भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।
- • 1977 – विश्वप्रसिद्ध हॉलीवुड अभिनेता और मूक फिल्मों के महान कलाकार चार्ली चैपलिन का निधन हुआ।
- • 2014 – भारत सरकार ने 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर “सुशासन दिवस” के रूप में मनाने की शुरुआत की।
- • 2021 – नासा ने दुनिया की सबसे बड़ी और शक्तिशाली अंतरिक्ष दूरबीन जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) को अंतरिक्ष में लॉन्च किया। यह दूरबीन ब्रह्मांड की उत्पत्ति, आकाशगंगाओं के निर्माण और दूरस्थ ग्रहों के अध्ययन के लिए बनाई गई है। यह पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर दूसरे लैग्रेंज बिंदु (L2) के पास सूर्य की परिक्रमा करती है।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “डच खगोलशास्त्री और गणितज्ञ क्रिस्टियान ह्यूजेंस” के बारे में।
क्रिस्टियान ह्यूजेंस 17वीं शताब्दी के प्रसिद्ध डच खगोलशास्त्री, गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी थे। उनका जन्म 14 अप्रैल 1629 को नीदरलैंड के हेग शहर में हुआ था। वे विज्ञान के कई क्षेत्रों—खगोलशास्त्र, प्रकाशिकी और यांत्रिकी—में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं। ह्यूजेंस ने 1656 में पहली पेंडुलम घड़ी का निर्माण किया, जिससे समय मापने की सटीकता पहले की तुलना में बहुत अधिक बढ़ गई। यह आविष्कार विज्ञान और नौवहन के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। खगोलशास्त्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने शक्तिशाली दूरबीन बनाकर शनि ग्रह के छल्लों (rings) की सही व्याख्या की और उसके सबसे बड़े उपग्रह टाइटन (Titan) की खोज की। प्रकाश के अध्ययन में उन्होंने प्रकाश की तरंग सिद्धांत (Wave Theory of Light) प्रस्तुत किया, जिसे बाद मंथ विज्ञान जगत में व्यापक स्वीकार्यता मिली। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “ह्यूजेंस का प्रकाश सिद्धांत” में इस सिद्धांत का विस्तृत वर्णन मिलता है। क्रिस्टियान ह्यूजेंस का निधन 8 जुलाई 1695 को हुआ, लेकिन उनके वैज्ञानिक शोध और आविष्कार आज भी आधुनिक विज्ञान की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 25 दिसंबर को मनाये जाने वाले “क्रिसमस डे” के बारे में:
क्रिसमस डे, जिसे बड़ा दिन भी कहा जाता है, हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यह ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो यीशु मसीह के जन्म का उत्सव है। क्रिसमस का इतिहास यीशु मसीह के जन्म से जुड़ा है, जो बेथलहम में हुआ था। ईसाई मान्यता के अनुसार, यीशु मसीह का जन्म मानवता को पापों से मुक्ति दिलाने के लिए हुआ था। इसलिए, क्रिसमस का दिन ईसाई धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है। क्रिसमस को विश्वभर में भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, क्रिसमस ट्री लगाते हैं और रंगीन लाइट्स का इस्तेमाल करते हैं। चर्चों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं और यीशु मसीह के जन्म की कथा पढ़ी जाती है। क्रिसमस के दिन का एक और महत्वपूर्ण पहलू सांता क्लॉज है। यह एक लोककथा है जिसमें एक खुशमिजाज बूढ़ा व्यक्ति बच्चों को उपहार देने के लिए क्रिसमस की रात को आता है। बच्चे सांता क्लॉज से उपहार पाने के लिए बहुत उत्साहित रहते हैं और क्रिसमस ट्री के नीचे अपने उपहार पाते हैं। क्रिसमस पर लोग विशेष भोजन बनाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ भोज का आयोजन करते हैं। इसमें केक, कुकीज और कई प्रकार के पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। क्रिसमस का त्योहार प्रेम, सद्भाव और साझा करने का संदेश देता है। लोग इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करते हैं और उनके साथ अपना सुख-सम्मान साझा करते हैं। क्रिसमस डे सिर्फ एक धार्मिक ही उत्सव नहीं, बल्कि यह एक ऐसा दिन है जो हमें प्यार, करुणा और भाईचारे का संदेश देता है। चाहे हम किसी भी धर्म या संस्कृति से हों, क्रिसमस का उत्सव हमें एकजुट करता है और हमें खुशियों से भर देता है। इस उत्सव को मनाकर, हम एक-दूसरे के प्रति अपने प्रेम और सद्भावना को व्यक्त करते हैं और जीवन में खुशियाँ लाते हैं।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “सांता और क्रिसमस की कहानी” संत निकोलस के जीवन की कई चर्चित कहानियाँ हैं, जिनमें उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद करके उन्हें रातों-रात मालामाल कर दिया। एक ऐसी ही मशहूर कहानी एक गरीब व्यक्ति की है, जिसकी तीन बेटियाँ थीं। वह व्यक्ति इतना गरीब था कि अपनी बेटियों को दो वक्त का भोजन भी नहीं दे पा रहा था। वह उनकी शादियों के लिए चिंतित था, क्योंकि उसके पास खाने के लिए पैसे भी नहीं थे। मजबूर होकर, उसने अपनी बेटियों को नौकरी करने पर मजबूर किया, लेकिन बहुत मशक्कत के बाद भी उन्हें कोई नौकरी नहीं मिल रही थी। तब उसने अपनी बेटियों को व्यापार की ओर जाने का रास्ता दिखाया। जैसे ही यह बात संत निकोलस को पता चली, तो उन्होंने आधी रात में जाकर उन लड़कियों के घर में उनकी जुराब के अंदर चुपचाप सोने के सिक्कों से भरी थैलियाँ रख दीं। इसके बाद उनकी दरिद्रता खत्म हो गई और उन्होंने खुशी-खुशी अपनी बेटियों की शादी की और उन्हें सुखी जीवन प्रदान किया। कहते हैं कि उस दिन की घटना के बाद से ही क्रिसमस की रात बच्चे इस उम्मीद से मोजे बाहर लटका आते हैं कि सुबह उनमें उन्हें उनके मनपसंद गिफ्ट मिलेंगे। फ्रांस में चिमनी पर लाल रंग के जूते लटकाए जाते हैं, जिसमें सांता आकर गिफ्ट डालते हैं। यह प्रथा वर्षों से चली आ रही है। सेंटा स्लेड्स पर चलते हैं, इसलिए फ्रांस के बच्चे स्लेड्स के लिए जूतों में गाजर भरकर रखते हैं। सांता क्लॉज के बच्चे इतने ज्यादा दीवाने हैं कि वे उन्हें क्रिसमस के दिन खत लिखकर भेजते हैं और बहुत सारे पते ऐसे हैं, जहां पर सांता के नाम से खत भेजे जाते हैं। इनमें से सबसे मुख्य पता फिनलैंड का माना जाता है। कहा जाता है कि इनमें से बहुत सारे लोगों की इच्छाएँ पूरी होती हैं या फिर सांता द्वारा पूरी की जाती हैं। इस तरह, क्रिसमस और सांता क्लॉज की यह कहानी हमें सिखाती है कि उदारता, परोपकार और दूसरों की मदद करने का महत्व कितना बड़ा होता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







