सुप्रभात बालमित्रों!
18 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 18 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"आपके मन की लालसा आपके साहस जुटा पाने की प्रतीक्षा कर रही है।
Your passion is waiting for your courage to catch up."
यहाँ मन की लालसा शब्द हमारे अंदर की गहरी इच्छाओं और उन सपनों का प्रतिनिधित्व करता है जो हमें प्रेरित करते हैं। मन की लालसा वह ऊर्जा और उत्साह है जो हमें किसी विशेष कार्य या लक्ष्य के प्रति खींचता है। यह हमारे जीवन के वे सपने हैं जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यह कथन का बताता है कि हमारी इच्छाएं और सपने तब तक साकार नहीं हो सकते जब तक हम उनमें अपने साहस और दृढ़ता को शामिल नहीं करते। किसी भी बड़ी चीज को हासिल करने के लिए न केवल जुनून, बल्कि साहस भी जरूरी है। यह उद्धरण न केवल हमें हमारे सपनों का पीछा करने के लिए प्रेरित करता है, बल्कि हमें यह भी सिखाता है कि असल ताकत हमारे अंदर ही है, और हमें बस उसे पहचानने और उसे प्रकट करने की जरूरत है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: SEQUENCE : सीक्वेंस: क्रम, अनुक्रम, या प्रक्रम — किसी चीज़ की क्रमबद्ध या सिलसिलेवार व्यवस्था।
वाक्य प्रयोग: Please arrange the pictures in the correct sequence. कृपया चित्रों को सही क्रम में लगाइए।
उत्तर – लोटा
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 18 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1727: महाराजा जय सिंह द्वितीय ने जयपुर शहर की स्थापना की, जिसे बाद में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा प्रदान किया, और इस शहर के वास्तुकार बंगाल के प्रसिद्ध विद्वान विद्याधर चक्रवर्ती थे।
- 1910: भारत के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक बटुकेश्वर दत्त का जन्म हुआ, जिन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष किया।
- 1918: उत्तरपूर्वी यूरोपीय देश लातविया ने रूस से स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 1928: वॉल्ट डिज़्नी कंपनी के प्रसिद्ध मस्कॉट मिकी माउस का पहला डेब्यू एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म 'स्टीमबोट विली' में हुआ, जो विश्व मनोरंजन जगत में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
- 1962: परमवीर चक्र से सम्मानित बहादुर भारतीय सैनिक शैतान सिंह का निधन हुआ, जिनकी वीरता 1962 के भारत-चीन युद्ध में अमर हो गई।
- 1963: दुनिया का पहला पुश-बटन टेलीफोन आम उपयोग के लिए उपलब्ध हुआ, जिसने संचार प्रौद्योगिकी में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
- 1972: 18 नवम्बर को भारत सरकार ने बाघ को राष्ट्रीय पशु घोषित किया, जो इससे पहले शेर था; बाघ का वैज्ञानिक नाम 'पैंथरा टाइग्रिस लिन्नायस' है, यह पीले रंग और धारीदार लोमचर्म वाला शक्तिशाली पशु है, जिसकी शालीनता, दृढ़ता, फुर्ती और अपार शक्ति के कारण यह सम्मान प्राप्त हुआ, तथा इसकी आठ प्रजातियों में से भारत में पाई जाने वाली रॉयल बंगाल टाइगर के नाम से जानी जाती है।
- 1987: भारतीय नौसेना में विमानवाहक पोत आईएनएस विराट ने अपनी सेवाएं शुरू कीं, जो नौसेना की शक्ति का प्रतीक बना।
- 1993: दक्षिण अफ्रीका ने 300 से अधिक वर्षों के श्वेत बहुसंख्यक शासन के बाद एक नया संविधान अपनाया, जिसने लोकतंत्र और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया।
- 2008: भारत सरकार ने वैश्विक आर्थिक मंदी से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में 50,000 करोड़ रुपये निवेश करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया।
- 2017: भारत की मानुषी छिल्लर ने मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया।
- 2018: आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने 18 नवम्बर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस घोषित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य औषधि रहित चिकित्सा पद्धति के माध्यम से लोगों में सकारात्मक मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे महान स्वतंत्रता सेनानी “बटुकेश्वर दत्त” के बारे में।
बटुकेश्वर दत्त भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिन्होंने अपने अदम्य साहस और देशभक्ति से स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। उनका जन्म 18 नवंबर 1910 को बंगाल प्रांत के ओड़ जिले में हुआ था। बचपन से ही वे अंग्रेज़ों की गुलामी के खिलाफ विद्रोही विचार रखते थे और देश को आज़ाद कराने का सपना देखते थे।
बटुकेश्वर दत्त, भगत सिंह के निकट सहयोगी थे। दोनों ने मिलकर 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा यानी सेंट्रल असेम्बली में बम फेंका था। यह बम किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि अंग्रेज़ सरकार को यह चेतावनी देने के लिए था कि भारतवासी अब अन्याय सहन नहीं करेंगे। बम फेंकने के बाद दोनों ने “इंकलाब जिंदाबाद” और “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” के नारे लगाए और स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी।
बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई, और उन्होंने जेल में भी अत्यंत कष्ट सहते हुए अपने विचारों पर अडिग रहे। स्वतंत्रता के बाद भी उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा, पर वे अपने आदर्शों से कभी नहीं डिगे। भारत की आज़ादी के इतिहास में बटुकेश्वर दत्त का नाम साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक बनकर सदा अमर रहेगा।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 18 नवम्बर को मनाये जाने वाले “प्राकृतिक चिकित्सा दिवस” के बारे में:
प्राकृतिक चिकित्सा दिवस हर साल 18 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य लोगों में प्राकृतिक चिकित्सा यानी Naturopathy के प्रति जागरूकता बढ़ाना और दवा रहित तरीकों से स्वास्थ्य सुधार को प्रोत्साहित करना है। प्राकृतिक चिकित्सा शरीर की स्वाभाविक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर मानसिक और शारीरिक संतुलन स्थापित करने पर आधारित है।
इस दिन का ऐतिहासिक महत्व भी है — महात्मा गांधी ने 18 नवंबर 1945 को ऑल इंडिया नेचर क्योर फ़ाउंडेशन ट्रस्ट के आजीवन सदस्य बनने के विलेख पर हस्ताक्षर किए थे। उनके प्रयासों से ही यह चिकित्सा पद्धति भारत में लोकप्रिय हुई। इसलिए आयुष मंत्रालय ने वर्ष 2018 में 18 नवंबर को “प्राकृतिक चिकित्सा दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की।
प्राकृतिक चिकित्सा में जल चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, मृदा चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर और होमियोपैथी जैसी कई उपचार विधियाँ शामिल हैं। यह प्रणाली इस विचार पर आधारित है कि शरीर स्वयं रोगों से लड़ने की शक्ति रखता है, और प्रकृति में उपलब्ध तत्व — जैसे पानी, हवा, मिट्टी, सूर्य और आहार — उसके उपचार में सहायक हैं। यह केवल एक उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है, जो शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने का मार्ग दिखाती है। प्राकृतिक भोजन, जैसे ताजे फल, अंकुरित अनाज और हल्की पकी सब्जियाँ, इस पद्धति का मुख्य आधार हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर देशभर में स्वास्थ्य शिविर, जन-जागरूकता अभियान और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि लोग इस सस्ती, सरल और प्रभावी चिकित्सा प्रणाली को अपनाएँ और स्वस्थ जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएँ।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “वरदान का इस्तेमाल”
एक बार एक व्यक्ति ने घोर तपस्या करके भगवान को प्रसन्न कर लिया। भगवान ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वर दिया कि जीवन में एक बार सच्चे मन से जो चाहोगे वही हो जाएगा। अब उसके पास जीवन का सबसे बड़ा वरदान था — लेकिन उसका प्रयोग करने की बुद्धि नहीं।
समय बीतता गया। जीवन में अनेक कठिन पल आए — कभी भूखों रहने की नौबत, कभी अपनों की बीमारी, कभी दरिद्रता और अपमान। लोग उसे समझाते, “भाई, भगवान ने वरदान दिया है, उसका उपयोग कर लो!” पर वह मुस्कुरा कर कहता, “नहीं, मैं अपने वरदान को उस क्षण के लिए सँभाल कर रखूँगा जब मौत आएगी — तब मैं अमर हो जाऊँगा।”
वह दिन आया भी। एक रात वह गंभीर रूप से बीमार पड़ा। साँसें टूटने लगीं, शरीर ठंडा पड़ने लगा। उसने मन ही मन सोचा कि अब समय आ गया है वरदान का उपयोग करने का। लेकिन मौत तो अचानक आती है — सोचने की मोहलत कहाँ देती है! एक क्षण में प्राण पखेरू उड़ गए, और उसके साथ ही वह वरदान भी सदा के लिए व्यर्थ हो गया। और इस तरह वह व्यक्ति वरदान पाकर भी जीवन हार गया, क्योंकि उसने वर्तमान का मूल्य नहीं समझा।
मौत से पहले जी लेने का अर्थ है अपनी सामर्थ्य अथवा इन नेमतों का सदुपयोग कर लेना। यह बेहद जरूरी है और अभी करना जरूरी है। बाद में तो कोई अवसर मिलने से रहा। ये दौलत, ये बाहुबल, ये सत्ता की ताकत कुछ भी साथ नहीं जाने वाला। जिनके लिए ये सब कर रहे हो, उनके भी काम नहीं आने वाला है। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें अपने पास मौजूद अवसरों का सही समय पर सदुपयोग करना चाहिए, क्योंकि समय निकल जाने के बाद पछताने से कोई फायदा नहीं होता।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!






