सुप्रभात बालमित्रों!
17 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 17 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"आप जितनी ज्यादा मेहनत करते हैं, उतने ही किस्मती बनते जाते हैं।
The harder you work, the luckier you get."
— हमें यह सिखाता है कि सफलता और भाग्य दोनों ही मेहनत के परिणाम हैं। वास्तव में, भाग्य उन्हीं का साथ देता है जो लगातार प्रयास करते हैं। मेहनत से न केवल हमारे कौशल और अनुभव में वृद्धि होती है, बल्कि इससे हमारे सामने आने वाले अवसरों को पहचानने और उनका लाभ उठाने की क्षमता भी विकसित होती है। जब हम पूरे समर्पण और ईमानदारी से काम करते हैं, तो परिस्थितियाँ हमारे पक्ष में बनने लगती हैं। इसलिए, यह कथन हमें प्रेरित करता है कि हम भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय अपने कर्म और परिश्रम पर विश्वास रखें। क्योंकि कड़ी मेहनत ही वह चाबी है जो सफलता और सौभाग्य के दरवाज़े खोलती है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ACTIVE: एक्टिव: का अर्थ है — सक्रिय, यानी किसी कार्य, गतिविधि या प्रक्रिया में लगातार भाग लेना, प्रयासरत रहना या ऊर्जा से भरा होना।
वाक्य प्रयोग: She is very active in social work. वह सामाजिक कार्यों में बहुत सक्रिय है।
उत्तर : पत्थर।
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 17 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1869 – स्वेज़ नहर को आज ही के दिन यातायात के लिए खोला गया। यह नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है, जिससे यूरोप और एशिया के बीच समुद्री मार्ग बहुत छोटा हो गया। यह नहर विश्व व्यापार और नौपरिवहन के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुई।
- 1928 – महान स्वतंत्रता सेनानी और “पंजाब केसरी” के नाम से प्रसिद्ध लाला लाजपत राय का निधन हुआ। वे साइमन कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान अंग्रेज़ों की लाठीचार्ज में घायल हो गए थे। उनकी शहादत ने देश के युवाओं में आजादी की लौ और तेज़ कर दी।
- 1966 – रीता फारिया ने इस दिन मिस वर्ल्ड का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। वे न केवल भारत की, बल्कि पहली एशियाई महिला थीं जिन्हें यह सम्मान मिला।
- 1970 – अमेरिकी इंजीनियर डगलस एंगेलबार्ट को इस दिन कंप्यूटर माउस के आविष्कार का पेटेंट मिला। इस आविष्कार ने कंप्यूटर तकनीक के उपयोग में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
- 1989 – चेकोस्लोवाकिया में आज ही के दिन वेलवेट क्रांति यानी Velvet Revolution की शुरुआत हुई, जिसने बिना हिंसा के कम्युनिस्ट शासन का अंत किया।
- 1999 – यूनेस्को ने 17 नवंबर 1999 को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की मंजूरी दी, जिसे हर साल 21 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विश्व की भाषाई विविधता और मातृभाषा के महत्व को बढ़ावा देना है।
- 2012 – शिवसेना के संस्थापक और महाराष्ट्र की राजनीति के प्रभावशाली नेता बाल ठाकरे का इस दिन निधन हुआ। वे अपने स्पष्ट विचारों और मराठी अस्मिता की राजनीति के लिए प्रसिद्ध थे।
- हर वर्ष 17 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय छात्र दिवस यानी International Students’ Day मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1939 में प्राग विश्वविद्यालय के छात्रों की नाज़ियों द्वारा हत्या और गिरफ्तारी की स्मृति में हुई थी। यह दिन छात्र एकता, साहस और शिक्षा के अधिकार का प्रतीक है।
- 2015 – भारत में 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस के रूप में मनाने की शुरुवात हुई, जिसका उद्देश्य लोगों में मिर्गी रोग के प्रति जागरूकता फैलाना और इसके इलाज के लिए सही जानकारी प्रदान करना है।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे अमेरिकी इंजीनियर, आविष्कारक और कंप्यूटर वैज्ञानिक “डगलस एंगेलबार्ट” के बारे में।
डगलस एंगेलबार्ट एक प्रसिद्ध अमेरिकी इंजीनियर, आविष्कारक और कंप्यूटर वैज्ञानिक थे, जिन्होंने आधुनिक कंप्यूटर तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी योगदान दिया। उनका जन्म 30 जनवरी 1925 को अमेरिका के ओरेगन राज्य में हुआ था। वे प्रारंभ से ही विज्ञान और तकनीक के प्रति अत्यंत जिज्ञासु और नवोन्मेषी सोच रखने वाले व्यक्ति थे।
एंगेलबार्ट को सबसे अधिक प्रसिद्धि कंप्यूटर माउस के आविष्कार के लिए मिली। उन्होंने 1960 के दशक में कंप्यूटर उपयोग को सरल और अधिक इंटरैक्टिव बनाने के उद्देश्य से इस उपकरण का निर्माण किया। इसके लिए उन्हें 17 नवम्बर 1970 को माउस के आविष्कार का पेटेंट प्राप्त हुआ। माउस के अलावा, एंगेलबार्ट ने हाइपरटेक्स्ट, विंडो आधारित यूज़र इंटरफेस, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, और ऑनलाइन सहयोग प्रणाली जैसी अनेक तकनीकों की अवधारणा भी दी। उन्होंने 1968 में “The Mother of All Demos” नामक प्रसिद्ध प्रस्तुति में इन सब तकनीकी नवाचारों का प्रदर्शन किया, जिसने आधुनिक कंप्यूटिंग की नींव रखी।
उनके योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए, जिनमें लेमलसन-एमआईटी प्राइज, नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी, और ACM Turing Award प्रमुख हैं। डगलस एंगेलबार्ट का निधन 2 जुलाई 2013 को हुआ, लेकिन उनके द्वारा दिए गए नवाचार आज भी हर कंप्यूटर और डिजिटल डिवाइस में जीवित हैं। वे एक ऐसे दूरदर्शी वैज्ञानिक थे जिन्होंने तकनीक को मानव जीवन के लिए अधिक उपयोगी और सुलभ बनाने में अद्वितीय भूमिका निभाई।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 17 नवम्बर को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय मिर्गी दिवस” के बारे में:
भारत में हर वर्ष 17 नवम्बर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस यानी National Epilepsy Day मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत Epilepsy Foundation of India द्वारा वर्ष 1990 में प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल सूर्य भगवती के प्रयासों से की गई थी। बाद में, वर्ष 2015 में भारत सरकार ने औपचारिक रूप से इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की घोषणा की, ताकि मिर्गी के प्रति जागरूकता पूरे देश में फैलाई जा सके।
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में मिर्गी नामक तंत्रिका रोग के प्रति जानकारी, समझ और संवेदनशीलता बढ़ाना है। मिर्गी एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति के मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि असामान्य हो जाती है, जिससे अचानक दौरे यानी seizures पड़ते हैं। भारत में लगभग एक करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं।
Epilepsy Foundation of India और विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा इस दिन जागरूकता रैलियाँ, स्वास्थ्य शिविर, संगोष्ठियाँ और प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य मिर्गी से जुड़ी गलतफहमियों, सामाजिक भेदभाव और अंधविश्वासों को दूर करना है, ताकि मिर्गी पीड़ित लोग सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।
यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि मिर्गी कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसका सही उपचार संभव है। हमें मिर्गी से पीड़ित लोगों के प्रति सहानुभूति, सहयोग और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “साथी की उम्मीद”
एक जापानी अपने मकान की मरम्मत के लिए उसकी दीवार को खोल रहा था। ज्यादातर जापानी घरों में लकड़ी की दीवारों के बीच जगह होती है। जब वह लकड़ी की इस दीवार को उधेड़ रहा था, तो उसने देखा कि वहां दीवार में एक छिपकली फंसी हुई थी। छिपकली के एक पैर में कील ठुकी हुई थी। यह देख उसे छिपकली पर रहम आया। उसने इस मामले में उत्सुकता दिखाई और गौर से उस छिपकली के पैर में ठुकी कील को देखा। अरे, यह तो वही कील है जो दस साल पहले मकान बनाते वक्त ठोकी गई थी! क्या यह छिपकली पिछले दस सालों से इसी हालत में थी? यह सोचकर उसे हैरत हुई। छिपकली पिछले दस सालों से आखिर जिंदा कैसे थी, जबकि इसके पैर में कील ठुकी थी और यह बिना हिले-डुले रही थी! उसने अपना काम रोक दिया और उस छिपकली को गौर से देखने लगा। आखिर यह अब तक कैसे रह पाई और क्या खुराक इसे अब तक मिलती रही।
इसी बीच एक दूसरी छिपकली ना जाने कहां से वहां आई, जिसके मुंह में खुराक थी। यह देखकर वह अंदर तक हिल गया। दूसरी छिपकली पिछले दस सालों से इस फंसी हुई छिपकली को खिला रही थी। जरा गौर कीजिए, वह दूसरी छिपकली बिना थके और अपने साथी की उम्मीद छोड़े बिना लगातार दस साल से उसे खिला रही थी। यह कहानी हमें सिखाती है कि संघर्ष में साथ देना और उम्मीद बनाए रखना कितनी महत्वपूर्ण है। कठिन परिस्थितियों में हमें अपने प्रियजनों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। यह मानवता और प्रेम का सबसे सच्चा रूप है। हमें हमेशा अपने साथी की मदद के लिए तत्पर रहना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







