सुप्रभात बालमित्रों!
16 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 16 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"अच्छी हंसी और लंबी नींद किसी भी मर्ज के लिए दो उत्तम इलाज हैं।"
"A good laugh and a long sleep are the two best cures for anything."
हंसी तनाव को कम करने का सबसे प्राकृतिक और सहज तरीका है। जब हम हंसते हैं, तो हमारा शरीर एंडोर्फिन नामक रसायन का उत्पादन करता है, जो हमें खुशी और ताजगी का अनुभव कराता है। वहीं अच्छी और पर्याप्त नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देती है। नींद हमारी शारीरिक थकान को दूर करती है और मानसिक तनाव को कम करती है। नींद के दौरान हमारा शरीर और मस्तिष्क पुनर्निर्माण और मरम्मत करते हैं, जिससे हम अगली सुबह ताजगी और ऊर्जा से भरपूर महसूस करते हैं। अच्छी नींद से हमारी एकाग्रता, याददाश्त और उत्पादकता में सुधार होता है। हंसी और नींद, दोनों ही हमारी दिनचर्या में आसानी से शामिल किए जा सकते हैं और इन्हें अपनाकर हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। इसलिए, हंसी और नींद को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं और स्वस्थ और खुशहाल जीवन का आनंद लें।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ACTION : ऐक्शन: कार्य, कार्यवाही, क्रिया, कदम उठाना, कार्रवाई करना: एक्शन शब्द किसी गतिविधि, प्रक्रिया, या किसी के द्वारा किए गए काम को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
वाक्य प्रयोग: Actions speak louder than words. कार्य शब्दों से अधिक प्रभावशाली होते हैं।
उत्तर : इंद्रधनुष।
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 16 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- सन् 1801 में अमेरिका के New York Evening Post का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ। यह बाद में “न्यूयॉर्क पोस्ट” के नाम से प्रसिद्ध हुआ और आज भी विश्व के प्रमुख समाचार पत्रों में गिना जाता है।
- सन् 1857 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना ऊदा देवी पासी शहीद हुईं। वे लखनऊ की शासक बेगम हज़रत महल की सेना में महिला ब्रिगेड की सेनापति थीं।
- सन् 1915 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी और गदर पार्टी के सदस्य करतार सिंह सराभा को अंग्रेजों ने फाँसी दी। मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्होंने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। वे युवाओं के लिए देशभक्ति और साहस का प्रतीक बने।
- सन् 1930 में भारत के प्रसिद्ध तैराक मिहिर सेन का जन्म ओडिशा के पुरी में हुआ। उन्होंने समुद्र में लंबी दूरी की तैराकी में भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया।
- सन् 1945 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को की स्थापना की गई। यूनेस्को का उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग को बढ़ावा देना है।
- सन् 1965 में सोवियत संघ ने वेनेरा-3 अंतरिक्ष यान को प्रक्षेपित किया। यह किसी अन्य ग्रह - शुक्र ग्रह की सतह पर पहुँचने वाला पहला मानव निर्मित यान बना।
- सन् 1966 में भारत में भारतीय प्रेस परिषद Press Council of India की स्थापना की गई। इसका मुख्य उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करना और पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखना है।
- सन् 1988 में पाकिस्तान में 11 वर्ष बाद आम चुनाव हुए, जिनमें बेनजीर भुट्टो ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और वे पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
- सन् 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 16 नवंबर को “अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस International Day for Tolerance” के रूप में घोषित किया, ताकि दुनिया में सहिष्णुता, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा दिया जा सके। इसी वर्ष मदर टेरेसा को संयुक्त राज्य अमेरिका की मानद नागरिकता प्रदान की गई, जो उनके मानवीय कार्यों की वैश्विक स्वीकृति थी।
- सन् 2013 में भारत के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के विरुद्ध अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला और क्रिकेट से भावनात्मक विदाई ली।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “वीरांगना ऊदा देवी पासी” के बारे में।
भारत की स्वतंत्रता की गौरवशाली गाथा में अनेक वीरांगनाओं ने अपने अदम्य साहस और बलिदान से इतिहास के पन्नों को स्वर्णिम बना दिया। ऐसी ही एक महान नायिका थीं वीरांगना ऊदा देवी पासी, जिनका नाम 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अमर हो गया। ऊदा देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में हुआ था। वे पासी समाज से थीं और लखनऊ की शासक बेगम हजरत महल की सेना में महिला ब्रिगेड की सेनापति थीं। जब 1857 में अंग्रेज़ों के खिलाफ आज़ादी की पहली लड़ाई शुरू हुई, तब ऊदा देवी ने अपने पति माखन पासी और साथियों के साथ मिलकर स्वतंत्रता के इस संग्राम में भाग लिया।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने वीरता के साथ अंग्रेज़ों से मोर्चा लिया और अकेले ही 36 अंग्रेज़ सैनिकों को मार गिराया। कहा जाता है कि उन्होंने लखनऊ के सिकंदरबाग की लड़ाई में एक पीपल के पेड़ पर चढ़कर दुश्मनों पर गोलियाँ चलाईं और अंततः अंग्रेजों की गोली से शहीद हो गईं। अपने साहस, अदम्य जिजीविषा और देशभक्ति के कारण उन्होंने इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया। वीरांगना ऊदा देवी पासी ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय नारी केवल घर की मर्यादा तक सीमित नहीं, बल्कि जब मातृभूमि पर संकट आता है, तो वह रणभूमि में भी डटकर लड़ सकती है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 16 नवम्बर को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस” के बारे में: के बारे में:
अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस हर वर्ष 16 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1996 में की थी। इस दिन को मनाने का उद्देश्य विश्वभर में सहिष्णुता, आपसी सम्मान, और विविधता के प्रति स्वीकार्यता को बढ़ावा देना है। सहिष्णुता का अर्थ केवल दूसरों के विचारों और विश्वासों को स्वीकार करना ही नहीं, बल्कि उनके अधिकारों का सम्मान करना भी है। आज के युग में जब दुनिया विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों से भरी हुई है, तब सहिष्णुता का महत्व और भी बढ़ जाता है। सहिष्णुता समाज में शांति, एकता और भाईचारा बनाए रखने की मूल आधारशिला है। असहिष्णुता के कारण ही हिंसा, भेदभाव और संघर्ष उत्पन्न होते हैं, जो मानवता के लिए हानिकारक हैं। इस दिन विद्यालयों, कॉलेजों और विभिन्न संगठनों में सहिष्णुता, सद्भाव और मानवाधिकारों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह दिन हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक विकास और शांति तभी संभव है जब हम सभी लोग धैर्य, समझदारी और सम्मान के साथ एक-दूसरे के विचारों को सुनें और स्वीकार करें। सहिष्णुता न केवल एक नैतिक मूल्य है, बल्कि यह एक वैश्विक आवश्यकता है, जो मानवता को एक सूत्र में बाँधती है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “मैले कपड़े”
एक दिन की बात है। एक मास्टरजी अपने शिष्य के साथ प्रातःकाल सैर पर निकले हुए थे। तभी अचानक एक व्यक्ति उनके पास आया और बिना किसी कारण उन्हें भला-बुरा कहने लगा। उसने मास्टरजी को अपशब्द कहे, अपमान किया, यहाँ तक कि उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। परंतु आश्चर्य की बात यह थी कि मास्टरजी शांत भाव से मुस्कुराते रहे और अपने कदम आगे बढ़ाते रहे। जब उस व्यक्ति ने देखा कि उसकी कठोर बातों का मास्टरजी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है, तो वह क्रोधित होकर चुपचाप रास्ते से हट गया। शिष्य यह सब देखकर बहुत हैरान था। उसने जिज्ञासापूर्वक पूछा — “मास्टरजी! आपने उस व्यक्ति को कुछ जवाब क्यों नहीं दिया? क्या उसकी बातों से आपको अपमान का अनुभव नहीं हुआ?”
मास्टरजी मुस्कुराए और बोले, “चलो, मैं तुम्हें इसका उत्तर अपने तरीके से देता हूँ।” वे दोनों अपने कक्ष में पहुँचे। मास्टरजी भीतर गए और थोड़ी देर बाद एक मैला, बदबूदार कपड़ा लेकर लौटे। उन्होंने वह कपड़ा शिष्य की ओर बढ़ाते हुए कहा, “लो, अपने कपड़े उतारकर यह पहन लो।” शिष्य ने कपड़े को हाथ में लिया, लेकिन दुर्गंध और गंदगी से घृणा करते हुए उसे तुरंत फेंक दिया।
मास्टरजी ने शांत स्वर में कहा — “देखो बेटा, जिस प्रकार तुम इन मैले कपड़ों को पहनना स्वीकार नहीं कर सकते, उसी प्रकार मैंने भी उस व्यक्ति के अपशब्दों को स्वीकार नहीं किया। यदि कोई व्यक्ति तुम्हें बुरा कहे और तुम क्रोध में आकर प्रतिक्रिया दो, तो समझो तुम उसके फेंके हुए मैले कपड़े पहन रहे हो। लेकिन यदि तुम शांत रहो, तो वे कपड़े उसी के पास रह जाते हैं।” यह कहानी हमें सिखाती है कि अपमान, आलोचना और नकारात्मक शब्द तभी हमें प्रभावित करते हैं जब हम उन्हें स्वीकार करते हैं। संयम, धैर्य और शांति से हम न केवल अपने मन को निर्मल रख सकते हैं, बल्कि दूसरों के व्यवहार से ऊपर उठकर सच्चे अर्थों में सशक्त बन सकते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!








