15 November AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢







IMAGES INSIDE THIS BOX ]



आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

15 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 15 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से : "कड़ी मेहनत के बिना तो केवल खर पतवार ही पैदा होती है।
Without hard work, nothing grows but weeds."

यह कथन हमें जीवन में परिश्रम के महत्व का बोध कराता है। इसका अर्थ है कि यदि हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मेहनत नहीं करेंगे, तो जीवन में असफलता और निराशा के सिवा कुछ नहीं मिलेगा। जैसे खेती में यदि किसान भूमि की ठीक से जुताई, बुवाई और देखभाल न करे तो खेत में केवल खरपतवार ही उगते हैं, फसल नहीं। उसी प्रकार यदि हम प्रयास और लगन से अपने कार्यों को नहीं करेंगे, तो सफलता की फसल भी नहीं उगेगी। जीवन में उत्कृष्टता और प्रगति पाने के लिए परिश्रम ही सबसे बड़ा साधन है। बिना मेहनत के कोई भी व्यक्ति या राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता। इसलिए हमें सदैव कर्मठ और परिश्रमी बनने का संकल्प लेना चाहिए।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ACCORDING : अकॉर्डिंग : अनुसार, के अनुसार, के मुताबिक। यह शब्द आमतौर पर किसी व्यक्ति, संस्था, रिपोर्ट, या स्रोत के आधार पर कही गई जानकारी को प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। यानी जब हम यह बताना चाहते हैं कि कोई बात किसके अनुसार कही जा रही है, तब “according to” का प्रयोग किया जाता है।

वाक्य प्रयोग: According to scientists, global warming is a serious issue. वैज्ञानिकों के अनुसार, वैश्विक तापमान एक गंभीर समस्या।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  खड़ी करो तो गिर पड़े, दौड़ी मीलों जाए। नाम बता दो इसका, यह तुम्हें हमें बिठाए।
उत्तर : साइकिल
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 15 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1630 : प्रसिद्ध जर्मन खगोलशास्त्री जोहान्स केपलर का निधन हुआ। उन्होंने ग्रहों की गति के नियमों की खोज की थी, जो आधुनिक खगोलशास्त्र की नींव बने।
  • 1830  :  भारत के महान समाज सुधारक राजा राम मोहन राय सती प्रथा के उन्मूलन के उद्देश्य से इंग्लैंड रवाना हुए। उन्होंने भारतीय समाज में महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक योगदान दिया।
  • 1866  :  भारत की पहली महिला बैरिस्टर कॉर्नेलिया सोराबजी का जन्म हुआ। वे भारतीय महिलाओं की शिक्षा और विधिक अधिकारों की समर्थक रहीं।
  • 1875  :  झारखंड के छोटा नागपुर क्षेत्र में महान जननायक बिरसा मुंडा का जन्म हुआ। उन्होंने आदिवासी समाज को शोषण से मुक्ति दिलाने और सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया। बिरसा मुंडा ने ‘बेगारी प्रथा’ के विरुद्ध आंदोलन चलाया और ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। उन्हें प्रेमपूर्वक “धरती बाबा” कहा गया। 1895 में उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया और 1900 में जेल में हैजे से उनकी मृत्यु हो गई।
  • 1920  :  जिनेवा स्विट्जरलैंड में लीग ऑफ नेशंस League of Nations की पहली बैठक आयोजित की गई, जो विश्व शांति स्थापना के प्रयासों की दिशा में एक बड़ा कदम थी।
  • 1949  :  महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फाँसी दी गई।
  • 1971  :  इंटेल कंपनी ने दुनिया का पहला वाणिज्यिक माइक्रोप्रोसेसर 4004 जारी किया, जिसने आधुनिक कंप्यूटर क्रांति की नींव रखी।
  • 1982  :  भूदान आंदोलन के जनक और गांधीवादी विचारक आचार्य विनोबा भावे का निधन हुआ। उन्होंने भूमि सुधार और समाज सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
  • 1988  :  फिलिस्तीन मुक्ति संगठन PLO ने यासिर अराफात के नेतृत्व में फिलिस्तीन राज्य की स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • 2000  :  झारखंड भारत का 28वां राज्य बना। यह दिन अब “झारखंड स्थापना दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
  • 2001  :  माइक्रोसॉफ्ट ने अपना पहला गेम कंसोल एक्सबॉक्स Xbox लॉन्च किया, जिससे वीडियो गेम उद्योग में नई दिशा मिली।
  • 2017  :  लियोनार्डो दा विंची की प्रसिद्ध पेंटिंग “साल्वेटर मुंडी” की नीलामी 450.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर में हुई, जो कला जगत का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना।
  • 2021  :  भारत सरकार ने बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि देश में आदिवासी समाज के योगदान को सम्मान दिया जा सके।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “xxx” के बारे में।

भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों में जननायक बिरसा मुंडा का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातु गाँव चोटानागपुर में एक साधारण आदिवासी परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और न्यायप्रियता की भावना थी। उस समय अंग्रेज़ सरकार और जमींदारों द्वारा आदिवासी समाज पर अत्याचार और शोषण किया जा रहा था। बिरसा मुंडा ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई और लोगों को अपने अधिकारों के लिए संगठित किया।

उन्होंने आदिवासी समाज को अपनी परंपरा, संस्कृति और भूमि की रक्षा के लिए जागरूक किया। बिरसा ने “उलगुलान” यानी महान विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध आदिवासियों की एक बड़ी लड़ाई थी। उन्होंने “बेगारी प्रथा” यानी जबरन मजदूरी के विरोध में आंदोलन चलाया और लोगों में आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की भावना जगाई। उनके अनुयायी उन्हें “धरती बाबा” कहकर सम्मानित करते थे।

1895 में अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार किया और दो वर्ष की सजा दी। इसके बावजूद उनके विचार और संघर्ष की ज्वाला बुझी नहीं। 1900 में जेल में ही उनकी मृत्यु हो गई, पर उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। आज भी झारखंड और पूरे भारत में बिरसा मुंडा को एक महान जननायक, स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी गौरव के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। भारत सरकार ने उनके जन्मदिन 15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” के रूप में मनाने की घोषणा की है, जो बिरसा मुंडा के त्याग, साहस और देशभक्ति की अमर गाथा को सदैव जीवित रखेगा।

👁️ आज का दैनिक विशेष – जनजातीय गौरव दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे  को मनाये  15 नवम्बर को मनाये जाने वाले “जनजातीय गौरव दिवस” के बारे में:

भारत की आज़ादी के संघर्ष में आदिवासियों का अहम योगदान रहा है। उनकी वीरता, बलिदान और देशभक्ति को याद करने के लिए हर वर्ष 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन भारत के महान जननायक बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन और जमींदारी अत्याचार के विरुद्ध आदिवासियों को एकजुट कर संघर्ष का बिगुल फूँका था।

जनजातीय गौरव दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाना, और युवाओं को देशभक्ति की प्रेरणा देना है। भारत की स्वतंत्रता यात्रा में बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, रानी गौंडिल्यू, सिद्धू और कान्हू मुर्मू जैसे अनेक आदिवासी वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने अपने समाज को जागरूक किया, विदेशी शासन का विरोध किया और आत्मसम्मान की भावना जगाई।

इस दिन देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, आदिवासी नृत्य, संगीत और कला प्रदर्शन, इतिहास और संस्कृति पर संगोष्ठियाँ, तथा आदिवासी कलाकृतियों और हस्तशिल्प की प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाती हैं। साथ ही, आदिवासी समुदाय के उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है।

आदिवासी उत्पादों को खरीदना और उनके आर्थिक व सामाजिक विकास में योगदान देना इस दिवस को और अधिक सार्थक बनाता है। जनजातीय गौरव दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि भारत की स्वतंत्रता में सभी समुदायों का समान योगदान रहा है — और आदिवासियों ने भी अपने पराक्रम, त्याग और बलिदान से देश की आज़ादी में अमूल्य भूमिका निभाई। इस दिन को मनाकर हम उनके संघर्षों को नमन करते हैं और उनकी समृद्ध संस्कृति का सम्मान करते हैं।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “झरने का पानी”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “झरने का पानी”

महात्मा बुद्ध एक बार अपने शिष्य आनंद के साथ कहीं जा रहे थे। वन में काफी चलने के बाद दोपहर में एक वृक्ष तले वे विश्राम करने के लिए रुके और उन्हें प्यास लगी। आनंद पास स्थित पहाड़ी झरने से पानी लेने गया, लेकिन झरने से अभी-अभी कुछ पशु दौड़कर निकले थे, जिससे उसका पानी गंदा हो गया था। पशुओं की भाग-दौड़ से झरने के पानी में कीचड़ और सड़े पत्ते बाहर उभर आए थे। गंदा पानी देख आनंद बिना पानी लिए लौट आया।

उसने बुद्ध से कहा, "झरने का पानी निर्मल नहीं है। मैं पीछे लौटकर नदी से पानी ले आता हूं।" लेकिन नदी बहुत  दूर थी, तो बुद्ध ने उसे झरने का पानी ही लाने को वापस लौटा दिया। आनंद थोड़ी देर में फिर खाली लौट आया। पानी अब भी गंदा था, पर बुद्ध ने उसे इस बार भी वापस लौटा दिया।

कुछ देर बाद जब तीसरी बार आनंद झरने पर पहुंचा, तो देखकर चकित हो गया। झरना अब बिल्कुल निर्मल और शांत हो गया था, कीचड़ बैठ गया था और जल बिल्कुल निर्मल हो गया था। महात्मा बुद्ध ने उसे समझाया कि यही स्थिति हमारे मन की भी है। जीवन की दौड़-भाग मन को भी विक्षुब्ध कर देती है, मथ देती है। पर कोई यदि शांति और धीरज से उसे बैठा देखता रहे, तो कीचड़ अपने आप नीचे बैठ जाता है और सहज निर्मलता का आगमन हो जाता है।

ये कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी समस्याओं का समाधान तुरंत नहीं मिलता, लेकिन लगातार प्रयास और धैर्य से हमें समाधान मिल सकता है। समय के साथ स्थिति सामान्य हो जाती है। जैसे झरने का पानी कीचड़ बैठने के बाद साफ हो गया, वैसे ही हमारा मन भी शांति और धीरज से विक्षुब्धता से मुक्त हो सकता है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.