19 November AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢










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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

19 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 19 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "सात बार गिरें, आठ बार उठ खड़े हों।
Fall down seven times, get up eight times.”

जीवन में सफलता का मार्ग कभी आसान नहीं होता। कभी परिस्थितियाँ साथ नहीं देतीं, तो कभी हमारे अपने प्रयास अधूरे रह जाते हैं। लेकिन असली विजेता वही होता है जो हार मानने के बजाय, हर असफलता को सीख में बदलकर एक बार फिर से प्रयास करता है। यह उद्धरण हमें यह सिखाता है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का अवसर होती है। जो व्यक्ति गिरकर भी उठने का साहस रखता है, वही अंततः मंज़िल तक पहुँचता है। गिरना स्वाभाविक है, लेकिन हार मानना नहीं। हर ठोकर हमें मजबूत बनाती है और हर असफलता हमें सफलता के एक कदम और करीब ले जाती है। इसलिए — “सात बार गिरो, आठवीं बार फिर उठो,” क्योंकि सफलता उन्हीं की होती है जो कभी रुकते नहीं।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: BADGE : बैज : बिल्ला, पदक या चिन्ह — यह किसी व्यक्ति की पहचान, उपलब्धि, या विशेष पद को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।

वाक्य प्रयोग: Wearing this badge is a symbol of responsibility and pride. यह बिल्ला पहनना जिम्मेदारी और गर्व का प्रतीक है।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  दिन में सोए, रात में रोए, जितना रोए, उतना खोए।
उत्तर : मोमबत्ती।
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 19 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1828: 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्म वाराणसी में हुआ था, जिनका मूल नाम मणिकर्णिका था, वे मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी थीं और अंग्रेजी साम्राज्य की सेना से लड़ते हुए रणक्षेत्र में वीरगति को प्राप्त हुईं।
  • 1917: भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्म इलाहाबाद अब प्रयागराज में हुआ था, जो वर्ष 1966 से 1977 तक लगातार तीन कार्यकालों के लिए और फिर 1980 से 1984 तक अपनी राजनैतिक हत्या तक भारत गणराज्य की प्रधानमंत्री रहीं, तथा उनके कठोर निर्णय लेने की क्षमता के कारण उन्हें 'आयरन लेडी' कहा जाता था।
  • 1928: विश्व प्रसिद्ध पहलवान और हिंदी फिल्मों के अभिनेता दारा सिंह का जन्म हुआ, जो भारतीय कुश्ती और सिनेमा जगत में अपनी शक्ति और लोकप्रियता के लिए याद किए जाते हैं।
  • 1975: भारत की प्रथम मिस यूनिवर्स और प्रसिद्ध अभिनेत्री सुष्मिता सेन का जन्म हुआ, जिन्होंने 1994 में यह खिताब जीतकर देश का मान बढ़ाया।
  • 1982: नौवें एशियाई खेल 19 नवंबर को दिल्ली में शुरू हुए, जो देश में लंबे अंतराल के बाद आयोजित विशाल पैमाने की खेल स्पर्धा थी और जिसमें रंगीन टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत हुई।
  • 1986: भारत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ, जो भोपाल गैस त्रासदी के बाद पर्यावरण की सुरक्षा और सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कानून साबित हुआ।
  • 1994: भारत की ऐश्वर्या राय को 'मिस वर्ल्ड' चुना गया, जो दक्षिण अफ्रीका के सन सिटी में आयोजित 44वें मिस वर्ल्ड पेजेंट में उनकी जीत थी।
  • 1997: भारतीय मूल की कल्पना चावला ने अंतरिक्ष के लिए अपनी पहली उड़ान भरी, जो स्पेस शटल कोलंबिया के STS-87 मिशन पर थी और वे अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनीं।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई” के बारे में।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम अमर साहस, देशभक्ति और वीरता के प्रतीक के रूप में सदा याद किया जाता है। उनका जन्म 19 नवम्बर 1828 को वाराणसी में हुआ था। बचपन में उनका नाम मणिकर्णिका या मनु था। वे बचपन से ही निर्भीक, बुद्धिमान और युद्धकला में निपुण थीं।

लक्ष्मीबाई का विवाह झाँसी के राजा गंगाधर राव से हुआ। विवाह के बाद वे झाँसी की रानी बनीं। राजा की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने “लैप्स नीति यानी Doctrine of Lapse” के तहत झाँसी पर कब्जा करने का प्रयास किया। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के आगे झुकने से इनकार कर दिया और कहा — “मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी!” उन्होंने वीरता और बुद्धिमत्ता के साथ अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध लड़ा। घोड़े पर सवार होकर, अपने छोटे पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बाँधकर, रानी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया।

18 जून 1858 को ग्वालियर के युद्ध में वे वीरगति को प्राप्त हुईं, लेकिन उनकी बहादुरी और देशभक्ति ने आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी के लिए प्रेरित किया। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई भारतीय नारी शक्ति, आत्मसम्मान और देशभक्ति की अमर प्रतीक हैं। उनकी गाथा आज भी हर भारतीय के हृदय में देशप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित करती है।

👁️ आज का दैनिक विशेष – अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 19 नवम्बर को मनाये जाने वाले “अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस” के बारे में: के बारे में:

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस हर वर्ष 19 नवंबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह दिवस समाज, परिवार, और राष्ट्र के विकास में पुरुषों के योगदान, त्याग और उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है। इस दिन का उद्देश्य पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना, उनके सकारात्मक गुणों की सराहना करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, और समाज में पुरुषों के प्रति मौजूद पूर्वाग्रहों और भेदभाव को दूर करना है।

इस दिवस को मनाने की शुरुआत साल 1999 में वेस्टइंडीज़ के त्रिनिदाद और टोबागो से हुई थी। इसे वेस्टइंडीज़ विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. जेरोम तिलक सिंह ने शुरू किया था। उन्होंने इस दिन को अपने पिता के जन्मदिन पर मनाने का निर्णय लिया और लोगों से आग्रह किया कि पुरुषों से जुड़े मुद्दों और उनके योगदान पर खुलकर चर्चा की जाए।

तब से हर वर्ष 19 नवंबर को यह दिवस 30 से अधिक देशों में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ UNO ने भी इस दिन की महत्ता को स्वीकार करते हुए इसके उद्देश्यों की सराहना की है। भारत में पहली बार 19 नवंबर 2007 को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया था। यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि जैसे महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की बात होती है, वैसे ही पुरुषों की भावनाओं, समस्याओं और अधिकारों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। एक संतुलित, समानता-आधारित समाज तभी संभव है जब पुरुष और महिला दोनों को समान सम्मान और अवसर मिलें।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “गुरु तोते का संदेश”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “गुरु तोते का संदेश”

एक गांव में एक आदमी अपने तोते के साथ रहता था। एक बार जब वह आदमी किसी काम से दूसरे गांव जा रहा था, तो उसके तोते ने उससे कहा, "मालिक, जहाँ आप जा रहे हैं, वहाँ मेरा गुरु तोता रहता है। उसके लिए मेरा एक संदेश ले जाएंगे?" “क्यों नहीं!” आदमी ने जवाब दिया। तोते ने कहा, "मेरा संदेश है: आजाद हवाओं में सांस लेने वालों के नाम एक बंदी तोते का सलाम।"

वह आदमी दूसरे गांव पहुँचा और वहाँ उस गुरु तोते को अपने प्रिय तोते का संदेश बताया। संदेश सुनकर गुरु-तोता तड़पा, फड़फड़ाया और मर गया। जब आदमी अपना काम समाप्त कर वापस घर आया, तो तोते ने पूछा कि क्या उसका संदेश गुरु-तोते तक पहुँच गया था। आदमी ने तोते को पूरी कहानी बताई कि कैसे उसके संदेश को सुनकर उसका गुरु तोता तत्काल मर गया था। यह बात सुनकर तोता भी तड़पा, फड़फड़ाया और मर गया। आदमी ने बुझे मन से तोते को पिंजरे से बाहर निकाला और उसका दाह-संस्कार करने के लिए ले जाने लगा।

जैसे ही आदमी का ध्यान थोड़ा भंग हुआ, वह तोता तुरंत उड़ गया और जाते-जाते उसने अपने मालिक को बताया, "मेरे गुरु तोते ने मुझे संदेश भेजा था कि अगर आजादी चाहते हो तो पहले मरना सीखो।"

यह कहानी हमें सिखाती है कि यदि हम वास्तव में आज़ादी की हवा में सांस लेना चाहते हैं, तो हमें निर्भय होकर अपने बंधनों से मुक्त होना सीखना होगा। साहस की कमी ही हमें सीमित रखती है और वास्तविक स्वतंत्रता से दूर करती है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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