सुप्रभात बालमित्रों!
18 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 18 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"जब हम निर्माण करें, तो ऐसा सोच कर करें कि यह हमेशा हमेशा के लिए है।" "When we build, let us think we build forever."
यह कथन हमें स्थायित्व, गुणवत्ता और जिम्मेदारी का संदेश देता है। इसका अर्थ है कि हमें ऐसी चीजें बनानी चाहिए जो लंबे समय तक टिकाऊ और उपयोगी हों। इसका अर्थ यह है कि जब भी हम कुछ बनाते हैं, चाहे वह कोई भौतिक वस्तु हो, एक संस्था हो, या एक विचार हो, तो हमें उसे इस तरह से बनाना चाहिए कि वह समय की कसौटी पर खरा उतरे। वह टिकाऊ हो और लंबे समय तक चले। हमें क्षणिक लाभ या अल्पकालिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता के बारे में सोचना चाहिए।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: TACKLE : टैकल – का अर्थ है निपटना या सुलझाना। यह शब्द किसी समस्या, कार्य, या चुनौती का सामना करने और उसे हल करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण : The government is working hard to tackle unemployment.
सरकार बेरोजगारी का सामना करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
जवाब : हरी मिर्च
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 18 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1801: कोलकाता के पास कोसीपोर में भारत का पहला आयुध निर्माण कारखाना स्थापित किया गया। इस दिन को याद करने और भारत के रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता तथा स्वदेशी हथियारों के निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 18 मार्च को राष्ट्रीय आयुध निर्माण दिवस मनाया जाता है।
- 1858: डीजल इंजन के आविष्कारक, रुडोल्फ डीजल का जन्म हुआ। उनके आविष्कार ने दुनिया भर में परिवहन और उद्योग के क्षेत्र में क्रांति ला दी।
- 1914: आज़ाद हिन्द फ़ौज के अधिकारी गुरबख्श सिंह ढिल्लों का जन्म हुआ।
- 1922: अंग्रेजी सरकार की अदालत ने महात्मा गांधी को "यंग इंडिया" नामक पत्रिका में प्रकाशित तीन लेखों के कारण राजद्रोह का दोषी ठहराया और उन्हें छह साल की सजा सुनाई। यह सजा सविनय अवज्ञा आंदोलन के बाद दी गई थी।
- 1944: नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज ने बर्मा (अब म्यांमार) के रास्ते भारत में प्रवेश किया।
- 1965: रूसी अंतरिक्ष यात्री एलेक्सी लियोनोव वोस्खोद 2 मिशन के दौरान अंतरिक्ष में स्पेसवॉक करने वाले पहले व्यक्ति बने। उन्होंने 12 मिनट और 9 सेकंड तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “रुडोल्फ डीजल” के बारे में।
18 मार्च 1858 को जन्मे रुडोल्फ डीजल एक जर्मन आविष्कारक और इंजीनियर थे, जिन्हें डीजल इंजन के आविष्कार के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1892 में इस इंजन का पेटेंट कराया, जो पेट्रोल इंजन की तुलना में अधिक कुशल और शक्तिशाली था। डीजल इंजन ने परिवहन और उद्योग के क्षेत्र में क्रांति ला दी, जिससे रेलवे, जहाजों और वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ी। डीजल ने ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया। उनकी रहस्यमय मृत्यु 1913 में हुई, लेकिन उनका आविष्कार आज भी दुनिया भर में उपयोग किया जाता है। रुडोल्फ डीजल की विरासत इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अमर है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 18 मार्च को मनाये जाने वाले “वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस” के बारे में:
वैश्विक पुनर्चक्रण दिवस हर साल 18 मार्च को मनाया जाता है। यह दिवस पुनर्चक्रण यानी रीसाइक्लिंग के महत्व को उजागर करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि कचरे का सही तरीके से पुनर्चक्रण करके हम प्राकृतिक संसाधनों को बचा सकते हैं और पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं। इस दिवस को मनाने की शुरुआत 2018 में ग्लोबल रिसाइक्लिंग फाउंडेशन द्वारा की गई थी। पुनर्चक्रण से हम धरती के प्राकृतिक संसाधनों जैसे पानी, खनिज, और जंगल को बचा सकते हैं। पुनर्चक्रण से कचरे की मात्रा कम होती है, जिससे लैंडफिल और प्रदूषण में कमी आती है। पुनर्चक्रण ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करके जलवायु परिवर्तन को रोकने में मदद करता है। भारत में स्वच्छ भारत अभियान और प्लास्टिक मुक्त भारत जैसे अभियान पुनर्चक्रण को बढ़ावा दे रहे हैं। हम सभी को अपने दैनिक जीवन में पुनर्चक्रण को अपनाकर धरती को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने में योगदान देना चाहिए।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: " माँ के गहने"
ठाकुरदास की अचानक मृत्यु के बाद, उनकी पत्नी और उनके इकलौते बेटे पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। माँ ने बड़े संघर्ष और मेहनत से अपने बेटे को पाला-पोसा और उसकी पढ़ाई का प्रबंध किया। एक दिन रात को बेटा माँ के पैर दबा रहा था और बातें कर रहा था। उसने कहा, "माँ, मैं बड़ा होकर पढ़-लिखकर विद्वान बनूँगा और तुम्हारी सेवा करूँगा।"
माँ ने मुस्कुराते हुए पूछा, "तुम मेरी सेवा कैसे करोगे?" बेटे ने उत्साह से जवाब दिया, "माँ, तुमने मेरे लिए इतना कष्ट सहा है। जब मैं कमाने लगूँगा, तो तुम्हें अच्छा खाना खिलाऊँगा और तुम्हारे लिए सुंदर गहने भी लाऊँगा।"
माँ ने गंभीर होकर कहा, "बेटा, सेवा तो तुम करोगे ही, लेकिन गहने मेरी पसंद के ही बनवाना।" बेटे ने उत्सुकता से पूछा, "कौन से गहने, माँ?"
माँ ने कहा, "बेटा, मुझे तीन गहनों की चाह है। मैं चाहती हूँ कि हमारे गाँव में एक अच्छा विद्यालय हो, एक चिकित्सालय हो, और गरीब और असहाय बच्चों को खाने-पीने और पहनने की सुविधा मिले।"
बेटा माँ के इन शब्दों से भाव-विभोर हो गया। उसने मन ही मन प्रण किया कि वह माँ की इच्छा पूरी करेगा। पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह एक उच्च पद पर आसीन हुआ और अपने वचन को पूरा करने के लिए अथक परिश्रम किया। उसने गाँव में विद्यालय, चिकित्सालय और गरीब बच्चों के लिए सहायता केंद्र खोले। माँ को अपने बेटे द्वारा दिए गए इन "तीन गहनों" पर गर्व हुआ। यह महान व्यक्ति और कोई नहीं, बल्कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर थे, जिन्होंने शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची सेवा और समाज के प्रति जिम्मेदारी मानवता का सबसे सच्चा गहना है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!
निर्माता : प्रेम वर्मा PS बैजनाथपुर जमुनहा श्रावस्ती







