सुप्रभात बालमित्रों!
17 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 17 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"गलती करने के बजाय देर करना कहीं अधिक अच्छा होता है।" "Delay is preferable to error."
इसका अर्थ है कि यदि किसी काम को सही ढंग से करने में थोड़ा समय लगे, तो उसे स्वीकार करना चाहिए, ताकि गलतियों से बचा जा सके। किसी काम को गलत करने से बेहतर है कि उसमें थोड़ी देर कर दी जाए। कई बार जल्दबाजी में किए गए फैसले गलत हो सकते हैं, जिसके परिणाम बाद में भुगतने पड़ते हैं। यह बात हमें सावधानी और धैर्य का महत्व समझाती है। जल्दबाजी में गलत रास्ता चुनने से बेहतर है कि सही रास्ता ढूंढने में थोड़ी देर लगाएं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Hilarious – हास्यास्पद या "बहुत ही मजेदार" या "ऐसा जो हंसी पैदा करे"। यह शब्द किसी ऐसी चीज़, घटना या व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो इतना मजाकिया या अजीब हो कि उसे देखकर या सुनकर हंसी आ जाए।
उदाहरण: वह इतना हास्यास्पद दिख रहा था कि सब हंस पड़े।
He looked so hilarious that everyone laughed.
जवाब: किताब
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 17 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1406: अरब इतिहासकार और समाजशास्त्री इब्न खल्दुन का निधन हुआ। उन्हें "समाजशास्त्र का पिता" कहा जाता है क्योंकि उन्होंने सामाजिक संरचना, अर्थशास्त्र, और इतिहास के बीच संबंधों का गहन अध्ययन किया था। उनकी प्रसिद्ध अरबी पुस्तक "मुकद्दिमा" इसका प्रमुख उदाहरण है।
- 1769: ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल के कपड़ा उद्योग को बर्बाद करने के लिए बुनकरों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए।
- 1845: लंदन के स्टीफन पेरी ने रबर बैंड का पेटेंट कराया।
- 1959: तिब्बत में चीनी शासन के खिलाफ विद्रोह शुरू हुआ। इसके बाद, बौद्ध धर्मगुरू दलाईलामा को तिब्बत छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। वे तब से भारत में रह रहे हैं।
- 1962: भारतीय-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल जिले में हुआ। वह अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
- 1990: प्रसिद्ध भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल का जन्म हरियाणा के हिसार में हुआ। उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न, पद्मश्री, और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
- 2019: गोवा के चार बार मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “सी. वी. रमन” के बारे में।
कल्पना चावला भारतीय मूल की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री थीं, जिन्होंने अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में जाने का सपना देखा और उसे साकार किया। उनका जन्म 17 मार्च 1962 को हरियाणा के करनाल जिले में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका चली गईं, जहाँ उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी और कोलोराडो यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
कल्पना चावला को 1994 में नासा द्वारा अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया। उन्होंने अपना पहला अंतरिक्ष मिशन एसटीएस-87 (1997) में पूरा किया, जिसमें वह अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने अंतरिक्ष में कुल 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएँ कीं। उनका दूसरा मिशन एसटीएस-107 (2003) था, जो कोलंबिया अंतरिक्ष यान पर था। दुर्भाग्यवश, 1 फरवरी 2003 को पृथ्वी पर वापसी के दौरान यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और कल्पना सहित सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गई।
उन्हें नासा स्पेस मेडल, कांग्रेशनल स्पेस मेडल ऑफ ऑनर, और भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनकी मृत्यु ने विश्व को एक महान वैज्ञानिक और साहसी योद्धा को खो दिया, लेकिन उनकी विरासत आज भी युवाओं को प्रेरित करती है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 17 मार्च को मनाये जाने वाले “सेंट पैट्रिक दिवस” के बारे में:
सेंट पैट्रिक दिवस 17 मार्च को मनाया जाने वाला एक सांस्कृतिक और धार्मिक त्योहार है, जो आयरलैंड के संरक्षक संत, सेंट पैट्रिक, की याद में मनाया जाता है। सेंट पैट्रिक ने 5वीं शताब्दी में आयरलैंड में ईसाई धर्म का प्रसार किया था। इस दिन लोग हरे रंग के कपड़े पहनते हैं, जो आयरलैंड और शैमरॉक (तिपतिया घास) का प्रतीक है। परेड, नृत्य, संगीत और पारंपरिक आयरिश व्यंजनों का आनंद लिया जाता है।
यह त्योहार आयरिश संस्कृति और विरासत का जश्न मनाता है और दुनिया भर में, विशेषकर अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में, बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "बकरियों ने दो गांव खा लिए"
एक बार की बात है, एक राजा जंगल में शिकार करने निकला। शिकार करते-करते वह इतना थक गया कि उसे आराम करने की जरूरत महसूस हुई। वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया और थकान के कारण उसे नींद आ गई। तभी अचानक एक शेर वहां आ गया और उसने राजा पर हमला करने की कोशिश की।
लेकिन तभी एक शिकारी वहां से गुजर रहा था। उसने शेर को देखा और बिना समय गंवाए, उसने शेर पर हमला कर दिया। शिकारी की बहादुरी से शेर भाग खड़ा हुआ। इस शोरगुल से राजा की नींद खुल गई। जब उसे पता चला कि शिकारी ने उसकी जान बचाई है, तो वह बहुत खुश हुआ। राजा ने शिकारी को धन्यवाद दिया और उसे दो गांव देने का वादा किया। वादे के प्रतीक के रूप में राजा ने पेड़ से दो पत्ते तोड़े और उन पर अपना वादा लिखकर शिकारी को दे दिया। राजा ने कहा, "जब भी तुम राजदरबार में इन पत्तों को दिखाओगे, तुम्हें दो गांव मिल जाएंगे।"
शिकारी खुशी-खुशी घर लौट आया। उसने पत्तों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें घर की दीवार पर टांग दिया। लेकिन उसके पास तीन बकरियां थीं, जो घर में आजादी से घूमती रहती थीं। एक दिन, बकरियों ने उन पत्तों को चर लिया। जब शिकारी को यह बात पता चली, तो वह बहुत परेशान हो गया। उसने सोचा, "अब मैं राजा के सामने क्या प्रमाण दिखाऊंगा?"
लेकिन शिकारी ने हार नहीं मानी। उसने एक योजना बनाई और राजदरबार में जाकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा, "बकरियां मेरा दो गांव खा गईं! बकरियां मेरा दो गांव खा गईं!" यह सुनकर दरबार के लोग हैरान रह गए। जब राजा को यह बात पता चली, तो वह मुस्कुराए और शिकारी की चतुराई को समझ गए। राजा ने शिकारी को बुलाया और उससे पूरी बात पूछी। शिकारी ने सारी कहानी सुनाई। राजा ने उसकी बुद्धिमत्ता और साहस की सराहना की और अपना वादा निभाते हुए उसे दो गांव दे दिए।
यह कहानी हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और समस्या का समाधान ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए। अगर हम अपनी समस्याओं को सही तरीके से प्रस्तुत करें और उनका सामना करने का साहस रखें, तो हम किसी भी मुश्किल पर विजय पा सकते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!
निर्माता : प्रेम वर्मा, PS बैजनाथपुर जमुनहा







