सुप्रभात बालमित्रों!
16 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 16 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"हमारे लक्ष्य निर्धारित करते हैं कि हम क्या बनने जा रहे हैं।"
"Our goals determine what we are going to be."
यह सच है कि हमारी सोच, योजना और कार्य ही हमारे भविष्य को आकार देते हैं। हमारे जीवन में निर्धारित लक्ष्य ही यह तय करते हैं कि हम भविष्य में क्या बनेंगे या किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। लक्ष्य हमें एक स्पष्ट दिशा देते हैं। बिना लक्ष्य के जीवन में उद्देश्यहीनता आ सकती है।
लक्ष्य हमें प्रेरित करते हैं और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। लक्ष्य निर्धारित करना सफलता की पहली सीढ़ी है। हमारे लक्ष्य ही हमारे भविष्य की नींव रखते हैं। इसलिए, स्पष्ट और सही लक्ष्य निर्धारित करना जीवन में सफलता पाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: SATISFY : सैटिस्फ़ाइ – जिसका अर्थ है "संतुष्ट" या "तृप्त" होना। "SATISFY" का उपयोग किसी आवश्यकता या इच्छा को पूरा करने के संदर्भ में किया जाता है।
उदाहरण: "I was completely satisfied after hearing his answer." – "उसका जवाब सुनकर मैं पूरी तरह संतुष्ट हो गया।"
पर वो अभी है। बताओ वो क्या है?
Ans. वर्तमान
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 16 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1693: इंदौर के होल्कर वंश के संस्थापक मल्हारराव होल्कर का जन्म हुआ।
- 1867: महान शल्य चिकित्सक जोसेफ लिस्टर की खोज एंटीसेप्टिक सर्जरी का प्रकाशन हुआ, जिसमें उन्होंने घावों को भरने के लिए अपनी एंटीसेप्टिक प्रणाली की घोषणा की थी।
- 1989: मिस्र में चिपोज के पिरामिड में 4400 साल पुरानी ममी मिली।
- 16 मार्च 1995: भारत में पोलियो की ओरल वैक्सीन की पहली खुराक दी गई, जिसके बाद हर साल 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया जाने लगा।
- 2012: भारत के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक बनाने वाले पहले खिलाड़ी बने।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “महान शल्य चिकित्सक जोसेफ लिस्टर” के बारे में।
जोसेफ लिस्टर एक ब्रिटिश शल्य चिकित्सक और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोजों के लिए जाने जाते हैं। उन्हें आधुनिक सर्जरी का जनक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने एंटीसेप्टिक सर्जरी की खोज की और इसे चिकित्सा जगत में लागू किया। उनकी यह खोज चिकित्सा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई, जिसने सर्जरी के दौरान संक्रमण और मृत्यु दर को काफी हद तक कम कर दिया।
जोसेफ लिस्टर का जन्म 5 अप्रैल 1827 को इंग्लैंड के एसेक्स में हुआ था। उनके पिता, जोसेफ जैक्सन लिस्टर, एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे, जिन्होंने माइक्रोस्कोप के विकास में योगदान दिया। इस वैज्ञानिक वातावरण ने लिस्टर को बचपन से ही विज्ञान और चिकित्सा के प्रति आकर्षित किया। उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी कॉलेज से चिकित्सा की पढ़ाई की और 1852 में सर्जन के रूप में योग्यता प्राप्त की।
लिस्टर ने लुई पाश्चर के जर्म थ्योरी (सूक्ष्मजीवों द्वारा संक्रमण) से प्रेरणा लेकर एंटीसेप्टिक तकनीक विकसित की। उन्होंने कार्बोलिक एसिड (फिनोल) का उपयोग करके घावों और सर्जिकल उपकरणों को कीटाणुरहित करने की प्रक्रिया शुरू की। इससे पहले सर्जरी के बाद मरीजों की मृत्यु दर बहुत अधिक थी, क्योंकि संक्रमण को रोकने के लिए कोई प्रभावी तरीका नहीं था। लिस्टर की एंटीसेप्टिक प्रणाली ने इस समस्या का समाधान प्रदान किया और सर्जरी को सुरक्षित बनाया।
उनके योगदान के लिए जोसेफ लिस्टर को कई सम्मान मिले, जिनमें रॉयल सोसाइटी की सदस्यता और लॉर्ड की उपाधि शामिल है। उनके सम्मान में लिस्टरिन (एक कीटाणुनाशक) का नाम रखा गया। आज भी उन्हें चिकित्सा के इतिहास में एक महान नायक के रूप में याद किया जाता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 16 मार्च को मनाए जाने वाले “राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस” के बारे में।
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस भारत में प्रतिवर्ष 16 मार्च को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को टीकाकरण के महत्व के प्रति जागरूक करना और बीमारियों से बचाव के लिए टीकों की आवश्यकता के बारे में समझाना है। यह दिवस इस बात का प्रतीक है कि टीकाकरण न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए, बल्कि समाज और देश के समग्र स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस की शुरुआत 1995 में हुई थी। इसकी शुरुआत का मुख्य कारण पोलियो उन्मूलन था। भारत सरकार ने पोलियो जैसी घातक बीमारी को खत्म करने के लिए व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया गया। यह सफलता टीकाकरण के महत्व को साबित करती है।
टीकाकरण का उद्देश्य संक्रामक बीमारियों जैसे टीबी, हेपेटाइटिस, खसरा, काली खांसी, और हाल ही में कोविड-19 जैसी बीमारियों से बचाव करना है। टीकाकरण न केवल बीमारियों से बचाता है, बल्कि यह महामारी को फैलने से रोकने में भी मदद करता है। इसके अलावा, यह स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च को कम करता है और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देता है।
हालांकि, आज भी कई लोग टीकाकरण के प्रति जागरूक नहीं हैं। कुछ लोग अफवाहों और गलत जानकारी के कारण टीके लगवाने से हिचकिचाते हैं। इसलिए, राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर हमें यह संदेश फैलाना चाहिए कि टीकाकरण सुरक्षित और प्रभावी है। सरकार, स्वास्थ्य कर्मियों और समाज के सहयोग से हम एक स्वस्थ और बीमारी मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं, क्योंकि "रोकथाम इलाज से बेहतर है"।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "फुर्र-फुर्र (लोक-कथा)"
एक जुलाहा सूत कातने के लिए रुई लेकर घर लौट रहा था। रास्ते में थकान के कारण वह नदी किनारे सुस्ताने के लिए बैठ गया। अचानक तेज आँधी आई और उसकी सारी रुई उड़ गई। जुलाहा घबरा गया—अगर खाली हाथ घर पहुँचा तो पत्नी नाराज़ हो जाएगी। घबराहट में उसे कुछ नहीं सूझा, तो उसने सोचा, "क्यों न यह कह दूँ कि 'फुर्र-फुर्र'।" और वह "फुर्र-फुर्र" बोलता हुआ आगे बढ़ गया।
रास्ते में एक चिड़ीमार पक्षी पकड़ रहा था। जुलाहे की "फुर्र-फुर्र" सुनकर सारे पक्षी उड़ गए। चिड़ीमार को गुस्सा आ गया और उसने जुलाहे को डाँटा, "तुमने मेरा काम बिगाड़ दिया! अब से 'पकड़ो! पकड़ो!' बोलना।" जुलाहा "पकड़ो! पकड़ो!" बोलता हुआ आगे चल पड़ा।
कुछ दूर चलने पर उसे कुछ चोर रुपए गिनते हुए दिखे। जुलाहे की "पकड़ो! पकड़ो!" सुनकर चोर घबरा गए। उन्होंने जुलाहे को पकड़ लिया और डाँटा, "तुम हमें पकड़वाना चाहते हो? अब से कहना, 'इसको रखो, ढेरों लाओ।'" जुलाहा यही बोलता हुआ आगे बढ़ गया।
रास्ते में वह एक श्मशान घाट से गुजरा। वहाँ लोगों ने उसे "इसको रखो, ढेरों लाओ" कहते सुना तो वे गुस्से में चिल्लाए, "तुम्हें शर्म नहीं आती? यहाँ कहना चाहिए, 'यह तो बड़े दुख की बात है।'" जुलाहा यही बोलता हुआ आगे चल पड़ा।
कुछ दूर चलने पर उसे एक बारात मिली। जुलाहे को "यह तो बड़े दुख की बात है" कहते सुना तो बरातियों को गुस्सा आ गया। उन्होंने जुलाहे को डाँटा, "तुम हमारी खुशी में दुख की बात क्यों कर रहे हो? अब से कहना, 'भाग्य में हो तो ऐसा सुख मिले।'" जुलाहा यही बोलता हुआ आगे बढ़ गया।
थकान के कारण वह रास्ते में ही सो गया। अगली सुबह जब उसकी आँख खुली तो वह अपने घर में था। उसकी पत्नी ने उसे जगाने के लिए पानी फेंका था। जुलाहे ने मुस्कुराते हुए कहा, "भाग्य में हो तो ऐसा सुख मिले।"
कहानी से सीख मिलती है कि हमें जीवन में लचीलापन, सही समय पर सही बात कहना और सरलता से समस्याओं का सामना करना सीखना चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!
निर्माता : प्रेम वर्मा, PS बैजनाथपुर जमुनहा







