18 December AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

18 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 18 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "क्षमा करना सबसे मधुर प्रतिशोध है।"
"Forgiveness is the sweetest revenge."

जब कोई हमें ठेस पहुँचाता है या बुरा व्यवहार करता है, तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया क्रोधित होना या बदला लेना होती है। लेकिन, वास्तव में, क्षमा ही सबसे उत्तम प्रतिक्रिया है। यह हमें शांत करता है और हमें आगे बढ़ने में मदद करता है। क्षमा टूटे हुए रिश्तों को सुधार सकती है और दर्शाती है कि हम माफ करने और नया मौका देने को तैयार हैं। क्षमा हमें धैर्यवान, सहनशील और दयालु बनाती है। इसका मतलब बुरे व्यवहार को स्वीकार करना नहीं, बल्कि नकारात्मक भावनाओं को त्याग कर जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाना है। यह सिखाता है कि क्रोध और बदला लेने के बजाय क्षमा और करुणा का मार्ग चुनना सबसे प्रभावी प्रतिक्रिया है, जो शांति और मुक्ति प्रदान करती है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: FALSE : फॉल्स: झूठ, असत्य, गलत, मिथ्या। जब कोई बात सही न हो, तथ्यों पर आधारित न हो, या भ्रमित करने वाली हो, तो उसे False कहा जाता है।

वाक्य प्रयोग: Never spread false information about anyone. किसी के बारे में झूठी जानकारी कभी न फैलाओ।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  चार खड़े चार पड़े, बीच में ताने-बाने, पसरे हैं लंबोदर लाला, लंबी चादर ताने।
उत्तर : चारपाई
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 18 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1887 – भोजपुरी लोक साहित्य के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर का पटना बिहार में जन्म हुआ। उन्होंने भोजपुरी नाटक 'बिदेसिया' से ग्रामीण जीवन को मंचित किया तथा पद्म श्री से सम्मानित हुए।
  • 1913 – दक्षिण अफ्रीका में भारतीय प्रवासियों के शोषण की जांच के लिए सोलोमन आयोग ने प्रिटोरिया में अपनी बैठक शुरू की। महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारतीयों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो सत्याग्रह आंदोलन का प्रारंभिक चरण था।
  • 1956 – द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पूर्ण सदस्यता प्राप्त की, जो उसके पुनर्निर्माण और शांतिपूर्ण नीतियों का प्रतीक था।
  • 1960 – नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय का उद्घाटन हुआ, जो हड़प्पा सभ्यता से आधुनिक काल तक भारतीय इतिहास की 2 लाख से अधिक वस्तुओं का संग्रह रखता है तथा सांस्कृतिक धरोहर का प्रमुख केंद्र है।
  • 1961 – भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पुर्तगाली उपनिवेशों गोवा, दमन और दीव पर कब्जा कर लिया, जिससे ये क्षेत्र भारत में विलय हो गए तथा 450 वर्ष पुराने औपनिवेशिक शासन का अंत हुआ।
  • 1997 – क्योटो जापान में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP3 में क्योटो प्रोटोकॉल अपनाया गया, जो विकसित देशों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 5.2% की कटौती का पहला बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता था।
  • 1997 – भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग संधि पर वाशिंगटन में हस्ताक्षर हुए, जो नासा और इसरो के बीच संयुक्त मिशनों तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का आधार बनी।
  • 2000 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस घोषित किया, ताकि 2.58 करोड़ अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों के अधिकारों, योगदान और चुनौतियों पर वैश्विक जागरूकता बढ़ाई जा सके।
  • 2008 – भारत-रूस संयुक्त उद्यम की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का पहला सफल परीक्षण बालासोर ओडिशा से किया गया, जो 290 किमी की रेंज और मच 2.8 की गति वाली विश्व की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है।
  • 2013 – संयुक्त राष्ट्र ने 18 दिसंबर को अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के रूप में मान्यता दी, जो राष्ट्रीय और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा पर केंद्रित है।
  • 18 दिसंबर 2014 – श्रीहरिकोटा से भारत के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 का पहला सफल प्रक्षेपण हुआ, जो 4 टन वजन वाले उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक ले जा सकता है।
  • 18 दिसंबर 2017 – नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल कुश्ती चैंपियनशिप में भारत ने 30 स्वर्ण सहित 53 पदक जीते, जो एशियाई खेलों के बाद सबसे बड़ा कुश्ती आयोजन था।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “भोजपुरी लोक साहित्य के शेक्सपियर : भिखारी ठाकुर” के बारे में।

भिखारी ठाकुर को भोजपुरी लोक साहित्य का शेक्सपियर कहा जाता है। वे एक महान लोक कवि, नाटककार, गीतकार, अभिनेता और समाज-सुधारक थे। उनका जन्म 1887 में बिहार के सारण ज़िले में एक सामान्य परिवार में हुआ, लेकिन अपनी प्रतिभा और संघर्षों के बल पर उन्होंने भोजपुरी संस्कृति को नई पहचान दी। भिखारी ठाकुर की रचनाओं में समाज की वास्तविकताओं, समस्याओं और लोकजीवन की पीड़ा का सजीव चित्रण मिलता है। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति “बिदेसिया” है, जिसमें परदेशी मजदूरी, स्त्री-वेदना और सामाजिक विसंगतियों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त गबरघिचोर, बहुरूपिया, नाइबाबू, कन्यामंच, पुरनिया जैसे अनेक नाटक भी उनके द्वारा रचे गए, जो आज भी भोजपुरी क्षेत्र में बड़े प्रेम से खेले जाते हैं। भिखारी ठाकुर की भाषा सरल, सहज, ग्रामीण संस्कृति से जुड़ी और जनभावनाओं से ओतप्रोत है। उन्होंने अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से जाति-पांत की कुरीतियों, शराबखोरी, स्त्री-शोषण, गरीबी और प्रवासी मजदूरी जैसी सामाजिक समस्याओं पर प्रहार किया। उनके नाटक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का माध्यम थे। यही कारण है कि वे जन-जन के कलाकार बन गए और लोगों ने उन्हें सम्मानपूर्वक “भोजपुरी का शेक्सपियर” कहा। आज भिखारी ठाकुर की रचनाएँ भोजपुरी ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय लोक साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।

👁️ आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 18 दिसंबर को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस” के बारे में:

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस भारत में हर वर्ष 18 दिसंबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देश के अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना, उन्हें प्रोत्साहन देना और समाज में समान अवसर प्रदान करना है। भारत में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अनुसार छह समुदायों—मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन—को अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया गया है। भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान दिए गए हैं, जैसे—अनुच्छेद 14 - कानून के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 - धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध, और अनुच्छेद 25 से 30 - धार्मिक स्वतंत्रता तथा अपनी शिक्षा संस्थान स्थापित व संचालित करने का अधिकार। भारत सरकार अल्पसंख्यक समुदायों के विकास के लिए कई योजनाएँ भी चलाती है, जिनमें प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम, नई रोशनी योजना, और पढ़ो परदेश योजना प्रमुख हैं। इसके बावजूद, अल्पसंख्यकों को सामाजिक व आर्थिक भेदभाव, शिक्षा और रोजगार में सीमित अवसर, तथा कभी–कभी सांप्रदायिक हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस हमें इन समस्याओं पर विचार करने और सभी समुदायों के सम्मान, सुरक्षा व समानता के लिए प्रयास करने की प्रेरणा देता है, ताकि एक समावेशी, न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज का निर्माण किया जा सके।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “ईमानदारी का मूल्य”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: ईमानदारी का मूल्य

सऊदी अरब के प्रसिद्ध विद्वान बुखारी अपनी अद्भुत ईमानदारी और चरित्र की दृढ़ता के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध थे। एक बार वे समुद्री मार्ग से लंबी यात्रा पर निकले। यात्रा खर्च के लिए वे अपने साथ एक हजार दीनार ले गए थे, जिन्हें एक कपड़े की थैली में सुरक्षित रखा गया था। यात्रा के दौरान उनकी मित्रता जहाज पर मौजूद एक यात्री से हो गई। दोनों अक्सर ज्ञान, धर्म और जीवन मूल्यों पर चर्चा किया करते थे। बातचीत के दौरान एक दिन बुखारी ने अनजाने में अपनी दीनारों की थैली उसे दिखा दी। उस यात्री के भीतर लालच ने जन्म ले लिया और उसने उन दीनारों को हथियाने की योजना बना डाली। एक सुबह जब अधिकांश यात्री सो रहे थे, वह व्यक्ति अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगा— “हाय! मेरे एक हजार दीनार चोरी हो गए!” उसका रोना सुनकर जहाज के कर्मचारी और यात्री इकट्ठा हो गए। मामला गंभीर था, इसलिए सबने मिलकर सभी यात्रियों की तलाशी लेने का निर्णय लिया। जब बुखारी की बारी आई, तो कई लोग बोले— “इनकी तलाशी क्यों? ये तो ईमानदारी की मिसाल हैं।” लेकिन बुखारी ने विनम्रता से कहा— “नहीं, मेरी भी तलाशी लो। जिस व्यक्ति के पैसे खोए हैं, उसके मन में कोई भी संदेह शेष नहीं रहना चाहिए।” सभी ने उनकी बात का सम्मान करते हुए तलाशी ली। स्वाभाविक रूप से कुछ नहीं मिला। दो दिन बाद वही व्यक्ति शर्मिंदा-सा उनके पास आया और धीमी आवाज़ में बोला— “बुखारी साहब, आपके पास भी तो एक हजार दीनार थे… वे कहाँ गए?” बुखारी मुस्कुराए और शांत स्वर में बोले— “मैंने उन्हें समुद्र में फेंक दिया।” वह व्यक्ति चकित होकर बोला— “समुद्र में? आखिर क्यों?” बुखारी ने दृढ़ और गम्भीर आवाज़ में कहा— “क्योंकि मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी मेरी ईमानदारी और लोगों का मुझ पर विश्वास है। यदि तलाशी के समय मेरे पास से दीनार मिल जाते, तो शायद आप मान भी लेते कि वे मेरे हैं, पर लोगों के मन में संदेह की एक परछाईं हमेशा बनी रहती। मैं धन खो सकता हूँ, पर अपनी ईमानदारी और विश्वास नहीं।” यह सुनकर वह व्यक्ति शर्म से भर गया। उसने अपनी गलती स्वीकार की और बुखारी से क्षमा माँगी। यह कहानी हमें सिखाती है कि ईमानदारी, सच्चाई, विश्वास, निस्वार्थता और सही निर्णय लेने की क्षमता जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य हैं और हमें इन्हें हमेशा बनाए रखना चाहिए, भले ही इसके लिए हमें कुछ त्याग करना पड़े।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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