17 December AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

17 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 17 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: “सही काम करने के लिए समय हर वक्त ही ठीक होता है।”
"The time is always right to do what is right."

“सही काम” किसी एक परिस्थिति या व्यक्ति के अनुसार तय नहीं होता—यह उन मूल्यों से निर्धारित होता है, जो नैतिकता, ईमानदारी, करुणा और साहस पर आधारित होते हैं। सही काम करने के लिए किसी विशेष समय या अवसर की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। जब भी हम अपने विवेक, नैतिक सोच और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेते हैं, हम सही दिशा की ओर बढ़ते हैं। सही कार्य का फल हमेशा सकारात्मक होता है—यह हमारे चरित्र को मजबूत बनाता है, दूसरों में विश्वास जगाता है और समाज को बेहतर बनाने में योगदान देता है। इसलिए, हर क्षण सही काम करने का अवसर है—बस हमें उसे पहचानकर साहस के साथ अपनाना होता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: FABULOUS फैबुलस — अर्थ: शानदार, अद्भुत, उत्कृष्ट, विस्मयकारी।

वाक्य प्रयोग: We had a fabulous time during our vacation. हमने अपनी छुट्टियों में बेहद शानदार समय बिताया।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  छोटा हूँ पर बड़ा कहलाता, रोज दही की नदी में नहाता।
उत्तर : दही बड़ा।
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 17 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1398 – मध्य एशियाई आक्रमणकारी तैमूर लंग ने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान नासिर उद्दीन महमूद तुगलक की सेनाओं को हराकर दिल्ली पर कब्जा कर लिया, जिससे शहर में बड़े पैमाने पर लूटपाट और नरसंहार हुआ तथा तुगलक वंश की कमजोरी उजागर हुई।
  • 1803 – ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने दूसरी आंग्ल-मराठा युद्ध के दौरान उड़ीसा वर्तमान ओडिशा पर कब्जा कर लिया।
  • 1902 – इतालवी आविष्कारक गुग्लेल्मो मार्कोनी ने ग्लूसेस्टर, मैसाचुसेट्स अमेरिका में दुनिया का पहला व्यावसायिक रेडियो स्टेशन स्थापित किया, जो ट्रांस-अटलांटिक संचार की शुरुआत का प्रतीक बना तथा वायरलेस संचार क्रांति का आधार बना।
  • 1903 – अमेरिकी आविष्कारक भाई ऑरविल और विल्बर राइट ने किटी हॉक उत्तर कैरोलिना में 'राइट फ्लायर' नामक विमान की पहली सफल, नियंत्रित और सतत उड़ान भरी, जो 12 सेकंड चली तथा 120 फुट दूर गई, जिससे मानव इतिहास में हवाई यात्रा की शुरुआत हुई।
  • 1927 – काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को ब्रिटिश सरकार ने निर्धारित तिथि से दो दिन पहले गोंडा जेल में फांसी दे दी, जो हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के प्रारंभिक सदस्य थे तथा क्रांति के प्रतीक बने।
  • 1928 – लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु और सुखदेव ने लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स को गोली मारकर हत्या कर दी, जिससे क्रांतिकारी आंदोलन को नई गति मिली तथा ब्रिटिश दमन बढ़ा।
  • 1931 – प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस के नेतृत्व में कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान ISI की औपचारिक स्थापना हुई, जो सांख्यिकी, अर्थशास्त्र और विज्ञान अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बना तथा योजना आयोग की नीतियों को प्रभावित किया।
  • 1933 – भारत-इंग्लैंड टेस्ट मैच में भारतीय कप्तान लाला अमरनाथ ने अपने पदार्पण टेस्ट में 118 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली टेस्ट शतक थी तथा टीम को पहली टेस्ट जीत दिलाई।
  • 1969 – अमेरिकी वायु सेना ने प्रोजेक्ट ब्लू बुक UFO जांच को समाप्त घोषित किया, जिसमें 12,618 UFO रिपोर्टों में से 701 को अस्पष्ट रखा गया, जो वैज्ञानिक जांच का प्रतीक बना।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी” के बारे में।

राजेंद्रनाथ लाहिड़ी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक वीर, साहसी और निडर क्रांतिकारी थे। वे ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन HRA’ के सक्रिय सदस्य थे और 1925 के प्रसिद्ध काकोरी कांड के प्रमुख योजनाकारों में शामिल थे। देश पर हो रहे अंग्रेजी अत्याचारों से व्यथित होकर उन्होंने हथियारबंद क्रांति का मार्ग चुना और साथी क्रांतिकारियों—रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खाँ, चंद्रशेखर आज़ाद आदि के साथ मिलकर अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष छेड़ा। काकोरी कांड की योजना और क्रियान्वयन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। गिरफ़्तारी के बाद भी वे अडिग रहे और देशभक्ति से सराबोर होकर हँसते-हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया। 17 दिसंबर 1927 को गोंडा जेल में उन्हें फांसी दी गई। राजेंद्रनाथ लाहिड़ी का बलिदान स्वतंत्रता आंदोलन की अमर गाथा है।

👁️ आज का दैनिक विशेष – पेंशनर दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे  को मनाये  17 दिसंबर को मनाये जाने वाले “पेंशनर दिवस” के बारे में:

17 दिसंबर भारत के पेंशनभोगियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जिसे 'पेंशनर्स दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का महत्व 1982 में आए उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाया गया था। इस फैसले ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्रदान किया। इस महत्वपूर्ण निर्णय का श्रेय डी.एस. नाकरा को जाता है, जिन्होंने पेंशनभोगियों के अधिकारों के लिए लम्बा संघर्ष किया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप ही यह ऐतिहासिक फैसला आया, जिसने पेंशन को नियोक्ता की दया पर आधारित 'अनुग्रह' मानने के बजाय, एक 'अधिकार' के रूप में स्थापित किया। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वाई.वी. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने 'नकरा मामले' में यह स्पष्ट किया कि पेंशन कोई इनाम या दान नहीं है, बल्कि कर्मचारी द्वारा दी गई पिछली सेवाओं का भुगतान है। यह एक सामाजिक कल्याण उपाय है जो सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करता है, और उन लोगों के लिए एक सुरक्षा है जिन्होंने इस आश्वासन पर अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों में काम किया कि बुढ़ापे में उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। यह दिवस पेंशनभोगियों की गरिमा और उनके अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का प्रतीक है, और समाज में उनके योगदान को मान्यता देने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक अवसर है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “इंसानियत की कद्र”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “इंसानियत की कद्र”

एक बार एक नवाब की राजधानी में एक फकीर आया। फकीर की कीर्ति सुनकर नवाब पूरे नवाबी ठाठ के साथ भेंट के थाल लिए हुए फकीर के पास पहुंचे। उस समय फकीर कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। फकीर ने नवाब को बैठने का निर्देश दिया। जब नवाब का नंबर आया, तो फकीर ने उनकी ओर देखा और उन्हें बुलाया। भेंट के हीरे-जवाहरातों से भरे थालों को फकीर ने छुआ तक नहीं। इसके बजाय, उन्होंने एक सूखी रोटी नवाब को दी और कहा, "इसे खा लो।" रोटी सख्त थी और नवाब से चबाई नहीं गई। तब फकीर ने कहा, "जैसे आपकी दी हुई वस्तु मेरे काम की नहीं, उसी तरह मेरी दी हुई वस्तु आपके काम की नहीं। हमें वही लेना चाहिए जो हमारे काम का हो। जब तक ज़रूरी न हो, अपने काम का श्रेय भी नहीं लेना चाहिए।" नवाब फकीर की इन बातों से काफी प्रभावित हुए। जब नवाब जाने के लिए उठे, तो फकीर भी दरवाजे तक उन्हें छोड़ने आए। नवाब ने पूछा, "जब मैं आया था, तब आपने देखा तक नहीं, अब मुझे छोड़ने आ रहे हैं?" फकीर बोले, "बेटा, जब तुम आए थे, तब तुम्हारे साथ अहंकार था। अब तुमने वह चोला उतार दिया है और इंसान बन गए हो। हम इंसानियत का आदर करते हैं।" नवाब नतमस्तक हो गया। यह कहानी हमें सिखाती है कि इंसानियत और विनम्रता का महत्व सबसे ऊपर है। किसी भी व्यक्ति का मूल्य उसकी संपत्ति या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसकी विनम्रता और इंसानियत से होता है। हमें अहंकार को त्यागकर, सरल और विनम्र रहकर ही सच्ची मानवता को समझना और जीना चाहिए। केवल वही इंसान सच्चे मानवीय गुणों को अपना सकता है, जो अपने अंदर के अहंकार को समाप्त कर दे।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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