15 January AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी

सुप्रभात बालमित्रों!

15 जनवरी – प्रेरक, ज्ञानवर्धक और नैतिक सफर

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 15 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

"एक सकारात्मक दिमाग हर एक चीज में मौका ढूंढ लेता है।" "A positive mind finds opportunity in everything."

यह कथन हमें सिखाता है कि हमारी सोच का दृष्टिकोण बहुत महत्वपूर्ण होता है। जब हम सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, तो हम हर स्थिति में अवसर और संभावनाएँ देख सकते हैं। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, एक सकारात्मक सोच हमें नए रास्ते, समाधान और उन्नति के अवसर प्रदान करती है। इसलिए, हमें हमेशा सकारात्मक सोचने का प्रयास करना चाहिए ताकि हम हर चुनौती को अवसर में बदल सकें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: FOREFRONT : Forefront का अर्थ होता है सबसे आगे। यह शब्द उन लोगों या चीजों के संदर्भ में प्रयोग होता है जो किसी कार्य, विचारधारा, या प्रगति में सबसे अग्रणी स्थिति में होते हैं। जैसे "वह कंपनी तकनीकी विकास के फोरफ्रंट पर है," यानी वह कंपनी तकनीकी विकास में सबसे आगे है।

🧩 आज की पहेली

आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :

ऊपर से नीचे बहता हूँ, हर बर्तन को अपनाता हूँ,
देखो मुझको गिरा न देना, वर्ना कठिन हो जाएगा भरना।

उत्तर : liquid या द्रव
📜 आज का इतिहास

 अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 15 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1784: विद्वान विलियम जोंस ने कोलकाता के फोर्ट विलियम में एशियाटिक सोसायटी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य एशियाई कला, विज्ञान और साहित्य का अध्ययन करना था।
  • 1949: जनरल के.एम. करियप्पा ने भारतीय थल सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ का पदभार ग्रहण किया। उस दिन से 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • 1956: बहुजन समाज पार्टी बीएसपी की प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती का जन्म दिल्ली में एक दलित परिवार में हुआ।
  • 1998: 99 वर्ष की आयु में गुलज़ारीलाल नन्दा का निधन हुआ । वे एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – गुलजारीलाल नन्दा

 अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'गुलजारीलाल नन्दा’ के बारे में।

आज गुलजारीलाल नन्दा की पुण्यतिथि है। गुलजारीलाल नन्दा एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें 'नन्दाजी' के रूप में भी जाना जाता है। 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद और 1966 में लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद वे दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने। उनका जन्म 4 जुलाई 1898 को सियालकोट (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उन्होंने भारत के स्वाधीनता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया और असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। नन्दा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और मुम्बई के नेशनल कॉलेज में अर्थशास्त्र के व्याख्याता के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।

नन्दा बॉम्बे की विधानसभा में विधायक रहे और श्रम एवं आवास मंत्रालय का कार्यभार संभाला। 1947 में 'इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस' की स्थापना का श्रेय भी उन्हें जाता है। उन्होंने पंचवर्षीय योजनाओं में पंडित जवाहरलाल नेहरू को सहयोग प्रदान किया। नन्दा ने दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री का दायित्व संभाला और प्रथम पाँच आम चुनावों में लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।

गुलजारीलाल नन्दा को देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न (1997) और पद्म विभूषण प्रदान किया गया। उनका निधन 15 जनवरी 1998 को हुआ। उन्हें एक स्वच्छ छवि वाले गांधीवादी राजनेता के रूप में सदैव याद रखा जाएगा।

🎖️ आज का दैनिक विशेष – सेना दिवस

 आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 15 जनवरी को मनाये जाने वाले “सेना दिवस” के बारे में:

सेना दिवस भारत में हर वर्ष 15 जनवरी को लेफ्टिनेंट जनरल (बाद में फ़ील्ड मार्शल) के. एम. करियप्पा के भारतीय थल सेना के शीर्ष कमांडर का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश राज के समय के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर से यह पदभार ग्रहण किया था। यह दिन सैन्य परेडों, सैन्य प्रदर्शनियों और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के साथ नई दिल्ली और सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है। इस दिन उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी भी दी जाती है जिन्होंने अपने देश और लोगों की सलामती के लिये अपना सर्वोच्च न्योछावर किया।

15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद देश में दंगे-फसाद और शरणार्थियों के आवागमन के कारण उथल-पुथल का माहौल था। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा। विभाजन के दौरान शांति-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष सेना कमांड का गठन किया गया। परंतु भारतीय सेना के अध्यक्ष तब भी ब्रिटिश मूल के ही होते थे। 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय सेना प्रमुख बने थे। उस समय भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे। के. एम. करियप्पा पहले अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी। उन्होंने 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी

अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: मूर्ख कौआ और चालाक लोमड़ी

“मूर्ख कौआ और चालाक लोमड़ी”

किसी जंगल में एक कौआ रहता था, जो अपनी कर्कश आवाज में गाता रहता था और सभी जानवरों को परेशान करता था। एक दिन वह भोजन की तलाश में गांव की ओर गया और किस्मत से उसे वहां एक रोटी मिल गई। रोटी लेकर वह वापस जंगल आया और एक पेड़ पर बैठ गया।

उसी समय, एक भूखी लोमड़ी वहाँ से गुजर रही थी और उसने कौवे के पास रोटी देखी। वह रोटी को किसी भी तरह पाने की सोचने लगी। जैसे ही कौआ रोटी खाने को हुआ, नीचे से लोमड़ी की आवाज आई - "अरे कौआ महाराज, मैंने सुना है कि यहां कोई बहुत सुरीली आवाज में गा रहा है, क्या वह आप हैं?"

लोमड़ी की प्रशंसा सुनकर कौआ मन ही मन बहुत खुश हुआ और उसने अपना सिर हां में हिला दिया। लोमड़ी ने कहा, "क्यों मजाक कर रहे हो महाराज? इतनी मधुर आवाज में आप गा रहे थे, मुझे कैसे यकीन हो? अगर आप गा कर बताएंगे, तो मुझे यकीन हो जाएगा।"

कौआ लोमड़ी की बात सुनकर जैसे ही गाने लगा, उसके मुंह में दबी रोटी नीचे गिर गई। रोटी नीचे गिरते ही लोमड़ी ने रोटी पर झपट्टा मारा और रोटी खाकर वहां से चली गई। भूखा कौआ लोमड़ी को देखता रह गया और अपने किए पर बहुत पछताया।

कहानी से सीख: यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा सतर्क रहना चाहिए और झूठी प्रशंसा के जाल में नहीं फंसना चाहिए। हमें कभी भी किसी की बातों में नहीं आना चाहिए और ऐसे लोगों से बचना चाहिए, जो झूठी प्रशंसा करते हैं। ऐसे लोग सिर्फ अपना काम निकलवाने के लिए ऐसा व्यवहार करते हैं।

🚂 अभ्युदय वाणी का आज का सफ़र

 आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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