16 January AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢










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आज की अभ्युदय वाणी

सुप्रभात बालमित्रों!

16 जनवरी – रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 16 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

 तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

"बड़ा सोचें, जल्दी सोचें और आगे की सोचें।"
"Think big, think fast and think ahead."

यह कथन हमें सिखाता है कि हमें अपने लक्ष्यों को बड़ा और विस्तृत रखना चाहिए। जल्दी सोचने से हम अवसरों को पहचानकर उनके लाभ उठा सकते हैं और आगे की सोचने से हम भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रह सकते हैं। यह दृष्टिकोण न केवल हमें व्यक्तिगत रूप से प्रेरित करता है बल्कि हमें नवाचार और विकास की दिशा में अग्रसर करता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: Accomplish का अर्थ होता है पूरा करना।

उदाहरण: He managed to accomplish the task on time. उसने समय पर काम पूरा कर लिया।

🧩 आज की पहेली

आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :

आँखें हैं पर अंधी हूँ, पैर हैं पर लंगड़ी हूँ, मुँह है पर मौन हूँ, बताओ में कौन हूँ।

उत्तर : गुड़िया।
📜 आज का इतिहास

 अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 16 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1920: प्रथम विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक संस्था 'लीग ऑफ नेशंस' ने पेरिस में अपनी पहली काउंसिल मीटिंग की।
  • 1938: बांग्ला भाषा के अमर कथाशिल्पी और सुप्रसिद्ध उपन्यासकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय का निधन हुआ।
  • 1969: सोवियत अंतरिक्ष यानों 'सोयुज 4' और 'सोयुज 5' के बीच पहली बार अंतरिक्ष में सदस्यों का आदान-प्रदान हुआ।
  • 2003: भारतीय मूल की कल्पना चावला दूसरी अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना हुईं। दुर्भाग्य से, यह शटल 1 फरवरी 2003 को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें कल्पना चावला सहित सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों का निधन हो गया था।
  • 1955: पुणे के खड़कवासला में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी National Defence Academy - NDA का औपचारिक रूप से उद्घाटन हुआ।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

 अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व शरत चंद्र चट्टोपाध्याय’ के बारे में।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय एक प्रसिद्ध बंगाली लेखक और उपन्यासकार थे। उनका जन्म 15 सितम्बर 1876 को पश्चिम बंगाल के देवानंदपुर गाँव में हुआ था। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की अधिकांश रचनाओं में गांव के लोगों के जीवन, उनके संघर्ष और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वर्णन मिलता है। उन्होंने अपने उपन्यासों में बंकिम चंद्र चटर्जी के लेखन से प्रेरित विषयों का इस्तेमाल किया। उनकी रचनाओं में तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की झलक मिलती है।

उनके उपन्यासों के कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं और उनके उपन्यासों पर कई फिल्में भी बनी हैं। 'देवदास', 'श्रीकांत', 'परिणीता', 'बिलासी', और 'बड़ी दीदी' शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कुछ प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं। उनके उपन्यासों में उनकी सामाजिक दृष्टिकोण और यथार्थवादी लेखन शैली की झलक मिलती है। उनके कृतियों ने न केवल बंगाली साहित्य को समृद्ध किया, बल्कि भारतीय साहित्य में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

🎉 आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस

 आज के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 16 जनवरी को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस” के बारे में:

भारत में स्टार्टअप की उपलब्धियों की सराहना करने के लिए हर साल 16 जनवरी को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के युवाओं के लिए नवाचार और अर्थव्यवस्था में उनके योगदान पर चर्चा करने के लिए स्टार्टअप उद्यमियों को एक मंच प्रदान करने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2022 में भारत में पहला ‘राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस’ मनाया गया। जब 15 जनवरी 2022 को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस को अपनाने की घोषणा की और नवोदित उद्यमियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत के दौरान, पीएम मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स के विकास की प्रशंसा की।

साथ ही उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग DPIIT और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय पूरे देश में 10 से 16 जनवरी के मध्य ‘स्टार्टअप इंडिया इनोवेशन वीक’ का आयोजन करता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी

अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है:

“ऊंट की गर्दन”

अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बड़े कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की, लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ। बीरबल बड़ी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?

एक दिन महाराज अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले और बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा और बीरबल से पूछा, "बीरबल, बताओ ऊँट की गर्दन मुड़ी क्यों होती है?" बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया, "महाराज, यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण उसकी गर्दन मुड़ी है। कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है, भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड़ देते हैं। यह एक तरह की सजा है।"

तभी अकबर को ध्यान आया कि वे भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गए हैं। उन्होंने तुरंत बीरबल से महल में चलने के लिए कहा और महल में पहुँचते ही बीरबल को पुरस्कार की धनराशि सौंप दी और बोले, "मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुड़ेगी बीरबल।" और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए। इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपने वादों को नहीं भूलना चाहिए और हमेशा उन्हें निभाने का प्रयास करना चाहिए।

🚂 अभ्युदय वाणी का आज का सफ़र

 आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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