सुप्रभात बालमित्रों!
14 जनवरी – आज की रोमांचक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 14 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "अगर आप सही राह पर चल रहे हैं, तो आप अंततः प्रगति करेंगे।" "If you're walking down the right path, eventually you'll make progress." यह कथन हमें सिखाता है कि सही दिशा में चलते रहना महत्वपूर्ण है।
सही राह पर चलने का मतलब है अपने सिद्धांतों और मूल्यों का पालन करना और अपने लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए मेहनत करना। जब हम सही दिशा में लगातार प्रयास करते हैं और अपने लक्ष्यों के प्रति सच्चे और ईमानदार रहते हैं, तो हमें अंततः सफलता मिलेगी।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: KIT : किट : साज-सामान या सामग्री का झोला। किट किसी विशेष कार्य के लिए आवश्यक उपकरण और सामग्री के समूह या वस्त्रों, उपकरणों या सामग्री को रखने के लिए उपयोग किये जाने वाले बैग को कहते हैं।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का : मैं हूँ बंदा धाँसू, काटने पर दूँ आँसू। उत्तर : प्याज।
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 14 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- • 1761: मराठाओं और अफगानों के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध लड़ा गया, जिसमें अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली की सेना ने मराठा सेना को करारी शिकस्त दी।
- • 1761: पांडिचेरी का घेराबंदी (1760-1761) समाप्त हुआ, जब फ्रांसीसी जनरल थॉमस आर्थर ले लेली ने ब्रिटिश सेना के सामने आत्मसमर्पण किया, जिससे पांडिचेरी (पुडुचेरी) ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन आ गया।
- • 1969: भारत के राज्य मद्रास का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर तमिलनाडु कर दिया गया।
- • 1934: दशरथ मांझी का जन्म हुआ, जिन्हें 'बिहार का माउंटेन मैन' कहा जाता है। उन्होंने अकेले ही पहाड़ काटकर गेहलौर गाँव के लिए 360 फुट लंबा रास्ता बनाया।
- • 2005: कैसिनी-ह्यूजेन्स मिशन के ह्यूजेन्स प्रोब ने शनि के चंद्रमा टाइटन की सतह पर सफलतापूर्वक उतराई की, जो पृथ्वी से सबसे दूर की ऐसी उतराई थी।
- • 1965: भारतीय खाद्य निगम FCI की स्थापना हुई थी। इसकी स्थापना खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत भारत सरकार द्वारा की गई थी।
अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'दशरथ मांझी’ के बारे में।
दशरथ मांझी, जिन्हें 'बिहार का माउंटेन मैन' कहा जाता है, उन्होंने अपनी दृढ़ता और संकल्प से अद्वितीय कार्य किया। उनका जन्म 14 जनवरी 1934 को बिहार के गहलौर गाँव में हुआ था। गरीबी और जमींदारों के अत्याचार से तंग आकर उन्होंने धनबाद की कोयले की खानों में काम किया।
अपने पति के लिए खाना ले जाते समय उनकी पत्नी फाल्गुनी पहाड़ के दर्रे में गिर गयी और उनका निधन हो गया। अगर फाल्गुनी देवी को अस्पताल ले जाया गया होता तो शायद वो बच जाती, यह बात दशरथ मांझी के मन में घर कर गई। इसके बाद दशरथ मांझी ने संकल्प लिया कि वह अकेले अपने दम पर वे पहाड़ के बीचों बीच से रास्ता निकालेगे। केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर उन्होंने 22 वर्षों तक (1960-1982) मेहनत की और 360 फुट लंबी, 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँची सड़क बना डाली। इस सड़क ने गया के अत्रि और वज़ीरगंज सेक्टर्स की दूरी को 55 कि.मी. से घटाकर 15 कि.मी. कर दिया।
दशरथ मांझी के प्रयास का मज़ाक भी उड़ाया गया, लेकिन उनकी दृढ़ता और समर्पण ने गेहलौर के लोगों के जीवन को सरल बना दिया। उनका यह कार्य सामाजिक सेवा का एक अद्वितीय उदाहरण है। 17 अगस्त 2007 को पित्ताशय के कैंसर से उनका निधन हो गया। 2012 में दशरथ मांझी पर एक वृत्तचित्र फिल्म "द मैन हु मूव्ड द माउंटेन" का निर्माण किया गया। इस वृत्तचित्र के माध्यम से, लोगों को उनके अद्वितीय संघर्ष और संकल्प के बारे में जानने का अवसर मिला।
आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 14 जनवरी को मनाये जाने वाले “मकर संक्रांति” के बारे में:
मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे पूरे भारत और नेपाल में भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, उस दिन यह पर्व मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन पड़ता है, जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है और मकर संक्रांति से ही ऋतु परिवर्तन भी होने लगता है।
मकर संक्रांति के अवसर पर फसल के लिए प्रार्थना की जाती है और धन्यवाद दिया जाता है। तिल से बनी मिठाइयाँ बनाई और खाई जाती हैं। पूजा घर में सूर्य यंत्र की स्थापना की जाती है और सूर्य मंत्र का जाप किया जाता है। शाम के समय गरीब लोगों को दान दिया जाता है और उनका प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश में संक्रांति के रूप में, और बिहार के कुछ जिलों में 'तिला संक्रांत' के रूप में जाना जाता है। गुजरात में इसे उत्तरायण या अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है, क्योंकि 14 जनवरी के बाद से सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर होता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी का निरंतर 6 महीनों के समय अवधि के उपरांत उत्तर से दक्षिण की ओर घूर्णन करना होता है। मकर संक्रांति न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि लोगों के बीच उत्साह और एकता भी बढ़ाता है।
अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: दृष्टिकोण:
दृष्टिकोण:
एक बार की बात है, दो भाई, रोहित और मोहित थे। वे 9वीं कक्षा के छात्र थे और एक ही स्कूल में पढ़ते थे। उनकी कक्षा में अमित नाम का भी एक छात्र था, जो बहुत अमीर परिवार से था।
एक दिन अमित अपने जन्मदिन पर बहुत महंगी घड़ी पहन कर स्कूल आया। सभी उसे देखकर बहुत चकित थे और उसकी घड़ी के बारे में बातें कर रहे थे। किसी ने अमित से पूछा, "यार, ये घड़ी कहाँ से ली?"
अमित ने जवाब दिया, "मेरे भैया ने मुझे जन्मदिन पर ये घड़ी गिफ्ट की है।"
यह सुनकर सभी उसके भैया की तारीफ करने लगे और सोचने लगे, "काश उनका भी ऐसा कोई भाई होता।"
मोहित भी ऐसा ही सोच रहा था और उसने रोहित से कहा, "काश हमारा भी कोई ऐसा भाई होता!"
परंतु, रोहित की सोच अलग थी। उसने कहा, "काश मैं भी ऐसा बड़ा भाई बन पाता!"
वर्षों बीतते गए। धीरे-धीरे, मोहित अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने लगा, जबकि रोहित ने मेहनत की और एक सफल व्यक्ति बन गया। रोहित ने दूसरों से कभी कोई उम्मीद नहीं रखी और हमेशा मदद के लिए तैयार रहता था।
इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए और नकारात्मकता से बचना चाहिए। हमारा दृष्टिकोण ही हमारे जीवन को परिभाषित करता है और हमारे भविष्य को निर्धारित करता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







