12 December AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢







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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

12 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 12 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "सीखने से मस्तिष्क कभी नहीं थकता है। Learning never exhausts the mind."

सीखने की प्रक्रिया से मस्तिष्क कभी नहीं थकता है क्योंकि यह हमेशा नई जानकारी और चुनौतियों के लिए तैयार रहता है। जब हम कुछ नया सीखते हैं, तो हमारे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स यानी तंत्रिका कोशिकाएं नए कनेक्शन बनाते हैं, जिससे न्यूरल नेटवर्क मजबूत होते हैं। यह प्रक्रिया मस्तिष्क की प्लास्टिसिटी को बढ़ाती है, जिससे हम अधिक रचनात्मक, नवाचारपूर्ण और समस्या-समाधान में कुशल बनते हैं। जब हम सीखते हैं, तो हमारा मस्तिष्क उत्तेजित और सक्रिय रहता है, जिससे हमारी सोच और समझ का दायरा बढ़ता है। शिक्षा और ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया में हम नए विचारों, अवधारणाओं और अनुभवों से रूबरू होते हैं, जो हमारी बौद्धिक क्षमताओं को बढ़ाते हैं। ज्ञान की यह यात्रा हमें जीवनभर प्रेरित और उत्साहित रखती है, जिससे हमारा मस्तिष्क कभी नहीं थकता।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Eastern : ईस्टर्न – अर्थ
Eastern का अर्थ होता है "पूर्वी", "पूर्व दिशा का" या "पूर्व की ओर स्थित"। यह शब्द किसी स्थान, क्षेत्र, दिशा या संस्कृति को पूर्व दिशा से जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

वाक्य प्रयोग: She lives in the Eastern region of the city. वह शहर के पूर्वी क्षेत्र में रहती है।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  खड़ा द्वार पर ऐसा घोड़ा, जिसने चाहा पेट मरोड़ा।
उत्तर : ताला
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 12 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1800 – संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी फिलाडेल्फिया से स्थानांतरित होकर वाशिंगटन डी.सी. में स्थापित हुई। ।
  • 1882 – बंगाली साहित्य के प्रमुख लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का राष्ट्रवादी उपन्यास आनंदमठ प्रकाशित हुआ। यह सन्न्यासी विद्रोह 1770 के बंगाल अकाल पर आधारित ऐतिहासिक कृति है, जिसमें 'वंदे मातरम' गान की रचना की गई, जो स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बनी।
  • 1911 – दिल्ली दरबार के दौरान ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने कोलकाता से राजधानी हटाकर दिल्ली को ब्रिटिश भारत की नई राजधानी घोषित किया। यह निर्णय सामरिक महत्व तथा ऐतिहासिक प्रतीकवाद के आधार पर लिया गया, तथा न्यू दिल्ली का निर्माण 1931 में पूरा हुआ।
  • 1930 – मुंबई में बाबू गेनू ने विदेशी कपड़ों से भरे ट्रक के सामने लेटकर अपने प्राण न्योछावर कर दिए, और महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन को अमर साहस व बलिदान का नया स्वर दिया।
  • 1950 – दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ का बेंगलुरु कर्नाटक में जन्म हुआ। उन्होंने तमिल, हिंदी तथा अन्य भाषाओं में 170 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया तथा पद्म विभूषण से सम्मानित होकर भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई।
  • 1963 – पूर्वी अफ्रीकी राष्ट्र केन्या ने ब्रिटेन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त की तथा इस दिन को जाम्हुरी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • 1964 – हिंदी साहित्य के राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में 78 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने खड़ी बोली कविता को लोकप्रिय बनाया तथा 'भारत-भारती' जैसी रचनाओं से स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरित किया।
  • 1981 – भारतीय क्रिकेट के आक्रामक ऑलराउंडर युवराज सिंह का चंडीगढ़ पंजाब में जन्म हुआ। उन्होंने 2011 विश्व कप में निर्णायक भूमिका निभाई, छह लगातार छक्के मारने का विश्व रिकॉर्ड बनाया तथा अर्जुन पुरस्कार एवं पद्म श्री प्राप्त किया।
  • 1996 – भारत एवं बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे की 30 वर्षीय संधि पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए। तत्कालीन प्रधानमंत्रियों एच.डी. देवेगौड़ा एवं शेख हसीना ने फरक्का बैराज से शुष्क मौसम में जल विभाजन की व्यवस्था की, जो 2026 तक प्रभावी है।
  • 2005 – प्रसिद्ध भारतीय टेलीविजन निर्देशक एवं निर्माता रामानंद सागर का मुंबई में 88 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्होंने 'रामायण' एवं 'कृष्ण' जैसे धारावाहिकों से टीवी क्रांति लाई तथा पद्म श्री से सम्मानित हुए।
  • 2015 – पेरिस में वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन COP21 के दौरान पेरिस समझौता को 196 देशों ने अपनाया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त” के बारे में।

मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित और जन-प्रिय कवि थे, जिन्हें “राष्ट्रकवि” की उपाधि मिली। उनका जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के चिरगाँव झाँसी में हुआ। उन्होंने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना, भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और नैतिकता को अद्वितीय रूप से अभिव्यक्त किया। खड़ी बोली को काव्य भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में गुप्त जी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। द्विवेदी युग के प्रमुख कवि के रूप में उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर स्वतंत्रता आंदोलन को अपनी कविताओं का केंद्र बनाया। भारतीय इतिहास, पौराणिक कथाएँ और समकालीन सामाजिक समस्याएँ उनकी रचनाओं में सुंदर रूप से समाहित हैं। उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति ‘भारत-भारती’ 1912 ने पराधीन भारत में राष्ट्रीय भावना को नई शक्ति दी, और इसी कृति से प्रभावित होकर महात्मा गांधी ने उन्हें “राष्ट्रकवि” कहा। उनकी अन्य प्रमुख कृतियों में ‘साकेत’, ‘यशोधरा’, और ‘पंचवटी’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिनमें भाव, भाषा और संस्कृति का अद्भुत समन्वय मिलता है। सरल, सहज और प्रभावपूर्ण भाषा के कारण गुप्त जी जन-जन के कवि बने। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 12 दिसंबर 1964 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके साहित्यिक योगदान ने उन्हें हिंदी कविता में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव का अमर प्रतीक बना दिया।

👁️ आज का दैनिक विशेष – अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे  को मनाये  12 दिसंबर को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज दिवस” के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज दिवस हर वर्ष 12 दिसंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 12 दिसंबर 2012 को हुई, जब संयुक्त राष्ट्र ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) पर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया। बाद में 2017 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित कर दिया। यह दिन संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विभिन्न देशों की सरकारों, अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों, स्कूलों, एनजीओ और आम नागरिकों द्वारा मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि स्वास्थ्य सेवा हर व्यक्ति का मूल अधिकार है, और किसी को भी आर्थिक कठिनाइयों के कारण इलाज से वंचित नहीं होना चाहिए। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को प्राथमिक चिकित्सा, रोग-निवारण, स्वास्थ्य बीमा और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में बताया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज दिवस हमें प्रेरित करता है कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ हर व्यक्ति को बिना भेदभाव के सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और समय पर स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें—यही एक मजबूत, सुरक्षित और स्वस्थ विश्व की नींव है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “डटकर सामना करें, भागें नहीं”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “डटकर सामना करें, भागें नहीं”

कौशाम्बी नरेश की महारानी भगवान बुद्ध से घृणा करती थी। एक बार जब भगवान बुद्ध कौशाम्बी आए, तो महारानी ने उन्हें परेशान और अपमानित करने के लिए कुछ विरोधियों को उनके पीछे लगा दिया। गौतम बुद्ध के शिष्य आनंद, जो हमेशा उनके साथ रहते थे, इस खराब व्यवहार को देखकर दुःखी हो गए। परेशान होकर आनंद ने भगवान बुद्ध से कहा, "हे नाथ, ये लोग हमारा अपमान करते हैं। क्यों न इस शहर को छोड़कर कहीं और चल दें?" भगवान बुद्ध ने पूछा, "कहां जाएं?" आनंद ने जवाब दिया, "किसी दूसरे शहर जहां इस तरह के लोग न हों।" तब गौतम बुद्ध बोले, "अगर वहां भी लोगों ने ऐसा अपमानजनक व्यवहार किया तो?" शिष्य आनंद ने कहा, "तो फिर वहां से भी किसी दूसरे शहर की ओर चलेंगे और फिर वहां से भी किसी दूसरे शहर।" तथागत ने गंभीर होकर कहा, "नहीं आनंद, ऐसा सोचना ठीक नहीं है। जहां कोई मुश्किल पैदा हो, कठिनाइयां आएं, वहीं डटकर उनका मुकाबला करना चाहिए। वहीं उनका समाधान किया जाना चाहिए। जब वे हट जाएं तभी उस स्थान को छोड़ना चाहिए।" इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि समस्याओं से भागना उनका समाधान नहीं है। हमें डटकर उनका सामना करना चाहिए और उनका समाधान वहीं करना चाहिए जहां वे उत्पन्न होती हैं।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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