सुप्रभात बालमित्रों!
13 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 13 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"बोलने से पहले अपने शब्दों को तीन द्वारों से गुज़रने दें: क्या यह सच है? क्या यह ज़रूरी है? क्या यह दयालु है?"
“Before you speak, let your words pass through three gates: Is it true? Is it necessary? Is it kind?"
गौतम बुद्ध की यह प्रेरक उक्ति हमें सीख देती है कि शब्दों में अपार शक्ति होती है और उन्हें सोच-समझकर ही प्रयोग करना चाहिए। पहली कसौटी—सत्य—सिखाती है कि हम केवल सत्य और तथ्य आधारित बातें कहें। दूसरी कसौटी—आवश्यकता—यह बताती है कि हमारे शब्द सार्थक और उद्देश्यपूर्ण हों। तीसरी कसौटी—दयालुता—समझाती है कि हमारे शब्दों में करुणा और संवेदनशीलता हो, जिससे किसी को दुख न पहुँचे। जब हम इन तीनों द्वारों से गुजरकर बोलते हैं, तो हमारे शब्द न केवल संबंध बेहतर बनाते हैं बल्कि हमारे व्यक्तित्व को भी सौम्य, विवेकपूर्ण और सम्माननीय बनाते हैं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है ECHO (इको) — गूंज या प्रतिध्वनि। जब कोई ध्वनि तरंग किसी कठोर सतह से टकराकर वापस लौटती है और दोबारा सुनाई देती है, तो उस पुनरावर्ती ध्वनि को गूंज या प्रतिध्वनि कहते हैं।
वाक्य प्रयोग: We heard an echo when we shouted in the empty hall. खाली हॉल में जोर से बोलने पर हमें अपनी आवाज़ की गूंज सुनाई दी।
उत्तर : ट्रेन
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 13 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1884 – ब्रिटिश आविष्कारक पर्सिवल एवरिट ने सिक्का डालकर वजन मापने वाली पहली मशीन का पेटेंट कराया। यह आविष्कार सिक्का-चालित उद्योग की शुरुआत था, जो बाद में आर्केड, वेंडिंग मशीनों और मनोरंजन उपकरणों का आधार बना तथा सार्वजनिक स्थानों पर लोकप्रिय हुआ।
- 1921 – ब्रिटिश भारत के प्रिंस ऑफ वेल्स ने वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय BHU का औपचारिक उद्घाटन किया। 1916 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय शिक्षा, संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बना तथा आज भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में से एक है।
- 1974 – भूमध्यसागरीय द्वीप राष्ट्र माल्टा ने ब्रिटिश राजतंत्र को समाप्त कर गणराज्य घोषित किया।
- 1989 – जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट JKLF के आतंकवादियों ने तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की पुत्री रुबैया सईद को अपहरण के बाद रिहा करने के बदले पांच जेलबंद आतंकवादियों की मांग की। वी.पी. सिंह सरकार ने मांग स्वीकार की तथा 13 दिसंबर को उन्हें रिहा किया, जिससे कश्मीर में उग्रवाद को बढ़ावा मिला।
- 1996 – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कोफी अन्नान को महासचिव चुना। वे 1 जनवरी 1997 से पद ग्रहण करने वाले पहले अफ्रीकी मूल के महासचिव बने तथा 2001 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित हुए।
- 2001 – पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद एवं लश्कर-ए-तैयबा के पांच आतंकवादियों ने नई दिल्ली में भारतीय संसद पर हमला किया। सफेद एंबेसडर कार से घुसकर उन्होंने 45 मिनट तक गोलीबारी की, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकियों को मार गिराया। इस हमले में दिल्ली पुलिस एवं संसद सुरक्षा सेवा के नौ जवान शहीद हुए।
- 2002 – कोपेनहेगन यूरोपीय परिषद में यूरोपीय संघ का ऐतिहासिक विस्तार घोषित किया गया। जिसमें साइप्रस, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, हंगरी, लातविया, लिथुआनिया, माल्टा, पोलैंड, स्लोवाकिया एवं स्लोवेनिया को सदस्यता दी गई, जिससे संघ 15 से बढ़कर 25 सदस्यों वाला हो गया।
- 1955 – गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का मापुसा उत्तर गोवा में जन्म हुआ। वे भाजपा के प्रमुख नेता, आईआईटी बॉम्बे स्नातक तथा गोवा के चार बार मुख्यमंत्री रहे।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे भारत के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ “मनोहर गोपालकृष्ण पर्रिकर” के बारे में।
मनोहर गोपालकृष्ण पर्रिकर भारत के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ, रक्षा मंत्री, गोवा के चार बार मुख्यमंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता थे। उनका जन्म 13 दिसंबर 1955 को उत्तर गोवा के मापुसा में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से मैटलर्जिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और तकनीकी रूप से कुशल नेता के रूप में पहचान बनाई। राजनीति में प्रवेश से पहले वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के स्वयंसेवक थे। 1994 में वे पहली बार गोवा विधानसभा के लिए चुने गए और 2000 से 2019 तक चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे। उनके शासनकाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुए। 24 अक्टूबर 2014 को वे भारत के रक्षा मंत्री बने और 2014-2017 तक इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल में सर्जिकल स्ट्राइक (2016), वन रैंक वन पेंशन (OROP) की शुरुआत, राफेल समझौता और मेक इन इंडिया रक्षा नीति को बढ़ावा देना प्रमुख उपलब्धियाँ रहीं। उन्होंने सेना में पारदर्शिता, आधुनिकीकरण और स्वदेशी हथियार निर्माण पर जोर दिया। 2017 में गोवा में सरकार बनाने के बाद वे फिर मुख्यमंत्री बने, लेकिन अग्न्याशय कैंसर से पीड़ित होने के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने पर 17 मार्च 2019 को पणजी में उनका निधन हो गया। भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया। सादगी, ईमानदारी, तकनीकी दृष्टिकोण और राष्ट्रप्रेम के लिए जाने जाने वाले पर्रिकर ने गोवा की राजनीति को नई दिशा दी और राष्ट्रीय स्तर पर रक्षा क्षेत्र में अमिट योगदान दिया। उनकी स्मृति में गोवा सरकार ने मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नामकरण किया।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 8 से 14 दिसंबर तक मनाये जाने वाले “अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह” के बारे में:
अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह हर वर्ष 8 से 14 दिसंबर तक पूरे भारत में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। इस सप्ताह का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प के प्रति जागरूकता बढ़ाना, कारीगरों के अमूल्य कौशल को सम्मान देना और उन्हें आर्थिक-सामाजिक समर्थन प्रदान करना है। इस अवसर पर विभिन्न प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, विक्रय मेले और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें भारत के विविध राज्यों की विशिष्ट कलाएँ—जैसे मिट्टी कला, बाँस शिल्प, वारली कला, बुनाई, धातु कला और लकड़ी नक्काशी—अपनी अनोखी पहचान के साथ प्रदर्शित होती हैं। यह सप्ताह कारीगरों को अपनी कला को व्यापक स्तर पर दिखाने और नए अवसर प्राप्त करने का सुनहरा मंच प्रदान करता है। इस दौरान स्वर्गीय श्रीमती कमलादेवी चट्टोपाध्याय को विशेष श्रद्धांजलि दी जाती है, जो एक महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय हथकरघा-हस्तशिल्प पुनरुद्धार की प्रेरक शक्ति थीं। उन्होंने सहकारी आंदोलन के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह न केवल भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को संजोता है, बल्कि कारीगरों के विकास और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए विविध प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “हतोत्साहित मत होना!”
एक दिन, एक किसान का गधा गलती से एक गहरे कुएं में गिर गया। गधा जोर-जोर से रेंकता रहा और किसान उसकी आवाज़ सुनता रहा, सोचता रहा कि क्या किया जाए। काफी सोच-विचार के बाद, किसान ने निर्णय लिया कि गधा बूढ़ा हो चुका है और उसे बचाने का कोई फायदा नहीं है, इसलिए कुएं को मिट्टी से भर देना ही ठीक है। किसान ने अपने पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया और सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़कर कुएं में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे ने समझा कि क्या हो रहा है, उसने जोर से चीखना शुरू कर दिया। लेकिन कुछ ही देर में वह चुप हो गया। सबने सोचा गधा मर चुका होगा। पर जब किसान ने कुएं में झांका तो वह हैरान रह गया। गधा, हर बार जब उसकी पीठ पर मिट्टी गिरती, तो हिल-हिल कर उसे गिरा देता और उस पर चढ़ जाता। धीरे-धीरे, वह ऊपर चढ़ता गया और अंततः कुएं के किनारे पहुंचकर बाहर कूद गया। शिक्षा: इस कहानी से यह संदेश मिलता है कि हमें मुश्किल परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए। समस्याओं का डटकर सामना करना चाहिए, क्योंकि हर समस्या का एक समाधान जरूर होता है। हमें हर चुनौती को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए और अपनी हिम्मत से उसे पार करना चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







