10 February AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

10 फ़रवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 10 फ़रवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "इतने अच्छे बने कि आपकी उपेक्षा करने का किसी में साहस ही न हो।" "Be so good thet no one has the courage to ignore you."

इस कथन का आशय है कि हमें अपने कार्यों और व्यक्तित्व को इस कदर उत्कृष्ट और अद्वितीय बनाना चाहिए कि कोई भी हमारी उपेक्षा करने का साहस न कर सके। हमेशा अपने सर्वोत्तम प्रयास करें और ऐसी गुणवत्ता प्रदर्शित करें जो दूसरों को प्रभावित करे और उन्हें हमारी कदर करने के लिए मजबूर करे।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: TEMPLATE : टेम्पलेट आदर्श, नमूना, साँचा, टेम्पलेट एक आदर्श, नमूना, साँचा होता है, जो किसी विशेष प्रकार के दस्तावेज़ के लिए एक मानक स्वरूप या एक प्री-डिज़ाइन किया हुआ लेआउट होता है जो काम को आसान बनाता है। टेम्पलेट का उपयोग करके, आप एक ही प्रकार के दस्तावेज़ों को बार-बार बनाने की मेहनत और समय बचा सकते हैं, और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके सभी दस्तावेज़ एक ही शैली और स्वरूप में हैं।

🧩 आज की पहेली
वैज्ञानिक तो फल कहते हैं, लोग कहें मुझे सब्जी, लाल-लाल हूँ गोल-मटोल, खा कर दूर हो कब्जी?
जवाब: टमाटर
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 10 फ़रवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1921: महात्मा गांधी ने काशी विद्यापीठ का उद्घाटन किया था। यह विश्वविद्यालय भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी में स्थित है। इसे पहले केवल काशी विद्यापीठ के नाम से ही जाना जाता था, लेकिन बाद में इसे भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित किया गया। इस विश्वविद्यालय में स्नातक, परास्नातक एवं अनुसंधान स्तर की शिक्षा उपलब्ध है। देश की प्रतिष्ठित पत्रिका इंडिया टुडे के सर्वे में देशभर में इसे 13वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • 1921: नई दिल्ली में इंडिया गेट ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल की आधारशिला रखी गई।
  • 1931: नई दिल्ली को आधिकारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित किया गया।
  • 2009: प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं भीमसेन जोशी को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।
  • 2015 से आज से हर साल 10 फ़रवरी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के रूप में मनाने की शुरुवात हुई।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक "पं भीमसेन जोशी " के बारे में।

पंडित भीमसेन जोशी भारत के महान शास्त्रीय गायकों में से एक थे, जिन्हें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किराना घराने का सबसे प्रमुख प्रतिनिधि माना जाता है। उनका जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक के गडग में हुआ था। उनकी गायकी की विशेषता गहरी साधना, शक्तिशाली आवाज, लंबी तानों और भावपूर्ण प्रस्तुति में दिखाई देती थी। उन्होंने ख़याल, भजन और अभंग—तीनों ही विधाओं में अद्वितीय पहचान बनाई, जिनमें “जो भजे हरि को सदा” और मराठी अभंग विशेष रूप से लोकप्रिय हुए। भारतीय संगीत के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” 2009 सहित पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। पंडित भीमसेन जोशी ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्वभर में प्रतिष्ठा दिलाई और अपनी अनुपम गायकी से श्रोताओं के हृदय में अमिट स्थान बनाया।

👁️ आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

अभ्युदय वाणी दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 10 फ़रवरी को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस” के बारे में:

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस हर साल 10 फ़रवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य 1 से 19 साल के बच्चों में कृमि संक्रमण को कम करना है। इस दिन स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलाई जाती है। इस दिन को मनाने का मकसद होता है: • बच्चों के समग्र स्वास्थ्य में सुधार करना • बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना • बच्चों की शिक्षा तक पहुंच में सुधार करना • बच्चों की जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना • इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। • यह दिन भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल है। • कुछ राज्यों में कृमि की व्यापकता के आधार पर 10 अगस्त को भी कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। • कृमि मुक्ति से बौनेपन और एनीमिया का खतरा कम होता है। • कृमि मुक्ति से सीखने की क्षमता, संज्ञानात्मक कार्य, और स्कूल में उपस्थिति में सुधार होता है। कृमि संक्रमण एक आम समस्या है जो बच्चों में होती है। कृमि पेट में रहने वाले परजीवी होते हैं जो बच्चों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कृमि संक्रमण के कारण बच्चों में पेट दर्द, दस्त, उल्टी, और थकान हो सकती है। कृमि संक्रमण से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। कृमि संक्रमण से बचाव के लिए कुछ आसान तरीके हैं: • बच्चों को साफ पानी पीने और खाने के लिए दें। • बच्चों को शौचालय का उपयोग करने के बाद और खाने से पहले हाथ धोने के लिए कहें। • बच्चों को नंगे पैर नहीं चलने दें। • बच्चों को कृमि नाशक दवा नियमित रूप से खिलाएं। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस एक महत्वपूर्ण दिन है जो बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। इस दिन सभी बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलाकर उन्हें कृमि संक्रमण से बचाया जाना चाहिए।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “संतोष का गुण”

एक गांव में एक गरीब आदमी रहता था, जिसकी रोज़मर्रा की जिंदगी कठिनाई से गुजर रही थी। एक दिन, उस आदमी के सामने अचानक एक देवी प्रकट हुई और उसे एक वरदान मांगने को कहा। देवी को देखकर वह आदमी सोच में पड़ गया कि किस प्रकार का वरदान मांगे। सबसे पहले उसने सोचा कि रहने के लिए एक घर मांगा जाए, क्योंकि उसके पास अपना घर नहीं था। फिर उसने सोचा कि घर साधारण न होकर बड़ा और सुंदर होना चाहिए। उसने जमींदार बनने की इच्छा की, ताकि गांव के सब लोग उसका सम्मान करें। आगे सोचने पर उसने पाया कि जमींदार भी तहसीलदार के सामने झुकते हैं, जब लगान भरने का समय आता है। उसने तहसीलदार बनने की इच्छा की। कुछ देर बाद, उसकी इच्छाएं और बढ़ गईं और उसने जिलाधीश बनने की सोची, क्योंकि जिलाधीश के सामने तहसीलदार भी कुछ नहीं थे। इस प्रकार, उसकी इच्छाएं बढ़ती चली गईं और वह निर्णय नहीं कर पाया कि आखिरकार उसे देवी से क्या मांगना चाहिए। अंत में, उसने हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा, "देवी, मैं जैसा हूं, वैसा ही रहना चाहता हूं। आत्म-संतोष का गुण ही सबसे बड़ी दौलत है। आप मुझे यही आशीर्वाद दीजिए।" देवी ने उसे आशीर्वाद दे दिया और वह व्यक्ति पहले की तरह प्रसन्नता से अपना जीवन बिताने लगा। यह कहानी यह सिखाती है कि आत्म-संतोष सबसे बड़ी दौलत है और हमें अपनी स्थिति में खुश रहना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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