सुप्रभात बालमित्रों!
9 फ़रवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 9 फ़रवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है –
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में,
जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"शुरुआत करने का तरीका है कि मुँह बंद करें और काम में लगें।"
"The way to get started is to quit talking and begin doing."
यह कथन हमें प्रेरित करता है कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल बातें करने से काम नहीं चलता, हमें वास्तविक कर्म करना होता है।
हमें अपने सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ निश्चय के साथ काम शुरू करना चाहिए, योजनाओं और बहानों में उलझकर समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए। हर छोटा कदम भी हमें हमारे लक्ष्य के करीब ले जाता है।
जब हम काम पर ध्यान देते हैं और निरंतर प्रयास करते हैं, तभी हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं। इसलिए कम बोलें, अधिक करें – यही सफलता की सच्ची चाबी है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: OCCUPATION : ऑक्यूपेशन – जिसका अर्थ होता है काम, पेशा, व्यवसाय या कब्ज़ा।
1⃣ जब इसका अर्थ काम / पेशा / व्यवसाय हो:
"My occupation is teaching."
"मेरा व्यवसाय अध्यापन है।"
2⃣ जब इसका अर्थ कब्ज़ा हो (किसी स्थान पर अधिकार या नियंत्रण):
"He established his occupation on that land."
"उसने उस ज़मीन पर अपना कब्ज़ा कर लिया।"
जंगल में वह पैदा होती, दीमक लग जाए मैदा होती।
जवाब : लकड़ी
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 9 फ़रवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1895: वॉलीबॉल खेल का आविष्कार हुआ। इसे विलियम जी. मॉर्गन ने बनाया था। इस खेल में दो टीमें नेट के विपरीत दिशा में खेलती हैं और गेंद को नेट के ऊपर से विरोधी टीम के कोर्ट में गिराने का प्रयास करती हैं।
- 1951: स्वतंत्र भारत में पहली जनगणना की शुरुआत हुई। जनगणना किसी देश या क्षेत्र में लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की प्रक्रिया है। भारत में जनगणना हर 10 वर्ष में होती है। आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी।
- 1971: अपोलो 14 मिशन चांद से पृथ्वी पर वापस लौटा। यह अपोलो कार्यक्रम का आठवाँ मिशन था, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चांद पर उतरे और वहाँ से नमूने इकट्ठा किए।
- 2010: भारत सरकार ने महिको द्वारा विकसित आनुवंशिक रूप से संशोधित बीटी बैंगन के व्यावसायिक उत्पादन पर रोक लगा दी।
- 2008: महान समाजसेवी, मानवतावादी और पर्यावरणविद् बाबा आमटे का 94 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के चंद्रपुर ज़िले के वड़ोरा स्थित निवास पर निधन हुआ।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “बाबा आमटे” के बारे में।
बाबा आमटे एक महान समाजसेवी, मानवतावादी और पर्यावरणविद् थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, वंचितों और कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका जन्म 26 दिसंबर 1914 को महाराष्ट्र के हिंगणघाट में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनका असली नाम मुरलीधर देवीदास आमटे था, लेकिन सब उन्हें प्यार से “बाबा” कहकर पुकारते थे।
उन्होंने कानून की पढ़ाई की और कुछ समय तक वकालत भी की, लेकिन समाज में पीड़ित और वंचित लोगों की दुर्दशा ने उनका हृदय बदल दिया और उन्होंने अपना जीवन उनकी सेवा में समर्पित करने का निर्णय लिया।
बाबा आमटे ने कुष्ठ रोगियों के लिए अनेक आश्रम और पुनर्वास केंद्र स्थापित किए। उनका सबसे प्रसिद्ध प्रकल्प है “आनंदवन”, जहाँ कुष्ठ रोगियों को चिकित्सा, सम्मान और स्वावलंबन का अवसर मिलता है। यहाँ उन्हें विभिन्न कौशल व व्यवसाय सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया जाता है।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और “नर्मदा बचाओ आंदोलन” में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूक किया।
बाबा आमटे को उनकी समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के लिए पद्मश्री, रमन मैग्सेसे पुरस्कार, और गांधी शांति पुरस्कार जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची मानवता वही है जो निर्बल, पीड़ित और वंचित लोगों की सहायता करे और समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे।
अभ्युदय वाणी दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 9 फ़रवरी को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय पिज़्ज़ा दिवस” के बारे में।
हर साल 9 फ़रवरी को राष्ट्रीय पिज़्ज़ा दिवस मनाया जाता है। यह दिन पिज़्ज़ा प्रेमियों के लिए एक खास अवसर होता है, ताकि वे अपने पसंदीदा पिज़्ज़ा का आनंद ले सकें।
पिज़्ज़ा दुनिया के सबसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में से एक है। इसके अलग-अलग प्रकार, आटे के बेस, सॉस और टॉपिंग्स इसे और भी खास और स्वादिष्ट बनाते हैं।
प्राचीन काल में रोम, मिस्र और ग्रीस के लोग विभिन्न टॉपिंग्स के साथ फ्लैटब्रेड खाते थे। इन्हें पिज़्ज़ा का प्रारंभिक रूप माना जा सकता है।
आधुनिक पिज़्ज़ा का जन्म इटली के नेपल्स शहर में हुआ। 18वीं और 19वीं शताब्दी में वहाँ के गरीब और कामकाजी लोग जल्दी बनने वाले सस्ते भोजन की तलाश में थे। इसी दौरान पिज़्ज़ा लोकप्रिय हुआ – जो स्वादिष्ट भी था और किफायती भी।
आज पिज़्ज़ा दुनिया भर में पसंद किया जाता है और यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी का प्रिय भोजन बन चुका है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: समझदार ऊँट।
एक अरब और उसका ऊँट तपते रेगिस्तान में यात्रा कर रहे थे। आराम करने के लिए वे रुके। अरब ने तंबू लगाया, उसमें बैठकर भोजन किया और फिर ऊँट पर सवार होकर आगे बढ़ने की तैयारी करने लगा। बेचारा ऊँट धूप में ही खड़ा रहा।
रात गहराने लगी तो ठंड बढ़ने लगी। अरब के दाँत ठंड से किटकिटाने लगे। उसने ऊँट को रोका, उसकी पीठ से तंबू उतारा और रेत पर लगा कर खुद भीतर घुस गया।
ऊँट तैयार बैठा था। उसने कहा, "मालिक, मुझे भी ठंड लग रही है, क्या मैं भी अंदर आ सकता हूँ?" अरब ने सोचा कि यह परेशान करेगा, पर बोला, "ठीक है, तुम अपना सिर तंबू के अंदर कर लो।"
थोड़ी देर बाद ऊँट बोला, "मालिक, मज़ा आ गया, अगर आप बुरा न मानें तो अपनी अगली टाँगें भी अंदर कर लूँ?" अरब ने अपने पैर थोड़ा सिकोड़ लिए और ऊँट ने गर्दन व अगली टाँगें भीतर कर लीं।
कुछ समय बाद ऊँट फिर कराहने लगा, "मालिक, मेरा आधा शरीर अंदर है और आधा बाहर। ऐसे तो मैं बीमार हो जाऊँगा, अगर मैं बीमार हुआ तो आपकी यात्रा भी रुक जाएगी।"
अरब सोच में पड़ गया। ऊँट बोला, "अगर आप चाहें तो मैं पूरा अंदर आ जाऊँ, पर इस तंबू में दो की जगह नहीं है। बेहतर होगा कि आप बाहर चले जाएँ, मैं अंदर लेट जाता हूँ।"
यह कहकर ऊँट पूरा तंबू घेरकर अंदर लेट गया और बेचारे अरब को सारी रात बाहर ठंड में गुज़ारनी पड़ी। इस तरह समझदार ऊँट ने अपना बदला चुका लिया।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय आने पर वे भी हमें उसी प्रकार का जवाब दे सकते हैं। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना और सहानुभूति रखना बहुत ज़रूरी है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ – रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







