सुप्रभात बालमित्रों!
11 फ़रवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 11 फ़रवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है –
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में,
जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे,
और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"When love and skill work together, expect a masterpiece."
"जब प्रेम और कौशल एक साथ काम करते हैं तो एक उत्कृष्ट कृति की उम्मीद रखें।"
यह कथन बताता है कि जब किसी काम को प्रेम और कौशल के साथ किया जाता है, तो वह एक उत्कृष्ट कृति बन जाता है। किसी भी काम में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल कौशल ही पर्याप्त नहीं होता, उस काम के प्रति प्रेम और समर्पण भी आवश्यक है।
जब हम किसी काम को प्रेम से करते हैं, तो हम उसमें अपना पूरा ध्यान और प्रयास लगाते हैं। इससे हमारे काम की गुणवत्ता में सुधार होता है और वह अधिक सुंदर व प्रभावशाली बनता है।
इसलिए, हमें अपने काम को केवल “काम” समझकर नहीं, बल्कि प्रेम और लगन से करने की आदत डालनी चाहिए। तभी हम अपने कार्य में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकते हैं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: PACIFIC : पैसिफिक – जिसका अर्थ होता है शांति लाने वाला।
पृथ्वी के सबसे बड़े और सबसे गहरे महासागर का नाम भी Pacific Ocean – प्रशांत महासागर है।
"Pacific" शब्द का उपयोग उन व्यक्तियों के लिए भी किया जा सकता है जो शांत, मिलनसार और विवादों को हल करने वाले स्वभाव के हों।
उदाहरण:
"He has a pacific nature and always avoids fights."
"उसका स्वभाव बहुत शांतिप्रिय है और वह हमेशा झगड़ों से बचता है।"
अभी-अभी तो नहा के आया, फिर से कहती नहाने को।
जवाब : गर्मी
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 11 फ़रवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1847: आज ही महान आविष्कारक और व्यवसायी सर थॉमस अल्वा एडिसन का अमेरिका के ओहायो में जन्म हुआ। उन्होंने बल्ब, फोनोग्राफ और मोशन पिक्चर कैमरा समेत 1,000 से भी ज़्यादा आविष्कार किए।
- 1917: प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक, निर्देशक और निर्माता सिडनी शेल्डन का जन्म हुआ। उन्होंने ‘द अदर साइड ऑफ मिडनाइट’, ‘रेज ऑफ एंजेल्स’ और ‘मास्टर ऑफ द गेम’ जैसे कई बेस्टसेलिंग उपन्यास लिखे।
- 1990: दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद विरोधी नेता नेल्सन मंडेला को 27 साल की कैद के बाद रिहा किया गया। उनकी रिहाई को रंगभेद के अंत की शुरुआत माना गया।
- 1968: भारतीय जनसंघ के नेता, प्रसिद्ध विचारक, दार्शनिक और लेखक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मुगलसराय (वर्तमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हुई।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "पं. दीनदयाल उपाध्याय" के बारे में।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय राजनीतिज्ञ, दार्शनिक और भारतीय जनसंघ (वर्तमान भारतीय जनता पार्टी) के सह-संस्थापक थे। वे एक प्रख्यात विचारक, लेखक और पत्रकार भी थे।
उनका जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा में हुआ। उन्होंने आगरा के सेंट जॉन्स कॉलेज से स्नातक और कानपुर के सनातन धर्म कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की।
1937 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल हुए और 1951 में जनसंघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे संगठनात्मक क्षमता, सरल जीवन और ऊँचे आदर्शों के लिए जाने जाते थे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय “एकात्म मानववाद” के प्रणेता थे, जो भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर आधारित एक राष्ट्रवादी विचारधारा है। यह विचारधारा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र – तीनों के समन्वित विकास पर ज़ोर देती है।
11 फ़रवरी 1968 को मुगलसराय (अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) पर रहस्यमय परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। भारतीय राजनीति और समाज को नई दिशा देने वाले उनके विचार आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
उनके योगदानों के लिए उन्हें 2016 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। हर साल 11 फ़रवरी को उनकी पुण्यतिथि पर समर्पण दिवस मनाया जाता है।
अभ्युदय वाणी दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 11 फ़रवरी को मनाये जाने वाले “विज्ञान में महिलाओं और लड़कियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस” के बारे में।
यह दिवस हर साल 11 फ़रवरी को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों के अद्वितीय योगदान को सम्मान देना और उन्हें प्रोत्साहित करना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2015 में इस दिवस को मनाने की घोषणा की, और पहली बार यह दिवस 11 फ़रवरी 2016 को मनाया गया।
दुनिया भर में इस दिन विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जैसे:
- सम्मेलन और कार्यशालाएँ
- विज्ञान मेले और प्रदर्शनियाँ
- पुरस्कार और सम्मान समारोह
- स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विशेष प्रेरक कार्यक्रम
इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि वे भी वैज्ञानिक, इंजीनियर, शोधकर्ता और नवाचारी बन सकें।
यह दिवस लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है और यह संदेश देता है कि विज्ञान और तकनीक का क्षेत्र केवल पुरुषों के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं और लड़कियों के लिए भी समान रूप से खुला है।
यह दिन उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि वे भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाकर दुनिया के भविष्य को बेहतर बना सकती हैं।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: स्वार्थी फाख्ता और शिकारी।
किसी घने जंगल में एक चतुर शिकारी रहता था, जिसे पशु-पक्षियों को पकड़ने की कला में महारथ हासिल थी। एक दिन उसने पेड़ों के बीच जाल बिछाया और उस पर चावल के दाने बिखेर दिए।
कुछ देर बाद एक सुंदर फाख्ता वहाँ आ पहुँची। उसने सोचा – बिना मेहनत के भोजन मिल जाएगा – और लालच में आकर दाने चुगने लगी और जाल में फँस गई।
जब उसने उड़ने की कोशिश की, तो महसूस हुआ कि वह बुरी तरह फँस चुकी है। तभी उसने देखा कि शिकारी उसकी ओर बढ़ रहा है। उसका दिल डर से धड़कने लगा।
शिकारी ने उसे जाल से निकालकर हाथ में लिया। फाख्ता बोली, "ओ शिकारी! मैं एक निर्दोष पक्षी हूँ, किसी को नुकसान नहीं पहुँचाती, कृपया मुझे छोड़ दो।"
शिकारी कुछ सोच ही रहा था कि फाख्ता ने कहा, "अगर आप मुझे छोड़ देंगे, तो मैं सैकड़ों फाख्ता बुलाकर आपके जाल में फँसा दूँगी। आपको बहुत सारे पक्षी मिल जाएँगे।"
यह सुनते ही शिकारी गुस्से से भर उठा। उसने कहा, "जो अपनी जान बचाने के लिए अपने ही सगे-संबंधियों को धोखा देने को तैयार है, वह मेरी दया के लायक नहीं।"
शिकारी ने फाख्ता को घर ले जाकर उसका भोजन बना लिया।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को धोखा देना बहुत गलत है। हमारी सच्ची पहचान हमारे चरित्र और नैतिकता से होती है। कठिन परिस्थिति में भी हमें अपने सिद्धांतों पर कायम रहना चाहिए और किसी की जान या भलाई के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ – रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







