10 December AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

10 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 10 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "यदि आप किसी चीज का सपना देख सकते हैं, तो आप उसे प्राप्त कर सकते हैं।"
"If you can dream it, you can do it."

यह प्रेरणादायक कथन हमें यह सिखाता है कि हमारे सपने और इच्छाएँ हमारे भीतर अपार संभावनाओं का संकेत होते हैं। हमारे सपने हमें हमारे लक्ष्यों की दिशा में प्रेरित करते हैं और हमें उन तक पहुँचने के लिए आवश्यक कदम उठाने का साहस देते हैं। यदि हम किसी चीज की कल्पना कर सकते हैं, तो उसमें निहित संभावनाओं को भी वास्तविकता में बदल सकते हैं। सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक है कि हम अपने कार्यों में निरंतरता बनाए रखें और हर छोटे-बड़े कदम को महत्व दें। इसलिए, यदि आप किसी चीज का सपना देख सकते हैं, तो आप उसे प्राप्त करने के लिए भी सक्षम हैं। आपको केवल अपने सपनों पर विश्वास रखना है और उन्हें पाने के लिए पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ कार्य करना है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Flare: फ्लेयर: भड़कना, तेज़ चमक उठना, अचानक उभर आना। यानी अचानक तेज़ रोशनी, आग या चमक उठना; अचानक गुस्सा या भावना का भड़क उठना या किसी चीज़ का तेज़ी से फैल जाना।

वाक्य प्रयोग: The fire suddenly flared up in the dry forest. सूखे जंगल में आग अचानक भड़क उठी।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  तारों की ओढ़ चुनरिया साँझ ढले वह आ जाती, बच्चों बोलो है वह कौन जो हमें चांद से मिलवाती।
उत्तर : रात
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 10 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1817 – संयुक्त राज्य अमेरिका का दक्षिणी राज्य मिसिसिपी 20वां राज्य के रूप में संघ में शामिल हुआ। यह क्षेत्र मूल रूप से मिसिसिपी टेरिटरी था, जो 1798 में स्थापित हुआ था।
  • 1868 – लंदन में संसद भवन के बाहर दुनिया की पहली ट्रैफिक लाइट स्थापित की गई। रेलवे इंजीनियर जे.पी. नाइट द्वारा डिजाइन की गई यह गैस-चालित सेमाफोर प्रणाली दिन में सिग्नल आर्म्स और रात में लाल-हरी लाइटों से ट्रैफिक को नियंत्रित करती थी, जो घोड़ों से खींची जाने वाली गाड़ियों के युग में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए बनाई गई थी।
  • 1878 – भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल तथा स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी राजाजी का तमिलनाडु में जन्म हुआ। वे महात्मा गांधी के निकट सहयोगी, स्वतंत्रता पार्टी के संस्थापक तथा भारत रत्न प्राप्तकर्ता थे, जिन्होंने मद्रास प्रेसिडेंसी के मुख्यमंत्री के रूप में हिंदी शिक्षा को अनिवार्य करने जैसे सुधार किए।
  • 1896 – नोबेल पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का संडे स्वीडन में निधन हुआ। डायनामाइट के आविष्कारक नोबेल ने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति से विज्ञान, साहित्य, शांति तथा अर्थशास्त्र में योगदान के लिए पुरस्कार स्थापित करने का प्रावधान किया, जो प्रतिवर्ष उनके निधन की तिथि पर स्टॉकहोम में प्रदान किए जाते हैं।
  • 1901 – स्टॉकहोम स्वीडन में प्रथम नोबेल पुरस्कार समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें नोबेल की 1895 की वसीयत के अनुसार पाँच श्रेणियों में विजेताओं को सम्मानित किया गया।
  • 1903 – फ्रांसीसी वैज्ञानिक दंपति पियरे क्यूरी और मैरी क्यूरी को रेडियम तथा पोलोनियम की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। मैरी क्यूरी पहली महिला विजेता बनीं तथा बाद में 1911 में रसायन विज्ञान का नोबेल भी जीतकर एकमात्र व्यक्ति बनीं जिन्हें दो नोबेल प्राप्त हुए।
  • 1948 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पेरिस में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा UDHR को अपनाया, जो सभी व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों जैसे स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा के लिए पहला वैश्विक दस्तावेज है। इस घोषणा के दो वर्ष बाद 1950 में ही 10 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस घोषित किया गया।
  • 1963 – पूर्वी अफ्रीकी द्वीप राष्ट्र जंजीबार ने ब्रिटेन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त की तथा राष्ट्रमंडल का सदस्य बना। हालांकि जनवरी 1964 में क्रांति के बाद यह गणराज्य बना तथा अप्रैल 1964 में तांगानिका के साथ मिलकर तंजानिया का निर्माण हुआ।
  • 1998 – भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को स्टॉकहोम में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। कल्याण अर्थशास्त्र, भुखमरी तथा सामाजिक न्याय पर उनके कार्यों के लिए यह सम्मान मिला, जो भारत को पहला नोबेल अर्थशास्त्री बनाया तथा वैश्विक विकास नीतियों को प्रभावित किया।
  • 1999 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आतंकवाद के वित्तपोषण को दबाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को अपनाया। इस समझौते ने आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने को आर्थिक अपराध घोषित किया तथा देशों को सहयोग करने का दायित्व सौंपा, जो 2002 से प्रभावी है तथा 188 देशों द्वारा अनुमोदित है।
  • 2001 – भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार कुमुदलाल गांगुली का मुंबई में 90 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया। 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय करने वाले 'दादामोनी' ने किस्मत, राकी तथा आशीर्वाद जैसी क्लासिक फिल्मों से हिंदी सिनेमा को नया आयाम दिया तथा दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे महान वैज्ञानिक “अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल” के बारे में।

अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल एक महान वैज्ञानिक, आविष्कारक और दानवीर थे। उनका जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्वीडन में हुआ था। वे मुख्यतः डायनामाइट के आविष्कारक के रूप में प्रसिद्ध हैं। नोबेल ने अपने जीवन में 350 से अधिक आविष्कार किए, परंतु डायनामाइट के दुरुपयोग और उससे होने वाली हिंसा ने उन्हें बहुत परेशान किया। एक बार एक अख़बार ने गलती से उनकी मौत की झूठी खबर छाप दी। उसमें उन्हें “मौत का सौदागर” कहा गया, क्योंकि दुनिया डायनामाइट से होने वाले विनाश के लिए उन्हें दोषी मानने लगी थी। जीवित रहते हुए अपने बारे में यह कठोर टिप्पणी पढ़कर नोबेल अंदर तक हिल गए। इसी घटना ने उनके मन में गहरा पश्चाताप जगाया। उन्होंने तय किया कि उनकी पहचान विनाश से नहीं बल्कि मानवता की सेवा से होनी चाहिए। इसी सोच के कारण नोबेल ने अपनी सारी संपत्ति का बड़ा हिस्सा नोबेल पुरस्कार की स्थापना के लिए समर्पित कर दिया। आज हर वर्ष विज्ञान, साहित्य, चिकित्सा, शांति तथा अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान करने वाले लोगों को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया जाता है। अल्फ्रेड नोबेल का जीवन सिखाता है कि व्यक्ति अपनी गलतियों को समझकर दुनिया के लिए अच्छाई का मार्ग चुन सकता है।

👁️ आज का दैनिक विशेष – अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 10 दिसंबर को मनाये जाने वाले “अन्तरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस” के बारे में:

अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस हर वर्ष 10 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर के लोगों को यह याद दिलाता है कि हर मनुष्य जन्म से ही बराबर है और उसको सम्मान, स्वतंत्रता तथा सुरक्षा पाने का अधिकार है। वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा UDHR को अपनाया, जो सभी मनुष्यों के मूल अधिकारों को स्पष्ट रूप से बताती है। इसी घोषणा के सम्मान और प्रचार के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रम, रैलियाँ, कार्यशालाएँ और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं ताकि लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी मिले और वे अपने तथा दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना सीखें। मानव अधिकारों में जीवन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता, सुरक्षा तथा सम्मान से जीने का अधिकार शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस हमें यह संदेश देता है कि एक न्यायपूर्ण, सुरक्षित और समान समाज बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। जब हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान होगा, तभी दुनिया में वास्तविक शांति और विकास संभव है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “गलती का एहसास”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “गलती का एहसास”

एक बार एक बादशाह अपने महल में भोजन कर रहे थे। अचानक, खाना परोस रहे बावर्ची के हाथ से थोड़ी सी सब्जी बादशाह के कपड़ों पर छलक गई। बादशाह की त्यौरियां चढ़ गईं और उनका क्रोध बढ़ने लगा। बावर्ची ने यह देखा तो वह घबरा गया, पर फिर उसने कुछ सोचकर प्याले की बची सारी सब्जी भी बादशाह के कपड़ों पर उलट दी। यह देख बादशाह का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बादशाह ने गुस्से में पूछा, "तुमने ऐसा करने का दुस्साहस कैसे किया?" बावर्ची ने अत्यंत शांत भाव से उत्तर दिया, "जहांपनाह! पहले आपका गुस्सा देखकर मैंने समझ लिया था कि मेरी जान अब नहीं बचेगी। फिर मैंने सोचा कि लोग कहेंगे कि बादशाह ने थोड़ी सी गलती पर एक बेगुनाह को मौत की सजा दी। ऐसे में आपकी बदनामी होती। इसलिए मैंने सारी सब्जी ही उड़ेल दी ताकि लोग मुझे ही अपराधी समझें और आपको कोई दोष न दें।" बावर्ची के उत्तर में छुपी समझदारी और साहस को देखकर बादशाह का क्रोध शांत हो गया। उन्हें समझ आया कि सेवक भाव कितना कठिन होता है और उसमें धैर्य और विवेक कितना जरूरी है। बादशाह ने बावर्ची को माफ कर दिया और उसे जीवनदान दिया। इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि किसी गलती की सजा देने से पहले गलती करने वाले का भाव और स्थिति को समझना चाहिए। अगर किसी से अनजाने में गलती हो जाए तो उसे क्षमा करना चाहिए, क्योंकि हर गलती के पीछे कोई न कोई कारण और भावना हो सकती है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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