सुप्रभात बालमित्रों!
9 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 9 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"आप रुक सकते हैं लेकिन समय नहीं रुकता।"
"You may delay, but time will not."
यह उक्ति हमें प्रेरित करती है कि हम समय की अनमोलता को समझें और उसे व्यर्थ न गंवाते हुए अपने कार्यों को पूरी तत्परता और समर्पण के साथ पूरा करें। समय सबसे मूल्यवान संसाधनों में से एक है, जो किसी के नियंत्रण में नहीं होता। समय का पहिया किसी के लिए नहीं रुकता, चाहे हम कितने भी थके हों या हमें कितनी भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो। हर क्षण, जो हमने व्यर्थ गवां दिया, वह वापिस नहीं आता। जितना समय हम बर्बाद करेंगे, उतना ही हम अपनी प्रगति को धीमा करेंगे। इसलिए, समय का सदुपयोग करने के लिए हमें एक ठोस योजना बनानी चाहिए और अपने कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। समय का उचित प्रबंधन ही हमारी सफलता की कुंजी है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: PROGRESS : प्रोग्रेस विकास, प्रगति या उत्कर्ष। यह शब्द व्यक्ति के व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, लक्ष्य प्राप्ति, और समाज के विकास के प्रतीक के रूप में प्रयोग होता है।
वाक्य प्रयोग: Education plays a vital role in the progress of society. शिक्षा समाज की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अखबार
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 9 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1658 – डच ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने भारत के केरल तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह शहर कोल्लम पर कब्जा कर लिया।
- 1873 – ब्रिटिश भारत के वायसराय तथा गवर्नर-जनरल लॉर्ड नॉर्थब्रुक जार्ज बैरिंग ने म्योर सेंट्रल कॉलेज वर्तमान इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिस्सा की आधारशिला रखी, जो भारतीय उच्च शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बना।
- 1917 – प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना के जनरल एडमंड एलनबी के नेतृत्व में ब्रिटिश बलों ने यरुशलम पर कब्जा कर लिया, यह घटना यरुशलम की 400 वर्ष पुरानी ओटोमन अधीनता का अंत थी।
- 1946 – नई दिल्ली के संविधान हॉल वर्तमान संसद भवन का सेंट्रल हॉल में भारत की संविधान सभा की प्रथम बैठक आयोजित हुई, जिसमें डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग के कारण बैठक का बहिष्कार किया तथा अलग संविधान सभा की दावा किया।
- 1971 – बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारतीय सेना ने 'मेघना हेली ब्रिज' नामक ऐतिहासिक हवाई अभियान चलाया, जिसमें भारतीय वायुसेना ने 4/5 गोरखा राइफल्स सहित लगभग 4,000 सैनिकों को मेघना नदी के पार हेलीकॉप्टरों द्वारा उतारा।
- 9 दिसंबर 1979 – विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने आधिकारिक रूप से घोषणा की कि चेचक यानी स्मॉलपॉक्स महामारी को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। यह वैश्विक टीकाकरण अभियान की ऐतिहासिक सफलता थी।
- 2003 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी संधि UNCAC को अपनाने के साथ ही 9 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस घोषित किया, ताकि भ्रष्टाचार के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके तथा वैश्विक स्तर पर इसके खिलाफ संघर्ष को मजबूत किया जाए।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल “लॉर्ड नॉर्थब्रुक” के बारे में।
लॉर्ड नॉर्थब्रुक, जिनका पूरा नाम थॉमस जॉर्ज बैरिंग था, भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल के रूप में 1872 से 1876 ईस्वी तक कार्यरत रहे। उन्होंने लॉर्ड मेयो की हत्या के बाद भारत का शासन संभाला। उनके कार्यकाल को शांतिपूर्ण प्रशासन, शिक्षा के प्रसार और आर्थिक सुधारों के लिए जाना जाता है। उनके शासनकाल में 1873 ईस्वी में इलाहाबाद में म्योर कॉलेज Muir Central College की आधारशिला रखी गई, जो बाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय का एक महत्वपूर्ण अंग बना। लॉर्ड नॉर्थब्रुक ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया और भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने राजस्व व्यवस्था और पुलिस प्रशासन में सुधार किया तथा 1873–74 के अकाल के दौरान राहत कार्यों की व्यवस्था की। विदेश नीति में उन्होंने अफगानिस्तान के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने का प्रयास किया, परंतु इंग्लैंड की सरकार से मतभेद होने पर 1876 में इस्तीफा दे दिया। लॉर्ड नॉर्थब्रुक का शासनकाल भारत के इतिहास में सुधार, शिक्षा और शांति के युग के रूप में याद किया जाता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 9 दिसंबर को मनाये जाने वाले “अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस” के बारे में:
अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस यानी International Anti-Corruption Day हर साल 9 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा United Nations General Assembly द्वारा 2003 में घोषित किया गया था ताकि समाज और शासन से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए जन-जागरूकता फैलाई जा सके। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि भ्रष्टाचार केवल कानून तोड़ने का कार्य नहीं, बल्कि समाज की नैतिकता और विकास के लिए एक बड़ी बाधा है। भ्रष्टाचार के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय व्यवस्था जैसी मूलभूत सेवाएँ प्रभावित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2003 में अपनाए गए “संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी अभिसमय United Nations Convention against Corruption - UNCAC” के माध्यम से देशों को पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। हर वर्ष इस दिवस की एक थीम होती है, जो नागरिकों, सरकारों और संगठनों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध एकजुट होने का संदेश देती है। हमें भी इस दिन यह संकल्प लेना चाहिए कि हम ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाएँ, ताकि एक भ्रष्टाचार-मुक्त समाज का निर्माण हो सके।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “मानवता का प्रतिफल”
एक गरीब व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उनके कपड़े फटे और मैले थे, लेकिन उनकी आंखों में उम्मीद और गर्व था। उन्हें कुर्सी पर बैठते देख, एक वेटर ने उनके सामने दो गिलास साफ ठंडा पानी रख दिया और विनम्रता से पूछा, "आपके लिए क्या लाना है?" उस व्यक्ति ने कहा, "मैंने अपनी बेटी से वादा किया था कि यदि तुम कक्षा दस में जिले में प्रथम आओगी, तो मैं तुम्हें शहर के सबसे बड़े होटल में एक डोसा खिलाऊंगा। इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक डोसा ले आओ।" वेटर ने मुस्कराते हुए पूछा, "आपके लिए क्या लाना है?" उस व्यक्ति ने कहा, "मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।" पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बताकर कहा, "मैं इन दोनों को भर पेट नाश्ता कराना चाहता हूँ। अभी मेरे पास पैसे नहीं हैं, इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलरी से काट लेना।" मालिक ने मुस्कराते हुए कहा, "आज हम होटल की तरफ से इस होनहार बेटी की सफलता की पार्टी देंगे।"
होटलवालों ने एक टेबल को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहकों के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया। मालिक ने उन्हें एक बड़े थैले में तीन डोसे और पूरे मोहल्ले में बांटने के लिए मिठाई उपहार स्वरूप पैक करके दे दी। इतना सम्मान पाकर आंखों में खुशी के आंसू लिए वे अपने घर चले गए। समय बीतता गया और एक दिन वही लड़की I.A.S. की परीक्षा पास कर उसी शहर में कलेक्टर बनकर आई। उसने सबसे पहले उसी होटल में एक सिपाही भेजकर कहलवाया कि कलेक्टर साहिबा नाश्ता करने आएंगी। होटल मालिक ने तुरन्त एक टेबल को अच्छी तरह से सजा दिया। वह लड़की होटल में मुस्कराती हुई अपने माता-पिता के साथ पहुंची। सभी उसके सम्मान में खड़े हो गए। होटल के मालिक ने उन्हें गुलदस्ता भेंट किया और ऑर्डर के लिए निवेदन किया।
उस लड़की ने खड़े होकर होटल मालिक और उस वेटर के आगे नतमस्तक होकर कहा, "शायद आप दोनों ने मुझे पहचाना नहीं। मैं वही लड़की हूँ जिसके पिता के पास दूसरा डोसा लेने के पैसे नहीं थे और आप दोनों ने मानवता की सच्ची मिसाल पेश करते हुए, मेरे पास होने की खुशी में एक शानदार पार्टी दी थी और मेरे पूरे मोहल्ले के लिए भी मिठाई पैक करके दी थी।" "आज मैं आप दोनों की बदौलत ही कलेक्टर बनी हूँ। आप दोनों का एहसान मैं सदैव याद रखूंगी। आज यह पार्टी मेरी तरफ से है और उपस्थित सभी ग्राहकों एवं पूरे होटल स्टाफ का बिल मैं दूंगी। कल आप दोनों को 'श्रेष्ठ नागरिक' का सम्मान एक नागरिक मंच पर किया जाएगा।" इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मानवता, कृतज्ञता और छोटे-छोटे नेक कार्य भी किसी के जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं, जिससे समाज में सकारात्मकता का संचार होता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







