7 August AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

7 अगस्त – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 7 अगस्त है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: “प्रत्येक कलाकार एक दिन नौसिखिया ही होता है।”
"Every artist was first an amateur."

इस कथन का अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में कितना ही महान कलाकार क्यों न बन जाए, उसने शुरुआत हमेशा एक नौसिखिए के रूप में ही की होती है। हर कलाकार ने अपने जीवन में वह समय देखा है जब उसे सीखना, समझना और अभ्यास करना पड़ा।

यह विचार हमें सिखाता है कि कला एक यात्रा है, कोई गंतव्य नहीं। हमें अपनी रचनात्मकता को विकसित करना चाहिए, अपनी गलतियों से सीखना चाहिए और निरंतर अभ्यास करना चाहिए। चाहे आप एक पेशेवर कलाकार हों या केवल शौकिया, यह याद रखना आवश्यक है कि हर विशेषज्ञ कभी नौसिखिया ही था।

यह कथन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने आप पर विश्वास रखें और लगातार प्रयास करते रहें। क्योंकि मेहनत और धैर्य से ही साधारण शौकिया कलाकार एक दिन महान कलाकार बनता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: DEAF : डेफ : बहरा, बधिर या ध्यान न देने वाला

वाक्य प्रयोग : He is deaf, so he communicates using sign language. वह बहरा है, इसलिए वह इशारों की भाषा से संवाद करता है।

🧩 आज की पहेली
वह क्या है जो धोने के बाद गंदा हो जाता है।
उत्तर - पानी
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1753 – ब्रिटिश संग्रहालय की स्थापना संसद के एक अधिनियम के तहत की गई।
  • 1871 – प्रख्यात भारतीय कलाकार और साहित्यकार अवनींद्रनाथ ठाकुर का जन्म कोलकाता में हुआ।
  • 1905 – आज ही के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बंग-भंग के विरोध में ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया। यह स्वदेशी आंदोलन का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ आर्थिक और राजनीतिक विरोध करना था। इस घटना को चिन्हित करने के लिए हर साल 7 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है।
  • 1925 – आज ही प्रसिद्ध भारतीय कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन का जन्म हुआ। उन्हें भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है, जिसने देश की कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि की। उनके योगदान ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में मदद की।
  • 1941 – महान भारतीय लेखक, कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ ठाकुर का निधन हुआ। उन्होंने साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रचनाएँ आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं और भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं।
  • 1944 – आज ही 51 फीट लंबाई, 8 फीट ऊंचाई और पांच टन के वजन वाले पहले इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटर का निर्माण हुआ, जिसका नाम ENIAC - Electronic Numerical Integrator and Computer था। ENIAC ने गणना की गति और सटीकता में क्रांति ला दी और आधुनिक कंप्यूटरों के विकास की नींव रखी।
  • 1959 – अमेरिकी उपग्रह एक्सप्लोरर 6 को प्रक्षेपित किया गया, जिसने पृथ्वी की पहली उपग्रह तस्वीरें भेजीं।
  • 1996 – अमेरिकी वैज्ञानिकों ने 13,000 वर्ष पुराने उल्का पिंड के अवशेषों से मंगल ग्रह पर एककोशिकीय जीवों की संभावना का पता लगाया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – एम. एस. स्वामीनाथन

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “भारतीय कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन” के बारे में।

एम. एस. स्वामीनाथन भारत के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक और हरित क्रांति के जनक के रूप में जाने जाते हैं। उनका जन्म 7 अगस्त 1925 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा कृषि और अनुवांशिकी यानी Genetics में प्राप्त की और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1960 के दशक में भारत भयंकर खाद्यान्न संकट का सामना कर रहा था। उस समय डॉ. स्वामीनाथन ने उच्च उत्पादन देने वाली गेहूँ और धान की किस्मों के विकास और प्रसार में अहम भूमिका निभाई। उनकी इस पहल से भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की और देश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई।

कृषि अनुसंधान और ग्रामीण विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि और किसानों की भलाई पर भी विशेष ध्यान दिया।

डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन का जीवन और कार्य भारत के किसानों और कृषि विज्ञान के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके प्रयासों से भारत ने भुखमरी और खाद्यान्न आयात की स्थिति से निकलकर खाद्यान्न निर्यातक देश बनने तक का सफर तय किया।

🎉 आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय हथकरघा दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 7 अगस्त को मनाये जाने वाले “xxx” के बारे में: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस” के बारे में:

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस भारत में हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन भारत की समृद्ध हस्तकला परंपरा और हथकरघा उद्योग के योगदान को याद करने और मनाने के लिए समर्पित है। यह दिन 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाता है, जब भारतीयों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का फैसला किया था। इस दिवस का उद्देश्य हस्तकला को बढ़ावा देना और हथकरघा कारीगरों को सम्मान देना है। हथकरघा भारत की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह दिवस इस विरासत को प्रदर्शित करने का एक अवसर है। हथकरघा उद्योग लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

इस दिन देश भर में हस्तकला प्रदर्शनी और मेले आयोजित किए जाते हैं जहां कारीगर अपने उत्पाद प्रदर्शित करते हैं और हथकरघा कपड़ों से बने फैशन शो आयोजित किए जाते हैं तथा और हस्तकला कारीगरों को सम्मानित किया जाता है। इस दिन हथकरघा उद्योग से जुड़े मुद्दों पर सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं। सरकार हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाती है। हथकरघा से कई तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं, जैसे कि: साड़ियां, दुपट्टे, सूट, शॉल, बेडशीट, पर्दे आदि। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी संस्कृति कितनी समृद्ध है और हमारे कारीगर कितने प्रतिभाशाली हैं। आइए हम सभी मिलकर हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने में अपना योगदान दें।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – राजा और जुआरी

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: राजा और जुआरी

एक समय की बात है। एक राजा अपने महल के बगीचे में टहल रहा था। तभी उसने देखा कि एक अजनबी आदमी महल के दरवाजे पर खड़ा है। राजा ने दरवान से कहा, "देखो, यह आदमी यहाँ क्यों खड़ा है?"

दरवान ने जाकर दरवाजा खोला। उसने देखा कि आदमी के हाथ में एक मोटी और ताज़ा मुर्गी है। दरवान ने पूछा, "तुम यहाँ क्यों आए हो?" आदमी बोला, "मैं राजा को यह मुर्गी भेंट करने आया हूँ।"

दरवान उसे राजा के पास ले गया। आदमी ने कहा, "राजा जी, राजा जी! मैंने यह मुर्गी आपके नाम पर जुए में जीती है। इसलिए इसे आपको भेंट करने आया हूँ।" राजा हँसकर बोला, "ठीक है, इसे मेरे मुर्गीखाने में रख दो।" आदमी मुर्गी देकर चला गया।

कुछ दिनों बाद वह आदमी फिर आया। इस बार उसके पास एक बकरी थी। उसने कहा, "राजा जी, राजा जी! इस बार मैंने आपके नाम पर यह बकरी दाँव पर लगाई और जीत गया। इसलिए इसे आपको देने आया हूँ।" राजा खुश होकर बोला, "इसे मेरे बकरियों के झुंड में मिला दो।" आदमी बकरी देकर चला गया।

कुछ हफ्तों बाद वही आदमी फिर महल के दरवाजे पर दिखाई दिया। इस बार उसके साथ दो और आदमी भी थे। दरवान ने राजा को खबर दी और राजा ने उसे बुला लिया।

राजा ने हँसते हुए पूछा, "इस बार क्या लेकर आए हो? और ये दोनों कौन हैं?" आदमी बोला, "राजा जी, राजा जी! इस बार मैंने आपके नाम पर 500 चाँदी के सिक्के दाँव पर लगाए थे, पर मैं हार गया। अब इन दोनों को 500 चाँदी के सिक्के देने हैं।"

यह सुनकर राजा का चेहरा उतर गया। अब उसे समझ आ गया कि वह आदमी उसे धोखा दे रहा था। लेकिन चूँकि राजा ने पहले उसके उपहार स्वीकार किए थे, इसलिए वह इनकार भी नहीं कर सका। मजबूर होकर राजा ने उन दोनों आदमियों को 500 चाँदी के सिक्के दे दिए।

इसके बाद राजा ने जुआरी से कहा, "आज के बाद तुम मेरे नाम पर कोई दाँव नहीं लगाओगे और न ही मेरे महल के आस-पास दिखाई दोगे।" राजा को उस दिन अपनी लापरवाही की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

यह कहानी हमें सिखाती है कि अजनबियों पर आसानी से भरोसा नहीं करना चाहिए। अक्सर लोग हमें फँसाने के लिए पहले अच्छे उपहार या प्रस्ताव देते हैं। इसलिए किसी से कोई चीज़ लेने या स्वीकार करने से पहले अच्छी तरह सोचें, क्योंकि लालच और असावधानी हमें मुश्किल में डाल सकती है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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