सुप्रभात बालमित्रों!
6 अगस्त – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 6 अगस्त है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में,
जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"आप कभी असफल नहीं होते जब तक कि आप प्रयास करना बंद नहीं करते।"
You never fail until you stop trying.
इस सुविचार का संदेश यह है कि जीवन में असफलता वास्तव में तब आती है जब हम हार मान लेते हैं। अगर कोई काम पहली बार में सफल नहीं होता, तो वह असफलता नहीं बल्कि एक अनुभव है। यह अनुभव हमें अपनी गलतियों से सीखने और दोबारा प्रयास करने का अवसर देता है।
जब तक हम कोशिश करते रहते हैं, तब तक सफलता की संभावना बनी रहती है। हर प्रयास हमें लक्ष्य के और करीब ले जाता है। असली हार तब होती है जब हम प्रयास छोड़ देते हैं और अपने सपनों को त्याग देते हैं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: GLAD : ग्लैड : प्रसन्न, खुश, पुलकित, आनंदित
वाक्य प्रयोग: I am glad to meet you after such a long time. इतने समय बाद आपसे मिलकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ।
उत्तर - मुश्किल
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 6 अगस्त की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1862 – मद्रास उच्च न्यायालय की स्थापना हुई, जो दक्षिण भारत का प्रमुख न्यायिक संस्थान है।
- 1866 – गोपाल कृष्ण गोखले का जन्म हुआ। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता और महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु थे।
- 1906 – चित्तरंजन दास और कांग्रेसी नेताओं ने “वंदेमातरम” समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया, जो स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बना।
- 1920 – लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का निधन हुआ। उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया।
- 1925 – कांग्रेस नेता और शुरुआती भारतीय राजनीतिक हस्ती सर सुरेंद्रनाथ बनर्जी का निधन हुआ।
- 1945 – अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया, जिससे लाखों लोगों की जान गई और द्वितीय विश्व युद्ध की दिशा बदल गई।
- 1959 – प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह का जन्म हुआ।
- 1962 – जमैका को ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली।
- 1964 – अमेरिका में विश्व के सबसे प्राचीन वृक्ष ‘प्रोमेथस’ को काटा गया।
- 1986 – भारत की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी हर्षा चावड़ा का जन्म हुआ।
- `2007 – हंगरी के वैज्ञानिकों ने लगभग 80 लाख वर्ष पुराने देवदार के जीवाश्म की खोज की।
- 2012 – नासा का क्यूरियोसिटी रोवर सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर पहुँचा।
- 2014 – प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट प्राण, ‘चाचा चौधरी’ के रचयिता, का निधन हुआ।
- 2019 – पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज का निधन हुआ।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “गोपाल कृष्ण गोखले” के बारे में।
गोपाल कृष्ण गोखले भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और कुशल राजनेता थे। उनका जन्म 6 अगस्त 1866 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के कोटलक गाँव में हुआ था। उन्होंने पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसके बाद सार्वजनिक जीवन में कदम रखा।
गोखले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता बने और उन्हें कांग्रेस की उदारवादी धारा का प्रतिनिधि माना जाता है। वे हिंसक मार्ग की बजाय शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से आज़ादी प्राप्त करने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि भारतीय समाज में शिक्षा, जनजागरण और सामाजिक सुधारों के माध्यम से ही स्थायी स्वतंत्रता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने भारतीय जनता को राजनीतिक अधिकार दिलाने और सामाजिक समानता स्थापित करने के लिए जीवन समर्पित कर दिया।
1905 में उन्होंने सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज सेवा, शिक्षा, जनजागरण और राष्ट्रभक्ति का प्रसार था। गोखले ने भारतीय समाज में व्याप्त अज्ञानता, अस्पृश्यता और अन्य सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध काम किया। वे भारतीय उद्योग और स्वदेशी आंदोलन के समर्थक थे।
महात्मा गांधी ने उन्हें अपना राजनीतिक गुरु माना और उनके विचारों से प्रभावित होकर ही अहिंसक और सत्याग्रही आंदोलन का मार्ग अपनाया। गोपाल कृष्ण गोखले का निधन 19 फरवरी 1915 को हुआ। उनके योगदान ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और वे आज भी भारतीय इतिहास में एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में याद किए जाते हैं।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 1 अगस्त को मनाये जाने वाले “xxx” के बारे में: हिरोशिमा दिवस” के बारे में:
अमेरिका ने 6 अगस्त, 1945 के दिन जापान के हिरोशिमा नगर पर 'लिटिल बॉय' नामक यूरेनियम बम गिराया था। यह मानव इतिहास का सबसे भयानक परमाणु हमला था जिसने लाखों लोगों की जान ली और एक पूरे शहर को तबाह कर दिया। इस बम के प्रभाव से 13 वर्ग कि.मी. में तबाही मच गयी थी। हिरोशिमा की 3.5 लाख की आबादी में से एक लाख चालीस हजार लोग एक झटके में ही मारे गए। ये सब सैनिक नहीं थे। इनमें से अधिकांश साधारण नागरिक, बच्चे, बूढे तथा स्त्रियाँ थीं। इसके बाद भी अनेक वर्षों तक अनगिनत लोग विकिरण के प्रभाव से मरते रहे।
क्यों हुआ यह हमला? अमेरिका चाहता था कि द्वितीय विश्व युद्ध जल्द से जल्द खत्म हो जाए। जिसके लिए अमेरिका का मुख्य उद्देश्य जापान को युद्ध से बिना शर्त आत्मसमर्पण कराना था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अमेरिका यह भी चाहता था कि एशिया में सोवियत संघ का प्रभाव कम हो।
इस दिन हम उन लाखों लोगों को याद करते हैं जिन्होंने इस त्रासदी में अपनी जान गंवा दी थी। हिरोशिमा दिवस हमें यह सिखाता है कि युद्ध कोई समाधान नहीं होता है और हमें शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी त्रासदी कभी दोबारा न हो। हमें शांतिपूर्ण समाधानों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाना चाहिए और परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रयास करना चाहिए।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: समस्या का हल
सेठ घनश्याम दास बहुत बड़ी हवेली में रहता था। उसके तीन लड़के थे। पैसा, नौकर, चाकर, घोडा गाडी तो थी ही, मगर उसे अपने खज़ाने में सबसे अधिक प्यार अपने 17 हाथियों से था। हाथियों की देखरेख का उसे बहुत ख़्याल था। सेठ के मन में हमेशा यही चिंता रहती थी कि उनके जाने के बाद उनके प्यारे हाथियों का क्या होगा।
एक दिन सेठ ने अपने बेटों को बुलाकर कहा, "बेटों, मेरा समय अब कम रह गया है। मैं चाहता हूं कि तुम सब मिलकर मेरे हाथियों की देखभाल करना।" सेठ ने अपनी वसीयत में लिखा कि उसके सबसे बड़े बेटे को आधे हाथी, दूसरे बेटे को एक तिहाई और सबसे छोटे को नौवां हिस्सा मिलेगा।
सेठ के जाने के बाद, तीनों भाई हाथियों को बांटने में उलझ गए। 17 हाथियों को आधे, एक तिहाई और नौवें हिस्से में बांटना बहुत मुश्किल था। वे बहुत परेशान हो गए। तभी एक बुद्धिमान साधु वहां से गुजर रहा था। उन्होंने साधू से अपनी समस्या बताई। साधू मुस्कुराए और बोले, "बेटा, चिंता मत करो। मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूं।"
साधू ने अपने हाथी को उनके हाथियों के साथ खड़ा कर दिया। अब कुल 18 हाथी हो गए। साधू ने सबसे बड़े बेटे को 9 हाथी, दूसरे बेटे को 6 हाथी और सबसे छोटे बेटे को 2 हाथी दे दिए। इस तरह सभी खुश हो गए।
बेटों ने साधू से पूछा, "महाराज, आपने यह कैसे किया?" साधू ने कहा, "बेटों, कभी-कभी समस्या का हल बहुत आसान होता है, बस हमें थोड़ा सोचना होता है।"
यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी-कभी समस्याओं का समाधान बहुत ही आसान होता है, बस हमें थोड़ा सा अलग नजरिए से सोचने की जरूरत होती है। यह कहानी हमें यह भी सिखाती है कि हमें हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए और समस्याओं का समाधान ढूंढने की कोशिश करनी चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







