5 September AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢








S INSIDE THIS BOX ]

आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

5 सितम्बर – शिक्षक दिवस विशेष

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 5 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

🎓 शिक्षक दिवस विशेष

दोस्तों, क्या आपको याद है जब आप पहली बार स्कूल गए थे? उस दिन आपने क्या सीखा था? शायद अल्फाबेट, या फिर गिनती करना? लेकिन असल में, हम स्कूल में सिर्फ पढ़ना-लिखना ही नहीं सीखते। हम जीवन जीने का तरीका, दूसरों के साथ कैसे पेश आना है, ये सब कुछ स्कूल में ही सीखते हैं।

आज शिक्षक दिवस के मौके पर, मैं आप सबके साथ अपनी एक स्वरचित कविता साझा कर रहा हूं। ये कविता उन सभी शिक्षकों को समर्पित है, जिन्होंने हमें जीवन का सच्चा मार्ग दिखाया।

जो जीवन में है महत्वपूर्ण, स्कूल में सिखाया जाता है। हर मंजिल की बुनियाद यहाँ, हर सलीका यहां से आता है। ज्ञान ऊंची मीनारों में नहीं, स्कूल के खेलों में बसता है। बचपन में जो सीखा था, अब तक जीवन में सजता है। सबसे साझा करना सीखो, अच्छाई से हर मेल करो। चोट न पहुँचे कभी किसी को, सच्चाई से हर खेल करो। जो चीज़ जहाँ से ली तुमने, वापस उसे वहीं रख दो। जो नहीं तुम्हारा कभी न लो, खुद अपनी गंदगी साफ करो। जब ग़लती हो माफ़ी मांगो, जितना संभव हो क्षमा करो। हाथ धो कर खाना खाओ, संतुलित जीवन जिया करो। सीखो, सोचो, बनाओ, गाओ, नाचो, खेलो, पढ़ो- लिखो। थककर घर वापस जाओ, तो बिस्तर पर झपकी ले लो। यातायात के नियम निभाओ, हाथ पकड़कर साथ चलो। बिना मतलब कुछ न छुपाओ, कौतूहल से भरे रहो! जो जीवन में है महत्वपूर्ण, वो स्कूल में सिखाया जाता है। हर मंजिल की बुनियाद यहाँ, हर सलीका यहां से आता है।
📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Educator : शिक्षाविद जिसका अर्थ होता है "शिक्षा से जुड़ा हुआ व्यक्ति" जैसे शिक्षक,

वाक्य प्रयोग: A good educator always encourages curiosity in students.
एक अच्छा शिक्षाविद हमेशा विद्यार्थियों की जिज्ञासा को बढ़ावा देता है।

🧩 आज की पहेली
वह कौन सा रूम है जिसमें न तो कोई खिड़की होती है और न ही कोई दरवाज़ा।
उत्तर : मशरूम
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 5 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1882: संयुक्त राज्य अमेरिका में पहला लेबर डे यानी श्रमिक दिवस मनाया गया। न्यूयॉर्क सिटी में 10,000 श्रमिकों ने परेड निकाली, जो श्रमिक आंदोलन की ताकत प्रदर्शित करने के लिए थी।
  • 1888: भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुमनी में हुआ। वे एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद् और भारत रत्न प्राप्तकर्ता थे। 1962 में राष्ट्रपति बनने पर उनके छात्रों ने उनके जन्मदिन को विशेष रूप से मनाने का सुझाव दिया, लेकिन उन्होंने इसे सभी शिक्षकों के सम्मान के लिए शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव दिया। तब से भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
  • 1939: चीन में पहला अफीम युद्ध यानी ओपियम वॉर शुरू हुआ, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद और चीनी प्रतिरोध का प्रतीक था।
  • 1972: म्यूनिख ओलंपिक में ब्लैक सेप्टेम्बर संगठन के फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने इज़रायली एथलीटों पर हमला किया जिसे म्यूनिख नरसंहार कहा गया, इसमें 11 एथलीट मारे गए। यह पहली बार था जब आतंकवादी घटना लाइव टेलीविज़न पर प्रसारित हुई।
  • 1977: नासा ने वॉयेजर 1 अंतरिक्ष यान लॉन्च किया, जो बाहरी सौर मंडल की खोज के लिए था। यह अब सौर मंडल से बाहर सबसे दूर का मानव-निर्मित वस्तु है।
  • 1986: नीरजा भनोट का निधन हुआ, वे भारत की पहली महिला अशोक चक्र विजेता थीं।
  • 1997: विश्व प्रसिद्ध समाज सेविका मदर टेरेसा का निधन हुआ। उन्होंने गरीबों, बीमारों और बेसहारा लोगों की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • 2012: संयुक्त राष्ट्र द्वारा 5 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय दान दिवस (International Day of Charity) के रूप में मनाने की शुरुआत हुई, जो गरीबी उन्मूलन और दान को प्रोत्साहित करने के लिए घोषित किया गया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे भारत के दूसरे राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षक “डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन” के बारे में।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के महान दार्शनिक, शिक्षक और राजनेता थे। उनका जन्म 5 सितम्बर 1888 को तमिलनाडु के तिरुत्तनी नामक स्थान पर हुआ था। वे प्रारंभ से ही मेधावी छात्र थे और उन्होंने दर्शनशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे एक शिक्षक बने और बाद में आचार्य के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में भी अध्यापन कार्य किया।

उनकी पुस्तकें जैसे “The Philosophy of Rabindranath Tagore” और “Indian Philosophy” ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई। उनका मानना था कि भारतीय संस्कृति और दर्शन पूरी दुनिया को सही दिशा दिखा सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के कारण उन्हें भारत सरकार ने 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया।

डॉ. राधाकृष्णन 1952 से 1962 तक भारत के पहले उपराष्ट्रपति और 1962 से 1967 तक भारत के दूसरे राष्ट्रपति रहे। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उन्होंने स्वयं को सबसे पहले शिक्षक ही माना। जब उनके छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने कहा – “मेरे जन्मदिन को यदि आप शिक्षक दिवस के रूप में मनाएँ, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।” तभी से भारत में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा।

उनका जीवन सादगी, विद्वता और शिक्षा के प्रति गहन समर्पण का प्रतीक था। 17 अप्रैल 1975 को उनका निधन हो गया लेकिन उनके विचार और आदर्श शिक्षा जगत के लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं।

🎉 आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय शिक्षक दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 5 सितम्बर को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय शिक्षक दिवस” के बारे में:

शिक्षक दिवस भारत में हर साल 5 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। राधाकृष्णन जी भारतीय संस्कृति के संवाहक थे और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया।

शिक्षक: एक ऐसा शब्द जो जीवन भर हमारे साथ रहता है। एक शिक्षक न केवल हमें ज्ञान देता है बल्कि हमें जीवन जीने का सही मार्ग भी दिखाता है। शिक्षक ही वे होते हैं जो हमें एक अच्छे इंसान बनाने में मदद करते हैं। वे हमारे मार्गदर्शक, हमारे मित्र और हमारे प्रेरणास्रोत होते हैं। वे छात्रों के व्यक्तित्व का विकास करते हैं और उन्हें एक अच्छे नागरिक बनाते हैं।

शिक्षक दिवस का दिन हमें अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर देता है साथ ही छात्रों और शिक्षकों के बीच के आत्मीय संबंध को मजबूत करता है। इस दिन छात्र अपने-अपने तरीके से शिक्षकों को सम्मान देते हैं। जैसे कि कार्ड देना, गिफ्ट देना, या फिर शिक्षकों के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करना। शिक्षक दिवस हमें यह संदेश देता है कि हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए। हमें उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान को अपने जीवन में लागू करना चाहिए।

आइए हम सभी शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर अपने शिक्षकों को सम्मान दें, धन्यवाद दें और उन्हें शुभकामनाएं दें।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – पेंसिल और इरेज़र

एक बार की बात है, एक पेंसिल और एक इरेज़र थे। वे दोनों एक साथ एक पेंसिल बॉक्स में रहते थे। पेंसिल हमेशा कुछ न कुछ लिखता रहता था और इरेज़र उसकी गलतियों को मिटा देता था।

एक दिन पेंसिल ने इरेज़र से कहा, "मुझे क्षमा कर दीजिए। मेरी वजह से आपको दुख हुआ। मैं जब भी कोई गलती करता हूं, आप उसे मिटाने के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं। लेकिन जैसे-जैसे आप मेरी गलतियों को गायब कर देते हैं, आप अपना एक हिस्सा खो देते हैं और हर बार पहले से छोटे होते जाते हैं।"

इरेज़र मुस्कुराया और बोला, "यह सच है, लेकिन मुझे वास्तव में इससे कोई आपत्ति नहीं है। असल में मुझे ऐसा करने के लिए ही बनाया गया था कि जब भी आप कुछ गलत करो तो मैं आपकी मदद करूँ। भले ही मुझे पता है कि एक दिन मैं चला जाऊंगा लेकिन मैं वास्तव में अपने काम से खुश हूं। इसलिए, चिंता करना बंद करो, अगर तुम्हें दुखी देखूंगा तो मुझे खुशी नहीं होगी।"

दोस्तों, क्या आपने कभी गौर किया है कि यह कहानी हमारी जिंदगी से कितनी मिलती-जुलती है? पेंसिल हमारी तरह है जो हमेशा कुछ नया सीखने की कोशिश करता है। और इरेज़र हमारे माता-पिता और शिक्षकों की तरह है जो हमारी गलतियों को सुधारते हैं और हमें सही राह दिखाते हैं।

हमारे माता-पिता और शिक्षक हमेशा हमारे लिए मौजूद रहते हैं, चाहे हम कुछ भी कर लें। वे हमारी गलतियों को माफ करते हैं और हमें फिर से उठने का मौका देते हैं। लेकिन क्या हम कभी उनके बारे में सोचते हैं? क्या हम उन्हें धन्यवाद देते हैं?

शिक्षक दिवस हमें अपने शिक्षकों और माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त करने का एक मौका देता है। आइए हम सभी इस दिन उनके प्रति अपना प्यार और सम्मान व्यक्त करें। आइए हम उनका धन्यवाद करें कि उन्होंने हमें इतना कुछ सिखाया और हमेशा हमारे साथ खड़े रहे।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.