5 March AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

5 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 5 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

“उस व्यक्ति को आलोचना करने का अधिकार है जो सहायता करने की भावना रखता है।”
“He has the right to criticize who has the heart to help.”

इस सुविचार का अर्थ है कि आलोचना करने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को होना चाहिए जो दूसरों की मदद करने की भावना रखता है। आलोचना करने से पहले हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे इरादे सकारात्मक हों और हम दूसरों की बेहतरी चाहते हों।

आलोचना का उद्देश्य किसी की कमियों को उजागर करना नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने में मदद करना होना चाहिए। यदि हम किसी की आलोचना कर रहे हैं, तो हमारा उद्देश्य उसे नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाने में सहायता करना होना चाहिए। हमें आलोचना करने से पहले अपने इरादों को जाँचना चाहिए। यदि हमारा उद्देश्य सहायता और सुधार है, तो हमारी आलोचना सकारात्मक और प्रभावी होगी, अन्यथा आलोचना नकारात्मक और विनाशकारी हो सकती है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: ACUTE (एक्यूट) : अत्यधिक, तीव्र, विकट, पैना
"Acute" शब्द का उपयोग किसी चीज़ की तीव्रता, गंभीरता या तीक्ष्णता को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण : She felt an acute pain in her chest.
उसे सीने में तीव्र दर्द महसूस हुआ।

🧩 आज की पहेली
तुम मेरे भाई हो, पर मैं नहीं। मैं कौन हूँ?

उत्तर – बहन
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 5 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1827: इतालवी वैज्ञानिक एलेसेंड्रो वोल्टा का निधन हुआ। उन्होंने विद्युत बैटरी या वोल्टाइक पाइल का आविष्कार किया था।
  • 1905: भगत सिंह की क्रांतिकारी गतिविधियों में सहयोग करने वाली स्वतंत्रता सेनानी सुशीला दीदी का पंजाब में जन्म हुआ।
  • 1931: महात्मा गांधी और तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड इरविन के बीच लंदन में एक अहम समझौता हुआ, जिसे इरविन पैक्ट कहा जाता है। यह समझौता सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हुआ था और इसका उद्देश्य भारत में राजनीतिक तनाव को कम करना था। इस समझौते के अनुसार हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाएगा, भारतीयों को समुद्र किनारे नमक बनाने का अधिकार दिया जाएगा, भारतीय शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों के सामने धरना दे सकते हैं, आंदोलन के दौरान त्यागपत्र देने वालों को उनके पदों पर पुनः बहाल किया जाएगा और जब्त संपत्ति वापस की जाएगी।
  • 1982: रूसी उपग्रह वेनेरा 14 शुक्र ग्रह की कक्षा में पहुंचा। यह अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह की सतह पर उतरने के बाद वहाँ की आवाज़ों को रिकॉर्ड करने वाला पहला अंतरिक्ष यान था।
  • 2010: इसरो द्वारा विकसित तीन टन की भार वहन क्षमता वाले साउंडिंग रॉकेट का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सफल परीक्षण हुआ।
🌟 प्रेरक व्यक्तित्व – सुशीला दीदी

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “सुशीला दीदी” के बारे में।

सुशीला दीदी का जन्म 5 मार्च 1905 को पंजाब के दत्तोचूहड़ (अब पाकिस्तान) में हुआ। उनके पिता डॉक्टर करमचंद अंग्रेजों की सेना में मेडिकल अफसर थे, लेकिन विश्वयुद्ध की विभीषिका देखकर उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई “राय साहब” की उपाधि अस्वीकार कर दी। सुशीला ने जालंधर कन्या विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्हें प्राचार्य कुमारी लज्जावती से देशभक्ति की प्रेरणा मिली।

किशोरावस्था में ही सुशीला क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो गईं। उन्होंने लाला लाजपत राय की गिरफ्तारी के विरोध में एक पंजाबी गीत “गया ब्याहन आजादी लाडा भारत दा!” लिखा, जो क्रांतिकारियों का प्रिय गीत बन गया। उनकी मुलाकात दुर्गा भाभी से हुई और दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई।

1926 में देहरादून में हुए हिंदी साहित्य सम्मेलन के दौरान सुशीला की मुलाकात भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा और बलदेव से हुई। काकोरी कांड के क्रांतिकारियों की फांसी की खबर सुनकर वह बेहोश हो गईं। उन्होंने अपनी शादी के लिए रखा गया 10 तोला सोना क्रांतिकारियों के मुकदमे की पैरवी के लिए दान कर दिया।

स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुशीला कलकत्ता चली गईं, जहाँ उन्होंने शिक्षिका की नौकरी की और गुप्त रूप से क्रांतिकारियों की मदद करती रहीं। 1928 में भगत सिंह और दुर्गा भाभी के कलकत्ता आने पर उन्होंने उनका स्वागत किया और ठहरने का इंतजाम किया। असेंबली में बम फेंकने से पहले भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सुशीला दीदी से मुलाकात की।

भगत सिंह को बचाने के लिए सुशीला दीदी ने महात्मा गांधी से मुलाकात की और उनकी फांसी को कारावास में बदलने का प्रस्ताव रखा, लेकिन गांधी ने इसे अस्वीकार कर दिया। 1932 में सुशीला दीदी को क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए गिरफ्तार किया गया, लेकिन छह महीने बाद छोड़ दिया गया। 1933 में उन्होंने क्रांतिकारी साथी श्याम मोहन से विवाह किया।

शादी के बाद उन्होंने दिल्ली में महिला शिल्प विद्यालय की स्थापना की, जहाँ गरीब और असहाय महिलाओं को सहायता मिलती थी। स्वतंत्रता के बाद 13 जनवरी 1963 को सुशीला दीदी ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनका जीवन देशभक्ति, त्याग और साहस की एक अनूठी मिसाल है।

🕊️ दैनिक विशेष – अंतरराष्ट्रीय निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 5 मार्च को मनाये जाने वाले “अंतरराष्ट्रीय निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता दिवस” (International Day for Disarmament and Non-Proliferation Awareness) के बारे में।

यह दिवस दुनिया भर में हथियारों के निरस्त्रीकरण (Disarmament) और उनके प्रसार को रोकने (Non-Proliferation) के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शांति, सुरक्षा और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 7 दिसंबर 2022 को इस दिवस को मनाने का प्रस्ताव पारित करने के बाद 5 मार्च 2023 को पहला अंतरराष्ट्रीय निरस्त्रीकरण और अप्रसार जागरूकता दिवस मनाया गया। यह दिवस हथियारों की होड़, विशेष रूप से परमाणु हथियारों के खतरों को कम करने और वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए समर्पित है।

हथियारों का प्रसार और उनका उपयोग न केवल मानव जीवन के लिए खतरनाक है, बल्कि यह पर्यावरण और आर्थिक संसाधनों को भी नुकसान पहुँचाता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि शांति और सुरक्षा के लिए हथियारों का निरस्त्रीकरण और उनके प्रसार को रोकना आवश्यक है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – दयालु शिकारी की कहानी

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “दयालु शिकारी की कहानी”

एक घना और रहस्यमय जंगल था, जहाँ तरह-तरह के जीव-जंतु रहते थे। एक दिन, एक शिकारी जंगल में शिकार करने निकला। वह बहुत अनुभवी शिकारी था, लेकिन उस दिन उसकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था।

जंगल की गहराई में पहुँचकर उसकी नज़र एक सुंदर हिरनी पर पड़ी। हिरनी बड़ी शांति से एक पेड़ के नीचे बैठी थी। शिकारी ने ध्यान से देखा तो पाया कि हिरनी ने अभी-अभी एक शावक को जन्म दिया था। शावक छोटा और नाजुक था, और हिरनी उसे स्नेह से चाट रही थी।

शिकारी का दिल खुशी से भर गया। उसने सोचा, “आज मुझे बड़ा शिकार मिल गया है।” उसने बंदूक उठाई और हिरनी पर निशाना साधा। गोली चली और हिरनी की टाँग में लगी। शिकारी ने सोचा कि हिरनी डरकर भाग जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हिरनी वहीं बैठी रही, और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

शिकारी को बहुत आश्चर्य हुआ। वह हिरनी के पास गया और देखा कि हिरनी ने अभी-अभी एक शावक को जन्म दिया है। वह अपने बच्चे की रक्षा के लिए वहीं डटी हुई थी, चाहे उसे कितनी भी पीड़ा क्यों न हो। यह देखकर शिकारी का दिल पिघल गया। उसे अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ।

उसने तुरंत हिरनी और शावक को अपने कंधे पर उठाया और नजदीकी अस्पताल ले गया। डॉक्टर ने हिरनी का ऑपरेशन किया और गोली निकाल दी। कुछ दिनों की देखभाल के बाद हिरनी पूरी तरह से ठीक हो गई। शिकारी ने हिरनी और शावक को वापस जंगल में छोड़ दिया।

जाते-जाते हिरनी ने शिकारी की ओर देखा, मानो उसे धन्यवाद दे रही हो। शिकारी ने उस दिन एक बड़ी सीख ली। उसने प्रण किया कि अब वह कभी किसी निर्दोष प्राणी को नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दया और करुणा हमारे जीवन को सार्थक बनाती हैं। कभी-कभी छोटे से पल में हमारे दिल में उठी दया की भावना किसी की जान बचा सकती है। हमें हमेशा प्रकृति और उसके जीवों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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