4 March AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢










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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

4 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 4 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

“खुशी अपने आप नहीं मिलती। यह आपके अपने कर्मों से आती है।”
“Happiness is not something readymade. It comes from your own actions.”

इस वाक्य का अर्थ है कि खुशी कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो बिना किसी प्रयास के स्वतः मिल जाए। यह हमारे अपने कर्मों, विचारों और प्रयासों पर निर्भर करती है। अगर हम सही दिशा में मेहनत करें, सकारात्मक सोचें और अच्छे कर्म करें, तो खुशी स्वतः हमारे जीवन में आ जाती है।

यह हमारे अपने हाथों में है कि हम अपने जीवन को कैसे आकार दें और खुशी को कैसे प्राप्त करें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: Bloom : खिलना, फूल का खिलना या विकसित होना

उदाहरण : बसंत ऋतु में पेड़-पौधों पर फूल खिलने लगते हैं।
In the spring season, flowers start to bloom on trees and plants.

🧩 आज की पहेली
प्रथम नहीं तो गज बन जाऊं, मध्य नहीं तो काज।
लिखने-पढ़ने वालों से कुछ, छिपा ना मेरा राज।

उत्तर – कागज़
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 4 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1837: शिकागो को आधिकारिक तौर पर शहर का दर्जा मिला। यह शहर संयुक्त राज्य अमेरिका में मिशिगन झील के किनारे स्थित है और अपने व्यापार, संस्कृति और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
  • 1882: पूर्वी लंदन में पहली बार बिजली से चलने वाली ट्राम का संचालन हुआ।
  • 1921: असहयोग आंदोलन के दौरान ननकाना साहिब (अब पाकिस्तान) के गुरुद्वारे में शांतिपूर्ण सभा के दौरान अंग्रेज सैनिकों द्वारा गोलीबारी की गई, जिसमें 70 से अधिक लोग मारे गए। इस घटना ने देश में व्यापक आक्रोश पैदा किया।
  • 1921: हिंदी साहित्य के प्रमुख लेखक फणीश्वरनाथ 'रेणु' का जन्म हुआ। वे अपनी आंचलिक रचनाओं, जैसे “मैला आँचल” और “परती परिकथा”, के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • 1939: भारतीय क्रांतिकारी और गदर पार्टी के संस्थापक लाला हरदयाल का निधन फिलाडेल्फिया, संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ।
  • 1961: भारत का पहला विमान वाहक पोत, आईएनएस विक्रांत, भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इसने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🌟 प्रेरक व्यक्तित्व – लाला हरदयाल

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “लाला हरदयाल” के बारे में।

लाला हरदयाल एक प्रमुख भारतीय क्रांतिकारी, विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जन्म 14 अक्टूबर 1884 को दिल्ली में हुआ था। वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे और उन्होंने सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली से स्नातक तथा पंजाब विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।

1905 में उन्हें ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति मिली, लेकिन ब्रिटिश सरकार के प्रति विरोध के कारण उन्होंने अध्ययन छोड़ दिया और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। 1911 में वे अमेरिका चले गए, जहाँ उन्होंने भारतीय प्रवासियों को संगठित किया और 1913 में गदर पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी का उद्देश्य भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र क्रांति को प्रोत्साहित करना था।

उन्होंने “गदर” नामक अखबार भी शुरू किया, जो भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित करता था। ब्रिटिश सरकार ने उनकी गतिविधियों को खतरनाक माना और उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया, जिसके बाद वे 1914 में जर्मनी चले गए, जहाँ से उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दिलाने का प्रयास किया।

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में हरदयाल ने शिक्षण और लेखन पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने दर्शन, इतिहास और राजनीति पर कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें Hints for Self-Culture और The Bodhisattva Doctrine in Buddhist Sanskrit Literature प्रमुख हैं। 4 मार्च 1939 को फिलाडेल्फिया, संयुक्त राज्य अमेरिका में उनकी मृत्यु हो गई।

लाला हरदयाल को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान, विशेष रूप से गदर पार्टी की स्थापना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्रता संग्राम को समर्थन देने के लिए याद किया जाता है। उनका जीवन देशभक्ति, बौद्धिकता और क्रांतिकारी विचारों का एक अनूठा मिश्रण था, जो आज भी प्रेरणादायक है।

🩺 दैनिक विशेष – अंतरराष्ट्रीय एचपीवी जागरूकता दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 4 मार्च को मनाये जाने वाले “अंतरराष्ट्रीय एचपीवी जागरूकता दिवस” (International HPV Awareness Day) के बारे में।

यह दिवस मानव पेपिलोमावायरस (HPV) के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए समर्पित है। HPV एक आम यौन संचारित संक्रमण (STI) है, जो गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (Cervical Cancer), गुदा कैंसर, गले के कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है।

इस दिवस का उद्देश्य HPV के बारे में जागरूकता फैलाना, HPV संक्रमण को रोकने के लिए टीकाकरण (Vaccination) के महत्व को बताना, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की रोकथाम के लिए नियमित स्क्रीनिंग (जैसे पैप टेस्ट) को प्रोत्साहित करना तथा यौन स्वास्थ्य और सुरक्षित यौन व्यवहार के बारे में शिक्षा देना है।

HPV एक बहुत ही आम वायरस है, जो लगभग सभी यौन सक्रिय लोगों को किसी न किसी समय प्रभावित कर सकता है। HPV के 100 से अधिक प्रकार हैं, जिनमें से कुछ उच्च जोखिम वाले होते हैं और कैंसर का कारण बन सकते हैं। HPV वैक्सीन जैसे Gardasil इस संक्रमण को रोकने में बहुत प्रभावी है। यह वैक्सीन सामान्यतः 9 से 26 वर्ष की आयु के लोगों को दी जाती है, और कुछ मामलों में 45 वर्ष तक के लोग भी इसे ले सकते हैं।

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर HPV संक्रमण से जुड़ा सबसे आम कैंसर है, लेकिन यह नियमित स्क्रीनिंग और टीकाकरण से काफी हद तक रोका जा सकता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि जागरूकता, सावधानी और समय पर जांच से हम कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – चुन्नी और मुन्नी

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “चुन्नी और मुन्नी” (हरिवंशराय बच्चन)

मुन्नी और चुन्नी में लाग-डाट रहती है। मुन्नी छह वर्ष की है, चुन्नी पाँच की। दोनों सगी बहनें हैं। जैसी धोती मुन्नी को आये, वैसी ही चुन्नी को। जैसा गहना मुन्नी को बने, वैसा ही चुन्नी को। मुन्नी ‘ब’ में पढ़ती थी, चुन्नी ‘अ’ में। मुन्नी पास हो गयी, चुन्नी फेल।

मुन्नी ने माना था कि मैं पास हो जाऊँगी तो महावीर स्वामी को मिठाई चढ़ाऊँगी। माँ ने उसके लिए मिठाई मँगा दी। चुन्नी ने उदास होकर धीरे से अपनी माँ से पूछा, “अम्मा, क्या जो फेल हो जाता है वह मिठाई नहीं चढ़ाता?” इस भोले प्रश्न से माता का हृदय गदगद हो उठा।

“चढ़ाता क्यों नहीं, बेटी?” माँ ने यह कहकर उसे अपने हृदय से लगा लिया। माता ने चुन्नी के चढ़ाने के लिए भी मिठाई मँगा दी। जिस समय वह मिठाई चढ़ा रही थी, उस समय उसके मुँह पर सन्तोष के चिह्न थे, मुन्नी के मुख पर ईर्ष्या के, माता के मुख पर विनोद के और देवता के मुख पर झेंप के!

इस कहानी में चुन्नी का सवाल और उसकी उदासी यह दर्शाती है कि बच्चों की भावनाएं बहुत संवेदनशील होती हैं। उन्हें यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उनकी तुलना किसी और से की जा रही है। माँ ने चुन्नी की भावनाओं को समझा और उसे भी मिठाई चढ़ाने का मौका दिया, जो यह दर्शाता है कि हर बच्चे को समान महत्व देना चाहिए।

सफलता और असफलता के बावजूद हर बच्चे को समान अवसर और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। देवता के चेहरे पर झेंप के भाव यह दर्शाते हैं कि ईश्वर भी बच्चों की मासूमियत और सच्ची भावनाओं से प्रभावित और प्रसन्न होते हैं।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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