30 September AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢










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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

30 सितम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 30 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "तारीफ और आलोचना दोनों स्वीकार करें, फूल उगाने के लिए सूर्य और बारिश दोनों की जरूरत होती है।
Accept both compliments and criticism, it takes both sun and rain for a flower to grow."

तारीफ हमें प्रेरित करती है, हमारा आत्मविश्वास बढ़ाती है, और हमें आगे बढ़ने की शक्ति देती है। यह हमें यह एहसास दिलाती है कि हम सही रास्ते पर हैं और हमारे प्रयास सार्थक हैं। वहीं आलोचना, यदि रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से की जाए, तो हमें अपनी कमियों को सुधारने और बेहतर बनने का मौका देती है। यह हमें अपनी गलतियों से सीखने और आगे बढ़ने में मदद करती है। याद रखें, तारीफ और आलोचना दोनों ही बहुमूल्य उपहार हैं। यदि आप इन दोनों को स्वीकार करना सीखते हैं, तो आप निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करेंगे।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: CONSENT (कॉन्सेंट) का अर्थ होता है – अनुमति देना, स्वीकृति देना, मर्जी या सहमति। इसका मतलब होता है किसी चीज़ को करने की इच्छा या अनुमति देना, या स्वेच्छा से स्वीकार करना।

वाक्य प्रयोग: She gave her consent for the trip. उसने यात्रा के लिए अपनी अनुमति दी।

🧩 आज की पहेली
परिवार हरा हम भी हरे, एक थैली में तीन - चार भरे। बताओ क्या ?
जवाब- मटर के दाने
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 30 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1882: विश्व का पहला व्यावसायिक जलविद्युत संयंत्र एपलटन, विस्कॉन्सिन में फॉक्स नदी पर शुरू हुआ, जिसने 12.5 किलोवाट बिजली उत्पन्न कर विद्युत क्रांति की नींव रखी।
  • 1938: म्यूनिख समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने चेकोस्लोवाकिया के सुडेटेनलैंड क्षेत्र को जर्मनी को सौंपकर द्वितीय विश्व युद्ध रोकने का असफल प्रयास किया।
  • 1947: भारत का राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रदर्शित हुआ, जो देश की वैश्विक पहचान का प्रतीक बना।
  • 1947: पाकिस्तान और यमन को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता प्राप्त हुई, जिससे दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता मिली।
  • 1966: बोत्सवाना ने यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता हासिल की, और सर सेरेत्से खामा इसके पहले राष्ट्रपति बने, जिसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • 1993: महाराष्ट्र के लातूर-उस्मानाबाद में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें लगभग 10,000 लोग मारे गए और लाखों बेघर हुए, जो भारत की प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं में से एक था।
  • 2003: विश्वनाथन आनंद ने फ्रांस में विश्व रैपिड शतरंज चैंपियनशिप जीतकर व्लादिमीर क्रैमनिक को हराया, जिससे भारत में शतरंज की लोकप्रियता बढ़ी।
  • 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अयोध्या की विवादित जमीन को राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड तीन हिस्सों में बाँटा। यह फैसला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना।
  • 2013: कनाडा में ऑरेंज शर्ट डे की शुरुआत हुई, जो फिलिस वेबस्टैड की रेज़िडेंशियल स्कूल की कहानी से प्रेरित है और स्वदेशी बच्चों के साथ हुए अन्याय को याद करते हुए "हर बच्चा महत्वपूर्ण है" का संदेश देता है।
🧡 प्रेरक व्यक्तित्व – फिलिस वेबस्टैड

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “30 सितम्बर को मनाये जाने वाले ऑरेंज शर्ट डे की प्रेरणा: फिलिस वेबस्टैड” के बारे में।

फिलिस वेबस्टैड एक स्वदेशी महिला हैं, जिनकी बचपन की घटना ने पूरे कनाडा और दुनिया को झकझोर दिया। जब वे केवल छह वर्ष की थीं, तो उन्हें रेज़िडेंशियल स्कूल भेजा गया। उनकी दादी ने उनके लिए नए स्कूल के पहले दिन पहनने हेतु एक सुंदर नारंगी यानी ऑरेंज रंग की शर्ट खरीदी थी। लेकिन स्कूल पहुँचते ही उनकी शर्ट उनसे छीन ली गई और उन्हें पहनने नहीं दी गई। यह घटना केवल एक कपड़े छिन जाने की नहीं थी, बल्कि स्वदेशी बच्चों से उनकी पहचान, भाषा और संस्कृति छीनने की प्रक्रिया का प्रतीक थी।

2013 में, फिलिस ने इस दर्दनाक अनुभव से प्रेरित होकर 30 सितंबर को ऑरेंज शर्ट डे शुरू किया, जिसका नारा "हर बच्चा महत्वपूर्ण है" है। उनकी पुस्तक "द ओरेंज शर्ट स्टोरी" और प्रयासों ने स्वदेशी अधिकारों के लिए वैश्विक जागरूकता फैलाई। यह दिन हर साल 30 सितम्बर को मनाया जाता है जो भविष्य की पीढ़ियों को इतिहास से सीखने और समावेशी समाज बनाने की प्रेरणा देता है। ताकि समाज रेज़िडेंशियल स्कूलों के पीड़ित बच्चों को याद करे और यह स्वीकार करे कि “हर बच्चा महत्वपूर्ण है”।

🌐 आज का दैनिक विशेष – अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 30 सितम्बर को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस” के बारे में:

हर साल 30 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस (International Translation Day) मनाया जाता है। यह दिन अनुवादक पेशे के महत्व को मान्यता देने और उन्हें सम्मानित करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। अनुवादक भाषा, संस्कृति और विचारों के बीच पुल का काम करते हैं। उनके प्रयासों से अलग-अलग भाषाओं और देशों के लोग एक-दूसरे की सोच, ज्ञान और साहित्य से जुड़ पाते हैं।

इस दिन का संबंध सेंट जेरोम (St. Jerome) से है, जिन्होंने बाइबल का अनुवाद किया और अनुवादक पेशे को विश्वभर में महत्वपूर्ण बनाया। अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस का उद्देश्य अनुवादक पेशे के महत्व को उजागर करना, उनकी चुनौतियों और योगदान के बारे में जागरूकता फैलाना और भाषाओं के बीच संवाद को बढ़ावा देना है। अनुवादक न केवल भाषाओं का अनुवाद करते हैं, बल्कि विचारों और संस्कृति का सेतु भी बनते हैं। उनका कार्य ज्ञान और समझ को दुनिया भर में फैलाने में अहम भूमिका निभाता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “सड़क की पिटाई”

रोहित और मोहित, दो भाई, गर्मी की दोपहर में स्कूल से घर की ओर से लौट रहे थे। दोनों बातें करते हुए इतने मस्त थे कि ध्यान ही नहीं रहा और अचानक रोहित का पैर एक उबड़-खाबड़ पत्थर से टकराया। जोर की चोट के साथ वो ज़मीन पर गिर पड़ा।

उसके घुटने से खून निकल रहा था और तेज दर्द से रोहित जोर-जोर से रोने लगा। पीछे आ रहा मोहित दौड़ कर अपने छोटे भाई के पास पहुंचा और उसे सहारा दिया। मोहित थोड़ा बड़ा था और रोहित की तुलना में ज्यादा समझदार। मोहित ने रोहित को दिलासा दिया, "रो मत रोहित, जरा सब्र कर। थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा।" मगर रोहित मानने वाला नहीं था। वो गुस्से और दर्द से चीख रहा था। मोहित समझ गया कि सिर्फ समझाने से काम नहीं चलेगा। उसे कुछ करना होगा।

इसी बीच, मोहित की नजर सड़क पर पड़े उस उबड़-खाबड़ पत्थर पर गई जिसने रोहित को गिराया था। गुस्से में आकर मोहित ने उस पत्थर पर जोर से चार-पांच लातें मारीं। "इसने तुझे चोट पहुंचाई थी ना, अब मैंने इसे सबक सिखा दिया!"

रोहित को मोहित की हरकत थोड़ी अजीब लगी। उसने अपने बड़े भाई को इस तरह गुस्से में कभी नहीं देखा था। मगर फिर भी उसे अच्छा लगा कि मोहित ने उसका बदला लिया। उसने भी सड़क पर पड़े छोटे-मोटे पत्थरों पर लातें मारना शुरू कर दिया। उनके साथ पास ही खेल रहे कुछ और बच्चे भी वहीं आ जुटे। देखते ही देखते सड़क पर लातें मारना एक खेल बन गया। कुछ देर तक ये सब चलता रहा, फिर धीरे-धीरे सब अपने-अपने घरों की ओर चले गए।

घर पहुंचते ही मोहित ने रोहित के घुटने को साफ पानी से धोया और फिर डिटॉल लगाकर उसकी चोट का इलाज किया। मां को सारी कहानी बताई। मां ने दोनों भाइयों को समझाया कि गुस्से में आकर सड़क पर लात मारना ठीक नहीं था। सड़क तो बेजान है, उसे कुछ महसूस नहीं होगा। इससे तो रास्ता और खराब हो जाएगा। गुस्से को ऐसे व्यक्त करने से कोई फायदा नहीं होता।

इस पूरी घटना से रोहित को एक सीख मिली। गुस्से में आकर कुछ भी करने से पहले सोचना चाहिए। उसने ये भी सीखा कि गुस्से को काबू करना ज़रूरी है। वहीं, मोहित ने समझदारी दिखाई और अपने छोटे भाई की मदद की। भाई का प्यार और मां की सीख रोहित के दिल में बस गई।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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