1 October AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

1 अक्टूबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 1 अक्टूबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: दूसरों का सम्मान करना हमारे संस्कार की बात है।
To respect others is a matter of our sacrament.

बचपन से ही हमें यह सिखाया जाता है कि हमें अपने बड़ों, शिक्षकों, माता-पिता और सभी व्यक्तियों का सम्मान करना चाहिए। जब हम दूसरों का सम्मान करते हैं, तो हम उनकी भावनाओं, विचारों और अधिकारों को मान्यता देते हैं। यह हमें सहानुभूति और समझदारी के साथ व्यवहार करने की प्रेरणा देता है। दूसरों का सम्मान करना हमारे संस्कार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए, हमें हमेशा यह याद रखना चाहिए कि दूसरों का सम्मान करना हमारे संस्कार की बात है और इसे हमें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: RESPECT (रेस्पेक्ट) :– सम्मान करना, आदर करना, मान देना। यह शब्द किसी व्यक्ति, विचार, भावना, नियम या संस्कृति को महत्व देने और आदरपूर्वक व्यवहार करने के लिए प्रयोग होता है।

वाक्य प्रयोग: We should always respect our parents and teachers. हमें हमेशा अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए।

🧩 आज की पहेली
उस पक्षी का नाम बताइए जिसका मतलब अंग्रेजी में ज्यादा होता है ?
जवाब- मोर (More = ज्यादा)
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 1 अक्टूबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1847: प्रसिद्ध ब्रिटिश समाज सुधारक, लेखिका, वक्ता और स्वतंत्रता सेनानी डॉ एनी बेसेन्ट का जन्म लंदन में हुआ।
  • 1854 में आज से भारत में डाक टिकट का प्रचलन शुरू हुआ, टिकट पर महारानी विक्टोरिया का सिर और "India" लिखा था। इसकी कीमत आधा आना 1/32 रुपये थी।
  • 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद ब्रिटिश सरकार ने हन्टर समिति की स्थापना की। इस समिति का उद्देश्य इस घटना की जांच करना और इसके पीछे के कारणों का पता लगाना था।
  • 1960: नाइजीरिया ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त की, जो अफ्रीका के सबसे बड़े देशों में से एक है।
  • 1 अक्टूबर 1967 को भारतीय पर्यटन विकास निगम (ITDC) की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य भारत में पर्यटन को बढ़ावा देना और पर्यटन से संबंधित सुविधाओं का विकास करना था।
  • 1971: फ्लोरिडा में वॉल्ट डिज्नी वर्ल्ड रिसॉर्ट खुला, जो आज दुनिया का सबसे बड़ा थीम पार्क कॉम्प्लेक्स है।
  • 1 अक्टूबर 1975 को पहली बार जीवन में रक्त के महत्व और आवश्यकता को साझा करने के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन एंड इम्यूनोहेमेटोलॉजी द्वारा राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस मनाया गया।
  • 1978 में, भारत सरकार ने विवाह के लिए लड़कियों की न्यूनतम उम्र 14 से बढ़ाकर 18 वर्ष और लड़कों की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दी। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह को रोकना और युवाओं को शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के लिए अधिक समय देना था।
  • 1 अक्टूबर 1991 को पहली बार वृद्ध व्यक्तियों के अधिकारों और उनकी आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस (International Day of Older Persons) मनाने की शुरुवात हुई।
  • 2015 में इटली के मिलान शहर में International Coffee Organization (ICO) ने आधिकारिक रूप से हर साल 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस मनाना आरंभ किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – डॉ. एनी बेसेन्ट

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी “डॉ. एनी बेसेन्ट” के बारे में।

डॉ. एनी बेसेन्ट एक अग्रणी आध्यात्मिक विचारक, महिला अधिकारों की समर्थक, लेखिका, वक्ता और भारत-प्रेमी महिला थीं। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1847 को लंदन में हुआ था। उन्होंने प्रारंभ में इंग्लैंड में सामाजिक और शैक्षिक सुधारों के लिए कार्य किया, परंतु भारत आने के बाद वे यहाँ की स्वतंत्रता संग्राम और समाज सुधार की गतिविधियों से गहराई से जुड़ गईं।

भारत में उन्होंने थियोसोफिकल सोसाइटी का नेतृत्व किया और बनारस में सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना की, जो आगे चलकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) का आधार बना। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए विशेष योगदान दिया।

सन 1916 में उन्होंने होम रूल आंदोलन शुरू किया और 1917 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। वे जन्म से आयरिश, विवाह से अंग्रेज और भारत को अपनी मातृभूमि मानने के कारण सच्चे अर्थों में भारतीय थीं। लोकमान्य तिलक और महात्मा गांधी जैसे महान नेताओं ने उनके व्यक्तित्व और कार्यों की सराहना की। 20 सितंबर 1933 को उनका निधन हो गया।

डॉ. एनी बेसेन्ट का जीवन समाज सुधार, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।

👵 आज का दैनिक विशेष – अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 1 अक्टूबर को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस” के बारे में:

"अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस" यानी World Senior Citizens Day हर साल 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हमारे वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करना, उनके योगदान को पहचानना और उनकी आवश्यकताओं पर ध्यान देना है। आज के समय में वृद्ध समाज अक्सर उपेक्षित महसूस करता है, भले ही उनके पास जीवन का व्यापक अनुभव हो। उनकी राय को महत्व न देने और उन्हें समाज में निष्प्रयोज्य समझे जाने के कारण वे कुंठा और दुःख का अनुभव करते हैं। इस दिन का महत्व इस बात में है कि हम सभी को यह याद दिलाया जाए कि वृद्ध समाज को सम्मान और समर्थन देना हमारा कर्तव्य है।

विश्व वृद्ध दिवस की शुरुआत 14 दिसंबर 1990 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य वृद्ध व्यक्तियों के प्रति हो रहे दुर्व्यवहार और अन्याय को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना था। पहली बार यह दिवस 1 अक्टूबर 1991 को मनाया गया। इस दिन का महत्व वृद्ध व्यक्तियों के अधिकारों और उनकी आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करना है, ताकि उन्हें समाज में उचित सम्मान और स्थान मिल सके।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “दोस्त का जवाब”

बहुत समय पहले की बात है, दो दोस्त बीहड़ इलाकों से होकर शहर जा रहे थे। गर्मी बहुत अधिक होने के कारण वे बीच-बीच में रुकते और आराम करते। उन्होंने अपने साथ खाने-पीने की भी कुछ चीजें रखी हुई थीं। जब दोपहर में उन्हें भूख लगी तो दोनों ने एक जगह बैठकर खाने का विचार किया।

खाना खाते-खाते दोनों में किसी बात को लेकर बहस छिड़ गई। धीरे-धीरे बात इतनी बढ़ गई कि एक दोस्त ने गुस्से में आकर दूसरे को थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ खाने के बाद भी दूसरा दोस्त चुप रहा और कोई विरोध नहीं किया। उसने बस पेड़ की एक टहनी उठाई और मिट्टी पर लिख दिया, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।”

थोड़ी देर बाद उन्होंने पुनः यात्रा शुरू की। मनमुटाव के कारण वे बिना एक-दूसरे से बात किए आगे बढ़ते जा रहे थे। तभी थप्पड़ खाए दोस्त के चीखने की आवाज़ आई। वह गलती से दलदल में फँस गया था। दूसरे दोस्त ने तेजी दिखाते हुए उसकी मदद की और उसे दलदल से निकाल दिया। इस बार भी वह दोस्त कुछ नहीं बोला। उसने बस एक नुकीला पत्थर उठाया और एक विशाल पेड़ के तने पर लिखने लगा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई।”

उसे ऐसा करते देख दूसरे मित्र से रहा नहीं गया और उसने पूछा, “जब मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा तो तुमने मिट्टी पर लिखा और जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तो तुम पेड़ के तने पर कुरेद-कुरेद कर लिख रहे हो, ऐसा क्यों?” दोस्त ने कहा, “जब कोई हमें तकलीफ दे तो हमें उसे अंदर तक नहीं बैठाना चाहिए ताकि क्षमा रूपी हवाएं इस मिट्टी की तरह ही उस तकलीफ को हमारे मन से बहा ले जाएं। लेकिन जब कोई हमारे लिए कुछ अच्छा करे तो उसे इतनी गहराई से अपने मन में बसा लेना चाहिए कि कभी भूल ना सकें।”

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों की गलतियों को माफ करना चाहिए और उनकी अच्छाइयों को हमेशा याद रखना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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