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27 अक्टूबर – अभ्युदय वाणी
आज 27 अक्टूबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
कल के लिए सबसे अच्छी तैयारी यही है कि आज अच्छा करें।
Today's good work is the best preparation for tomorrow.
यह कथन हमें यह सिखाता है कि भविष्य की सफलता का आधार आज के हमारे कर्मों में छिपा होता है। यदि हम अपने आज को ईमानदारी, लगन और समर्पण के साथ जिएँ, तो कल अपने आप उज्ज्वल और सफल बन जाएगा।
जो व्यक्ति वर्तमान को सँवारने में विश्वास रखता है, उसे भविष्य की चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए हमें हर दिन को एक अवसर समझकर अपना श्रेष्ठ कार्य करना चाहिए, क्योंकि आज का अच्छा कर्म ही कल की सफलता की नींव रखता है।
Fond of : "पसंद करना", "प्रेम होना", या "लगाव होना"। यह तब प्रयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी चीज़ या व्यक्ति को बहुत पसंद करता है या उससे लगाव रखता है।
वाक्य प्रयोग: She is fond of reading storybooks.
उसे कहानी की किताबें पढ़ना पसंद है।
उत्तर – उम्र
इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 27 अक्टूबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1811 : आइजैक मेरिट सिंगर का जन्म न्यूयॉर्क में हुआ, जिन्होंने सिलाई मशीन का आविष्कार किया, जो औद्योगिक क्रांति को बढ़ावा देने वाला था। उनकी सिलाई मशीन ने घरेलू और औद्योगिक सिलाई को सरल बनाया।
- 1904 : स्वतंत्रता सेनानी जतिंद्रनाथ दास यानी जतिन दास का जन्म कोलकाता में हुआ, जो क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध थे। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य थे और 1929 में लाहौर जेल में 63 दिनों की भूख हड़ताल के बाद शहीद हुए।
- 1904 : न्यूयॉर्क सिटी सबवे की शुरुआत हुई, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों में से एक है।
- 1920 : भारत के 10वें राष्ट्रपति और पहले दलित राष्ट्रपति के. आर. नारायणन का जन्म त्रावणकोर (वर्तमान केरल) में हुआ। उन्होंने गरीबी से ऊपर उठकर उच्चतम पद प्राप्त किया। वे 1997 से 2002 तक भारत के राष्ट्रपति रहे।
- 1947 : जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की तैनाती हुई। 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची, जिसके बाद पहला भारत-पाक युद्ध शुरू हुआ।
- 1952 : प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल का जन्म हुआ, जो भजनों और फिल्म संगीत के लिए जानी जाती हैं।
- 1958 : मिहिर सेन ब्रिटिश चैनल तैरकर पार करने वाले पहले भारतीय बने।
- 1991 : तुर्कमेनिस्तान ने सोवियत संघ के विघटन के दौरान स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 2021: भारत ने अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जो 5,000 किमी तक मारक क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल है।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “भारत के दसवें राष्ट्रपति के. आर. नारायणन” के बारे में।
भारत के दसवें राष्ट्रपति के. आर. नारायणन का पूरा नाम कोचरिल रमण नारायणन था। उनका जन्म 27 अक्टूबर 1920 को केरल के कायरनाड में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से थे, परंतु मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने ऊँचा स्थान प्राप्त किया।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी शिक्षा प्राप्त की। के. आर. नारायणन ने भारतीय विदेश सेवा (IFS) में कार्य किया और कई देशों में भारत के राजदूत रहे।
1997 में वे भारत के पहले दलित राष्ट्रपति बने। उनके कार्यकाल में उन्होंने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों, समानता और न्याय को प्राथमिकता दी। वे सादगी और ईमानदारी के प्रतीक थे। उनका निधन 9 नवंबर 2005 को हुआ, लेकिन उनके विचार और आदर्श आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
विश्व श्रव्य-दृश्य विरासत दिवस (World Day of Audiovisual Heritage) हर वर्ष 27 अक्टूबर को मनाया जाता है।
यह दिन यूनेस्को (UNESCO) द्वारा 2005 में शुरू किया गया था, ताकि लोगों में फिल्मों, रेडियो, टेलीविजन कार्यक्रमों, रिकॉर्डिंग्स और अन्य श्रव्य-दृश्य सामग्रियों को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके। ये सामग्रियाँ हमारी संस्कृति, इतिहास और पहचान की अमूल्य धरोहर हैं।
आज के डिजिटल युग में बहुत-सी पुरानी फिल्में, ध्वनि रिकॉर्डिंग और वीडियो खराब हो रही हैं या लुप्त हो रही हैं। इस दिन हम यह याद करते हैं कि इन विरासतों को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए कितना महत्वपूर्ण है। कई संग्रहालय, पुस्तकालय और मीडिया संस्थान इस अवसर पर विशेष प्रदर्शनियाँ, फिल्म स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
यह दिवस हमें सिखाता है कि श्रव्य-दृश्य माध्यम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास के साक्षी भी हैं। इन्हें सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी अपने अतीत से जुड़ी रह सकें।
कछुआ और चिड़िया
एक बार की बात है, एक घना जंगल था। वहाँ एक बड़े पेड़ के नीचे एक कछुआ रहता था। उसी पेड़ की ऊँची डाल पर एक चिड़िया ने अपना छोटा-सा घोंसला बनाया था।
एक दिन कछुआ ऊपर देखकर बोला, "अरे चिड़िया! तुम्हारा घर तो बड़ा जर्जर और टूटा-फूटा लगता है... मुझे तो अपने खोल पर गर्व है — मज़बूत, सुरक्षित और हमेशा मेरे साथ।" चिड़िया मुस्कुराई और बोली, "हाँ कछुआ भाई, मेरा घोंसला शायद उतना सुंदर या मजबूत नहीं है, पर यह मेरे अपने परिश्रम से बना है..."
चिड़िया ने धीरे से जवाब दिया, "शायद तुम्हारा घर बाहर से सुंदर और सुरक्षित है, पर वह सिर्फ तुम्हारे लिए है। उसमें न दोस्त हैं, न परिवार। मेरा घर भले छोटा और कमजोर हो, लेकिन उसमें प्यार, अपनापन और खुशी है।"
कछुआ कुछ देर चुप रहा। उसे एहसास हुआ कि चिड़िया का घर सच में जीवन और भावनाओं से भरा है, जबकि उसका खोल सिर्फ एक खाली खोल था। चिड़िया ने मुस्कुराकर कहा, "कभी-कभी सादगी में ही सच्चा सुख होता है। बड़ा घर नहीं, भरा हुआ घर मायने रखता है।"
कहानी से सीख: यह कहानी हमें सिखाती है कि “खाली महल से भरी झोपड़ी बेहतर है।” प्यार और साथ से भरा छोटा घर, अकेलेपन से भरे बड़े घर से कहीं सुंदर होता है।
- 1) भारत मे ब्रिटिश राज का संस्थापक कौन था? :- लार्ड रॉबर्ट क्लाइव
- 2) ठोस कार्बन डाइऑक्साइड को क्या कहते हैं? :- शुष्क बर्फ
- 3) पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन आर्मी किस देश में बनी? :- ऑस्ट्रेलिया
- 4) विजय घाट में किसकी समाधि है? :- लाल बहादुर शास्त्री जी की।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







