26 October AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









ES INSIDE THIS BOX ]

आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

26 अक्टूबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 26 अक्टूबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, जन्म से नही ।"
A man is great by deeds not by birth.

यह कथन हमें यह सिखाता है कि किसी व्यक्ति की असली पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि उसके जन्म या परिवार से। महान वह नहीं होता जो किसी उच्च कुल में जन्म लेता है, बल्कि वह होता है जो अपने कर्मों, आचरण और समाज के प्रति योगदान से सम्मान प्राप्त करता है।

जिस व्यक्ति के विचार ऊँचे और कर्म सच्चे होते हैं, वही सच्चे अर्थों में महान कहलाता है। इतिहास में अनेक ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जिन्होंने साधारण परिस्थितियों में जन्म लेकर अपने परिश्रम और कर्मों के बल पर असाधारण ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं। यह विचार हमें प्रेरित करता है कि हमें अपने जन्म पर नहीं, बल्कि अपने कर्मों पर गर्व करना चाहिए, क्योंकि व्यक्ति के कर्म ही उसकी असली पहचान होते हैं।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Valuable : वैलुएबल : मूल्यवान, कीमती

वाक्य प्रयोग: → Time is the most valuable thing in life.
समय जीवन की सबसे मूल्यवान वस्तु है।

🧩 आज की पहेली
तारों के संग आता है, तारों के संग जाता है,
बुद्धि जिसकी दुर्बल हो, इसकी पदवी पाता है।।
जवाब : उल्लू
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 26 अक्टूबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1825 : अमेरिका में एरी नहर का उद्घाटन हुआ, जो न्यूयॉर्क शहर को ग्रेट लेक्स से जोड़ने वाली एक प्रमुख जलमार्ग थी। यह औद्योगिक क्रांति के लिए महत्वपूर्ण थी।
  • 1863 : इंग्लैंड में फुटबॉल एसोसिएशन की स्थापना हुई, जो आधुनिक फुटबॉल के नियमों को मानकीकृत करने वाली पहली संस्था थी। फुटबॉल एसोसिएशन ने आधुनिक फुटबॉल के नियमों को व्यवस्थित किया, जिसे "लंदन नियम" के रूप में जाना गया।
  • 1890 : प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म हुआ। जिन्होंने 'प्रताप' समाचार पत्र का संपादन किया।
  • 1934 : महात्मा गांधी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय ग्रामीण उद्योग संघ (All India Village Industries Association) की स्थापना की।
  • 1947 : महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बना। यह निर्णय पाकिस्तानी कबायली हमले के जवाब में लिया गया था। यह दिन अब 'एक्सेशन डे' के रूप में मनाया जाता है।
  • 1962: भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत में पहली बार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी। जो 1968 तक लागू रहा।
  • 1984 : अमेरिका में 'बेबी फे' नामक शिशु को बबून का हृदय प्रत्यारोपित किया गया, जो पहला क्रॉस-स्पीशीज अंग प्रत्यारोपण था। शिशु 20 दिन जीवित रही, लेकिन यह चिकित्सा इतिहास में मील का पत्थर था।
  • 1999: भारत के उच्चतम न्यायालय ने आजीवन कारावास की अवधि 14 वर्ष तय की।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “गणेशशंकर विद्यार्थी” के बारे में।

गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के अतरसुइया मोहल्ले में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रदूतों में से एक थे जिन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा और संघर्ष का माध्यम बनाया। विद्यार्थी जी ने अंग्रेज़ी शासन की अन्यायपूर्ण नीतियों और समाज में फैले भेदभाव के विरुद्ध अपनी लेखनी को एक शस्त्र के रूप में प्रयोग किया।

उन्होंने ‘प्रताप’ नामक समाचार पत्र की स्थापना की, जो स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज़ बन गया। उनकी कलम ने न केवल अंग्रेज़ी सरकार को चुनौती दी, बल्कि सामाजिक बुराइयों—जैसे जातिवाद, धार्मिक कट्टरता और सामाजिक असमानता—पर भी प्रहार किया।

गणेश शंकर विद्यार्थी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी, और भगत सिंह जैसे नेताओं के विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में जागृति फैलाने का कार्य किया। वे हमेशा सत्य, न्याय और मानवता के पक्षधर रहे। 1931 में कानपुर में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान उन्होंने हिंसा रोकने और निर्दोष लोगों की जान बचाने का प्रयास करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। गणेश शंकर विद्यार्थी आज भी भारतीय पत्रकारिता के आदर्श और निडरता के प्रतीक माने जाते हैं।

👁️ आज का दैनिक विशेष – जम्मू और कश्मीर विलय दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 26 अक्टूबर को मनाये जाने वाले “जम्मू और कश्मीर विलय दिवस” के बारे में:

जम्मू और कश्मीर विलय दिवस हर वर्ष 26 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक माना जाता है, क्योंकि इसी दिन 1947 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरी सिंह ने भारत के साथ “विलय पत्र” (Instrument of Accession) पर हस्ताक्षर किए थे। इस दस्तावेज़ के माध्यम से जम्मू और कश्मीर औपचारिक रूप से भारतीय संघ का हिस्सा बना। यह निर्णय देश की एकता और अखंडता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।

विलय से पहले जम्मू-कश्मीर एक रियासत था, जो स्वतंत्र रहने की कोशिश कर रहा था। लेकिन अक्टूबर 1947 में पाकिस्तानी कबायलियों के आक्रमण के बाद महाराजा हरी सिंह ने भारत से सहायता मांगी। भारत सरकार ने मदद के लिए यह शर्त रखी कि राज्य को भारत में सम्मिलित होना होगा। इसके पश्चात महाराजा ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, और भारतीय सेना ने आक्रमणकारियों को पीछे हटाया।

आज के दिन को “Accession Day” के रूप में मनाया जाता है, विशेषकर जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र में। यह दिन भारत की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। यह हमें यह संदेश देता है कि जम्मू और कश्मीर केवल भारत का अभिन्न अंग ही नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, विविधता और वीरता का गौरवशाली प्रतीक भी है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “सोने का अंडा”

एक बार की बात है, एक गाँव में एक गरीब किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था। उसके पास एक मुर्गी थी, जो हर सुबह एक सोने का अंडा देती थी। किसान और उसकी पत्नी बहुत खुश थे क्योंकि उस अंडे को बेचकर उन्हें अपने जीवन-यापन के लिए पर्याप्त धन मिल जाता था। धीरे-धीरे उनका जीवन सुखमय हो गया।

लेकिन कुछ समय बाद किसान लालच में आ गया। उसने सोचा, “अगर यह मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती है, तो इसके पेट में जरूर बहुत सारे सोने के अंडे होंगे। क्यों न मैं इसे एक बार में ही मारकर सारे अंडे निकाल लूँ और तुरंत अमीर बन जाऊँ?” उसकी पत्नी भी इस विचार से सहमत हो गई।

अगले ही दिन, दोनों ने मिलकर मुर्गी को मार डाला। लेकिन जब उन्होंने उसका पेट फाड़ा, तो अंदर ना तो एक भी सोने का अंडा था, बल्कि केवल मांस और खून मिला। अब उनके पास ना मुर्गी बची, ना सोने के अंडे।

किसान और उसकी पत्नी अपनी मूर्खता और लालच पर पछताने लगे, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच का परिणाम हमेशा विनाशकारी होता है, इसलिए हमें हर काम सोच-समझकर और धैर्य से करना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.