सुप्रभात बालमित्रों!
26 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 26 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"अपनी दृष्टि बदलें और आपकी दृष्टि आपको बदल देर्गा।"
"Change your vision and your vision will change you."
इस कथन से हमें यह सीख मिलती है कि हमारे जीवन में बदलाव की शुरुआत हमेशा हमारे विचारों और दृष्टिकोण से होती है। मनुष्य का जीवन जैसा वह सोचता और देखता है, वैसा ही बनता चला जाता है। यदि हम परिस्थितियों को नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, तो जीवन कठिन प्रतीत होता है, लेकिन जब हम उन्हीं परिस्थितियों को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करते हैं, तो वही जीवन सरल और संभावनाओं से भरा नजर आने लगता है। हमारी दृष्टि ही हमारे जीवन की दिशा निर्धारित करती है। जब हम अपनी सोच को रचनात्मक, आशावादी और प्रेरणादायक बना लेते हैं, तो हमारा व्यवहार, आदतें और व्यक्तित्व सबकुछ बदलना शुरू हो जाता है। इस प्रकार, दृष्टिकोण में परिवर्तन केवल सोच का बदलाव नहीं, बल्कि आत्म-परिवर्तन की शुरुआत होता है। इसलिए, यदि हम जीवन में सफलता, शांति और खुशहाली चाहते हैं, तो सबसे पहले हमें अपनी दृष्टि को सकारात्मक और स्पष्ट बनाना होगा।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Reflection: प्रतिविम्ब", या "चिंतन" प्रतिविम्ब का अर्थ होता है किसी वस्तु की छवि का दर्पण, पानी या चमकदार सतह पर दिखाई देना। और "चिंतन" का अर्थ होता है अपने विचारों, कार्यों या अनुभवों पर शांत होकर सोचने की प्रक्रिया।
वाक्य प्रयोग: I saw my reflection in the clear water of the lake. मैंने झील के साफ पानी में अपना प्रतिविम्ब देखा।
उत्तर : जीवन
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 26 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1917: 26 नवम्बर को मॉन्ट्रियल, कनाडा में नेशनल हॉकी लीग NHL की आधिकारिक स्थापना हुई, जो आज विश्व की सबसे प्रसिद्ध और सबसे मूल्यवान प्रोफेशनल आइस हॉकी लीग है।
- 1919: 26 नवम्बर को बिहार के बेगूसराय जिले में भारत के महान मार्क्सवादी इतिहासकार राम शरण शर्मा का जन्म हुआ, जो प्राचीन भारत के विशेषज्ञ थे, ‘इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस’ के अध्यक्ष रहे, ‘फ्यूडलिज्म इन इंडिया’ जैसी कालजयी कृतियों के रचयिता थे तथा जिन्हें 1975 में जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप और 1988 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
- 1921: केरल के कोझिकोड में ‘भारत की श्वेत क्रांति के पिता’ डॉ. वर्गीज कुरियन का जन्म हुआ, उन्होंने ऑपरेशन फ्लड के माध्यम से भारत को दूध उत्पादन में विश्व का सबसे अगृणी देश बनाया, अमूल को विश्व का सबसे बड़ा डेयरी ब्रांड बनाया तथा इसी कारण हर साल 26 नवम्बर को ‘राष्ट्रीय दुग्ध दिवस’ मनाया जाता है।
- 1949: 26 नवम्बर को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से अंगीकृत Adopt किया, जिसमें संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद, संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. आंबेडकर सहित कुल 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए; संविधान बनाने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन लगे तथा यह 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू हुआ, जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।
- 2012: 26 नवम्बर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) की औपचारिक घोषणा की और पार्टी का आधिकारिक लॉन्च किया, जिसके बाद यह मात्र 3 वर्ष में दिल्ली में सत्ता में आई और आज देश की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों में से एक है।
- 2015: 26 नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ के रूप में आधिकारिक रूप से मनाने की घोषणा की, और इसी दिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उपस्थिति में संसद भवन में पहला संविधान दिवस धूमधाम से मनाया गया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे श्वेत क्रांति के पिता कहे जाने वाले “डॉ. वर्गीज़ कुरियन” के बारे में।
डॉ. वर्गीज़ कुरियन, जिन्हें ‘भारत की श्वेत क्रांति के पिता’ कहा जाता है, भारतीय दुग्ध उद्योग को सुदृढ़ बनाने और देश को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाने वाले महान व्यक्तित्व थे। उनका जन्म 26 नवंबर 1921 को केरल में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय गुजरात के आनंद शहर में बिताया, जहाँ से उन्होंने अमूल जैसी विश्व प्रसिद्ध डेयरी सहकारी संस्था की स्थापना कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। डॉ. कुरियन ने 1970 में ‘ऑपरेशन फ्लड’ की शुरुआत की, जो विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध विकास अभियान था। इस अभियान के माध्यम से लाखों किसानों, खासकर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का अवसर मिला। उनकी दूरदर्शिता और अथक प्रयासों ने भारत को दूध के आयातक देश से निर्यातक देश में बदल दिया। वे न केवल एक उत्कृष्ट प्रबंधनकर्ता थे, बल्कि ग्रामीण विकास, सहकारिता और तकनीक के समन्वय के प्रतीक भी थे। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। डॉ. कुरियन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, नवाचार और जनहित की भावना से किसी भी क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 26 नवम्बर को मनाये जाने वाले “संविधान दिवस” के बारे में:
भारत में प्रत्येक वर्ष 26 नवम्बर को संविधान दिवस मनाया जाता है, जिसे हम डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान निर्माताओं के अद्भुत योगदान को स्मरण करने के लिए मनाते हैं। भारत का संविधा 26 नवम्बर 1949 को तैयार होकर संविधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया और राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस महान दस्तावेज़ को तैयार करने में संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लिया। संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपने अद्वितीय नेतृत्व, विधिक ज्ञान और दूरदर्शिता के बल पर इस संविधान को रूप दिया, इसी कारण उन्हें ‘भारतीय संविधान के शिल्पकार’ कहा जाता है। हालाँकि संविधान को 26 नवम्बर 1949 को स्वीकार कर लिया गया था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 से देश में लागू किया गया, और भारत एक संपूर्ण गणराज्य बना। संविधान एक कानूनी दस्तावेज़ है जो भारत के नागरिकों को मौलिक अधिकार, कर्तव्य, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देता है। यह सरकार की शक्तियों को भी सीमित करता है और जनता को सर्वोच्च स्थान प्रदान करता है। भारत सरकार ने डॉ. आंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर 2015 में पहली बार 26 नवम्बर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इससे पहले यह दिन “राष्ट्रीय कानून दिवस” के रूप में जाना जाता था। संविधान दिवस का उद्देश्य देश के नागरिकों में संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उसके आदर्शों को जीवन में अपनाना और डॉ. आंबेडकर के विचारों तथा समतामूलक समाज की परिकल्पना को सम्मान देना है। संविधान दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी पालन करें और संविधान द्वारा स्थापित लोक कल्याणकारी मूल्यों की रक्षा करें।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “समर्पण की शक्ति”
घने जंगल की शांत दोपहर में एक गाय घास चरती हुई अपने विचारों में खोई थी, तभी अचानक झाड़ियों के पीछे से शेर की गर्जना गूँजी। उसके कदम थम गए। उसने सिर घुमाकर देखा — शेर उसी की ओर तेज गति से दौड़ा चला आ रहा था। दिल की धड़कनों को थामते हुए वह पूरी ताकत से भागने लगी। शेर हर पल करीब आता जा रहा था, जैसे किसी भी क्षण उसका पंजा उसकी गर्दन पर आ गड़ेगा। थकी हारी, हताश गाय को अचानक सामने एक कीचड़ से भरा उथला तालाब दिखाई दिया। उसने सोचा — "यही आखिरी उम्मीद है!" — और बिना देर किए उसमें छलांग लगा दी। पीछे-पीछे शेर भी कूद पड़ा।
पर तालाब वैसा नहीं था जैसा उसने सोचा था। पानी कम था, नीचे चिपचिपी दलदल थी। कुछ ही क्षणों में दोनों कीचड़ में गर्दन तक धँस गए। अब न शेर हमला कर सकता था, न गाय भाग सकती थी। बस कीचड़ में जकड़े हुए, कुछ दूरी पर एक-दूसरे को घूर रहे थे। शेर गुस्से में गरजा — "भाग कितनी भी ले, अंत में तेरी हड्डियाँ मेरे दाँतों तले ही टूटेंगी!" पर जितना वह छटपटाता, उतना ही कीचड़ उसे और जकड़ लेता।
गाय शांत थी। उसने हल्की मुस्कान के साथ पूछा — "क्या तुम्हारा कोई मालिक है?" शेर ने तिरस्कार से कहा — "मैं जंगल का राजा हूँ! मैं खुद ही अपना मालिक हूँ!" गाय ने धीरे और विनम्रता से कहा — "राजा हो तुम, पर आज तुम्हारी ताकत भी तुम्हें नहीं बचा पा रही।" शेर ने पलटकर कहा — "और तुम? तुम भी तो यहीं मरोगी!" गाय ने शांत भाव से उत्तर दिया — "हो सकता है मैं खुद को न बचा सकूँ... लेकिन मेरा मालिक ज़रूर आएगा। जब सूरज डूबेगा और वह मुझे घर पर नहीं पाएगा, तो वह मुझे खोजने निकलेगा। और जब वह मुझे ढूँढ लेगा, तो चाहे जैसी हालत हो — वह मुझे बचाकर ले जाएगा।" शेर मौन हो गया। उसकी आँखों में पहली बार असहायता झलक उठी।
सूरज ढलने लगा। आसमान में हल्की लालिमा घुल गई। तभी जंगल के रास्ते पर गाय का मालिक आया। उसने कीचड़ में फँसी गाय को देखा, तुरंत साथी बुलाए, रस्सियाँ लाई गईं, मेहनत की गई — और गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। शेर असहाय दृष्टि से बस देखता रह गया, क्योंकि उसका “अहंकार” उसे बचाने नहीं आया।
यह कहानी हमे सिखाती है कि सच्चा समर्पण कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। ताकतवर वही नहीं जो खुद पर गर्व करे, बल्कि वह जो किसी बड़े सहारे में विश्वास रखे। क्योंकि संकट में अहंकार नहीं, विश्वास और संबंध ही सहारा बनते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!






