25 November AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢






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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

25 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 25 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "असीमित उत्साहवान व्यक्ति लगभग प्रत्येक कार्य में सफल होता है।"
"A man can succeed at almost anything for which he has unlimited enthusiasm."

यह कथन हमें यह सिखाता है कि किसी भी कार्य में सफलता पाने के लिए असीमित उत्साह और दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण गुण हैं। जब हम किसी कार्य के प्रति पूरी लगन और जुनून के साथ जुट जाते हैं, तो हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने से कोई भी रोक नहीं सकता। उत्साह हमें प्रेरित करता है और हमारे अंदर ऊर्जा का संचार करता है। यह हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करने और उनसे निकलने की क्षमता प्रदान करता है। असीमित उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ हम किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। हमें अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने अंदर उत्साह और जुनून को बनाए रखना चाहिए और कभी भी हार नहीं माननी चाहिए, क्योंकि सच्ची सफलता उसी की होती है जो पूरे मन से प्रयास करता है और अपने कार्य के प्रति समर्पित रहता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: PARAMETERS: पैरामीटर्स : मापदंड, माप + दंड यानि, किसी भी कार्य को करने का निश्चित ढांचा या नियम। मापदंड वे निश्चित नियम, सीमाएँ या मानक होते हैं जिनके आधार पर किसी कार्य, परियोजना, प्रक्रिया या अध्ययन को संचालित किया जाता है।

वाक्य प्रयोग: We must define all the parameters before starting the project. हमें परियोजना शुरू करने से पहले सभी मापदंड निर्धारित करने चाहिए।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  खिलाओ तो मैं जीवित रहूंगी पिलाओगे तो मैं मर जाऊंगी मैं कौन हूं ?
उत्तर: आग
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 25 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1936: जर्मनी और जापान के बीच कम्युनिस्ट विरोधी समझौते एंटी-कॉमिन्टर्न पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए, जो कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के खिलाफ एक गठबंधन था तथा बाद में इटली भी इसमें शामिल हो गया।
  • 1949: संविधान सभा की अंतिम बैठक में डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने 25 नवम्बर को ऐतिहासिक समापन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने आर्थिक और सामाजिक असमानता के उन्मूलन को राष्ट्रीय एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बताया तथा अगले दिन 26 नवम्बर को भारतीय संविधान को अंगीकृत किया गया।
  • 1960: डोमिनिकन गणराज्य में तानाशाह राफेल ट्रूजिलो के विरोधी तीन बहनों पात्रिया, मिनERVा और मारिया टेरेसा मीराबल की क्रूर हत्या कर दी गई, जिन्हें मीराबल सिस्टर्स के नाम से जाना जाता है तथा उनके सम्मान में संयुक्त राष्ट्र ने 25 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस घोषित किया।
  • 1975: सूरीनाम को नीदरलैंड से पूर्ण स्वतंत्रता 25 नवम्बर को प्राप्त हुई, जिसके बाद यह दक्षिण अमेरिका का एक संप्रभु राष्ट्र बना तथा इसकी राजधानी पैरामारिबो में उत्सव मनाया गया।
  • 1987: श्रीलंका में भारतीय शांति सेना IPKF के ऑपरेशन पवन के दौरान मेजर रामा स्वामी परमेश्वरन ने LTTE उग्रवादियों के घात से अपनी टुकड़ी को बचाते हुए अदम्य साहस दिखाया तथा दुश्मन से AK-47 छीनकर उसे मार गिराया, लेकिन स्वयं गंभीर रूप से घायल होकर शहीद हो गए; उनकी इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
  • 2014: कथक की महान नृत्यांगना सितारा देवी का 25 नवम्बर को मुंबई में निधन हुआ, जिन्हें रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 16 वर्ष की आयु में 'नृत्य सम्राज्ञी' की उपाधि दी थी तथा जो पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और कालिदास सम्मान से सम्मानित थीं।
  • 2016: क्यूबा के महान क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो का 90 वर्ष की आयु में हवाना में निधन हो गया, जिन्होंने 1959 की क्रांति के बाद क्यूबा को समाजवादी राष्ट्र बनाया तथा अमेरिकी प्रभाव का लगातार विरोध किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे कथक की महान नृत्यांगना  “सितारा देवी” के बारे में।

सितारा देवी भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक की विश्वप्रसिद्ध नृत्यांगना थीं। उनका जन्म 8 नवंबर 1920 को कोलकाता में हुआ था और उनका वास्तविक नाम धनलक्ष्मी था। उनके पिता सुखदेव महाराज कथक नर्तक थे, जिन्होंने समाज की रूढ़िवादिता के बावजूद अपनी बेटियों को कथक सिखाया। सितारा देवी ने कम उम्र में ही अपनी तेज़ पांव की थाप, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और लयबद्ध नृत्य शैली से प्रसिद्धि प्राप्त की। सिर्फ 16 वर्ष की उम्र में, जब उन्होंने रवीन्द्रनाथ टैगोर के सामने नृत्य प्रस्तुत किया, तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्हें “नृत्य सम्राज्ञी” की उपाधि दी। सितारा देवी ने बनारस घराने की शैली को अपनाते हुए उसमें लखनऊ घराने की कोमलता और भावनात्मक गहराई को भी जोड़ा। उन्होंने कथक को मंच से लेकर हिंदी फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और विश्व-स्तरीय सभागारों तक पहुंचाया। उन्हें पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे सम्मान मिले। हालांकि, उन्होंने पद्म भूषण स्वीकार करने से यह कहकर इनकार किया कि उनका योगदान इससे बड़े सम्मान का पात्र है। 25 नवंबर 2014 को उनका निधन हुआ, लेकिन कथक के प्रति उनका योगदान आज भी कला-जगत को प्रेरित करता है। सितारा देवी ने कथक को एक सम्मानित और वैश्विक कला के रूप में स्थापित किया।

👁️ आज का दैनिक विशेष – विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे  को मनाये  25 नवम्बर को मनाये जाने वाले “विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस” के बारे में:

विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस प्रत्येक वर्ष 25 नवंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों के प्रति होने वाली हिंसा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज को यह संदेश देना है कि किसी भी रूप में स्त्री के साथ हिंसा अस्वीकार्य है। आज भी विश्वभर में लगभग 35% महिलाएँ अपने जीवनकाल में शारीरिक, मानसिक या यौन हिंसा का सामना करती हैं। हिंसा का यह रूप घरेलू उत्पीड़न, दहेज प्रथा, कार्यस्थल पर शोषण, बाल विवाह, तस्करी और मानसिक अत्याचार के रूप में सामने आता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि तभी एक सुरक्षित और समानता-आधारित समाज का निर्माण संभव है जब महिलाएँ भयमुक्त और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1999 में इस दिवस को आधिकारिक रूप से मान्यता दी। इसकी प्रेरणा 1960 में डोमिनिकन गणराज्य की तीन बहनों — मिराबेल सिस्टर्स — की हत्या से मिली, जिन्होंने तानाशाही के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस किया। उनका बलिदान महिलाओं के संघर्ष और अधिकारों का प्रतीक बन गया। यह दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जागरूक संदेश है कि हमें महिलाओं के प्रति सम्मान, शिक्षा, स्वावलंबन और सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। कानूनों का पालन, सही संस्कार, संवेदनशीलता और सहयोग से ही महिला हिंसा का अंत संभव है। वास्तविक अर्थों में यह दिवस तब सफल होगा जब हम अपने विचारों, व्यवहार और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएँ।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “उल्टी गंगा”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “उल्टी गंगा”

एक भोला-भाला बनिया था। एक रोज़ दुकान बंद कर देर रात वह अपने घर जा रहा था, तभी रास्ते में उसे कुछ चोर मिले। बनिये ने चोरों से पूछा, "इस वक्त अँधेरे में आप लोग कहाँ जा रहे हैं?" चोर बोले, "भैया, हम तो सौदागर हैं। माल खरीदने जा रहे हैं।" बनिये ने पूछा, "माल नकद खरीदोगे या उधार?" चोर बोले, "न नकद, न उधार। पैसे तो देने ही नहीं हैं।" बनिये ने कहा, "आपका यह पेशा तो बहुत बढ़िया है। क्या आप मुझे भी अपने साथ ले चलेंगे?" चोर बोले, "चलिए। आपको फ़ायदा ही होगा।"

बनिये ने कहा, "बात तो ठीक है। लेकिन पहले यह तो बताओ कि यह धंधा कैसे किया जाता है?" चोर बोले, "लिखो, किसी के घर के पिछवाड़े चुपचाप सेंध लगाना। फिर दबे पाँव घर में घुसना, जो भी लेना हो, सो इकट्ठा करना। न तो मकान मालिक से पूछना और न उसे पैसे देना। जो भी माल मिले उसे लेकर घर लौट जाना।" बनिये ने सारी बातें कागज पर लिख लीं और लिखा हुआ कागज जेब में डाल लिया। बाद में सब चोरी करने निकले। चोर एक घर में चोरी करने घुसे और बनिया दूसरे घर में चोरी करने पहुँचा।

वहाँ उसने ठीक वही किया जो कागज में लिखा था। पहले पिछवाड़े सेंध लगाई। दबे पाँव घर में घुसा। दियासलाई जलाकर दीया जलाया। एक बोरा खोजकर उसमें पीतल के छोटे-बड़े बर्तन बड़ी बेफ़िक्री से भरने लगा। तभी एक बड़ा तसला उसके हाथ से गिरा और सारा घर उसकी आवाज से गूंज उठा। घर के लोग जाग गए। सबने 'चोर-चोर' चिल्लाकर बनिये को घेर लिया और उसे मारने-पीटने लगे।

बनिये को ताज्जुब हुआ। उसने अपनी जेब में रखा कागज निकाला और उसे एक नजर पढ़ डाला। फिर तो वह जोश में आ गया। जब सब लोग उसकी मरम्मत कर रहे थे, तब बनिया बोला, "भाइयों, यह तो लिखा-पढ़ी से बिलकुल उलटा हो रहा है। यहाँ तो उलटी गंगा बह रही है।" बनिये की बात सुनकर सब सोच में पड़ गए। मारना-पीटना रोककर सबने पूछा, "यह तुम क्या बक रहे हो?" बनिये ने कहा, "लीजिए, यह कागज देख लीजिए। इसमें कहीं पिटाई का जिक्र है?" घर के लोग तुरंत समझ गए और उन्होंने बनिये को घर से बाहर धकेल दिया। इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि बिना सोच-विचारकर किया कार्य कष्टदायक होता है। जीवन में सफल होने के लिए सोच-समझकर और सावधानीपूर्वक कार्य करना आवश्यक है। बिना सोच-विचार किए कार्य करने से न केवल हम खुद को परेशानी में डाल सकते हैं, बल्कि दूसरों का भी नुकसान कर सकते हैं।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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