सुप्रभात बालमित्रों!
24 फ़रवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 24 फ़रवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज की रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे,
नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"देर करना गलती करने से ज्यादा उचित होता है।"
"Delay is preferable to error."
अक्सर हम जल्दबाजी में निर्णय लेते हैं और बाद में पछताते हैं। लेकिन यदि हम थोड़ा समय लेकर सही जानकारी और तैयारी के साथ कदम उठाएं, तो गलतियों से बचा जा सकता है। सही समय और सही तरीके से काम करना ही सफलता की कुंजी है।
जल्दबाजी में लिए गए निर्णय अक्सर अधूरे या गलत होते हैं, जो हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके विपरीत, यदि हम धैर्य से काम लें और सही समय का इंतजार करें, तो परिणाम बेहतर होते हैं। देर करना गलती करने से बेहतर है, क्योंकि गलतियों का सुधार मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही समय पर किया गया कार्य हमेशा सफलता दिलाता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: BOND – जिसका अर्थ होता है बंधन या सम्बन्ध जोड़ना।
यह किसी भी प्रकार के संबंध, रिश्ते, या जुड़ाव को दर्शाता है। यह शब्द भावनात्मक, सामाजिक, वित्तीय, या रासायनिक संदर्भों में प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण:
हिंदी: "माँ और बच्चे के बीच एक अटूट बंधन होता है।"
English: "There is a strong bond between a mother and her child."
जवाब – गाड़ी का इंजन
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 24 फ़रवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 24 फरवरी 1582: पोप ग्रेगरी XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर की घोषणा की, जो आज पूरी दुनिया में उपयोग किया जाता है। इस कैलेंडर ने लीप ईयर की व्यवस्था को और सटीक बनाया, जिससे समय की गणना अधिक सही हो गई।
- 24 फरवरी 1822: अहमदाबाद में दुनिया के पहले स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन हुआ था। इस मंदिर का उद्घाटन स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक सहजानंद स्वामी के हाथों हुआ। यह मंदिर हिंदू वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और इसे "कल्पवृक्ष" के नाम से भी जाना जाता है।
- 24 फरवरी 1920: जर्मनी में नाजी पार्टी यानी नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (NSDAP) की स्थापना हुई, जिसने बाद में द्वितीय विश्व युद्ध को जन्म दिया।
- 24 फरवरी 1944: भारत में केंद्रीय उत्पाद और नमक अधिनियम (Central Excise and Salt Act) लागू किया गया।
- 24 फरवरी 1955: एप्पल के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीव जॉब्स का जन्म हुआ।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “स्टीव जॉब्स” के बारे में।
स्टीव जॉब्स एक विश्वप्रसिद्ध उद्यमी, आविष्कारक और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले व्यक्ति थे। उनका जन्म 24 फरवरी 1955 को सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में हुआ था। उन्हें एप्पल इंक. (Apple Inc.) के सह-संस्थापक के रूप में जाना जाता है, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक है।
उनके नेतृत्व में एप्पल ने क्रांतिकारी उत्पाद जैसे मैकिन्टोश (1984), आईपॉड (2001), आईफोन (2007) और आईपैड (2010) लॉन्च किए, जिन्होंने टेक्नोलॉजी की दुनिया को ही बदल दिया। उन्होंने पिक्सर एनिमेशन स्टूडियो की स्थापना भी की, जिसने "टॉय स्टोरी" जैसी फिल्मों से एनिमेशन इंडस्ट्री में क्रांति ला दी।
स्टीव जॉब्स का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उन्हें जन्म के बाद ही गोद ले लिया गया था। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी, लेकिन उनकी रुचि टेक्नोलॉजी और डिजाइन में थी। 1976 में, उन्होंने अपने दोस्त स्टीव वोज्नियाक (Steve Wozniak) के साथ मिलकर एप्पल कंपनी की स्थापना की।
स्टीव जॉब्स को 2003 में अग्नाशय के कैंसर का पता चला, लेकिन उन्होंने लंबे समय तक इसका सामना किया। 5 अक्टूबर 2011 को उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी विरासत जीवित है। उन्हें टेक्नोलॉजी, डिजाइन और इनोवेशन के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत के रूप में याद किया जाता है।
अभ्युदय वाणी दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 24 फ़रवरी को मनाये जाने वाले “केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस” के बारे में।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क दिवस भारत में हर साल 24 फरवरी को मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 24 फरवरी 1944 को भारत में केंद्रीय उत्पाद और नमक अधिनियम (Central Excise and Salt Act) लागू किया गया था। यह दिन केंद्रीय उत्पाद शुल्क यानी Central Excise विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के योगदान को सम्मानित करने और कर प्रशासन के महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है।
इस दिन का उद्देश्य कर संग्रह प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए जागरूकता फैलाना भी है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क भारत सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है। यह कर देश में उत्पादित वस्तुओं पर लगाया जाता है। यह कर वस्तुओं के निर्माण (Manufacturing) पर लगता है, न कि बिक्री पर।
GST (Goods and Services Tax) लागू होने से पहले, केंद्रीय उत्पाद शुल्क भारत की कर प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। 1 जुलाई 2017 को भारत में जीएसटी लागू होने के बाद, केंद्रीय उत्पाद शुल्क को GST में समाहित कर दिया गया। GST एक व्यापक कर प्रणाली है, जिसने केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और अन्य अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर दिया।
हालांकि, केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग अभी भी पेट्रोलियम उत्पादों और तंबाकू जैसे कुछ विशिष्ट उत्पादों पर कर लगाने का काम करता है। यह दिवस हमें कर व्यवस्था की अहमियत और देश के आर्थिक विकास में उसके योगदान की याद दिलाता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “अपना-अपना भाग्य”
एक किसान के पास एक बकरा और दो बैल थे। बैल दिन भर खेतों में कड़ी मेहनत करके जुताई का काम करते थे, जबकि बकरा बिना किसी काम के दिन भर इधर-उधर घूमकर हरी घास चरता रहता था। बकरा खा-पीकर मोटा-तगड़ा हो गया था, जबकि बैलों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी। यह देखकर बैलों को लगता था कि बकरा बिना काम के आराम से जीवन बिता रहा है, जबकि उन्हें मेहनत करनी पड़ती है।
एक दिन जब बैल खेत जोत रहे थे और बकरा वहीं पास में घास चर रहा था, तो बकरा बैलों से बोला, "भाइयो, तुम्हें कड़ी मेहनत करते देखकर मुझे दुख होता है, लेकिन यह भाग्य का खेल है। मैं तो बिना काम के आराम से जीवन बिता रहा हूँ, जबकि तुम्हें इतनी मेहनत करनी पड़ती है।" बैलों ने चुपचाप उसकी बात सुनी।
शाम को जब बैल खेत से लौटे, तो उन्होंने देखा कि किसान की पत्नी कसाई को बकरा बेच रही है। बैलों की आँखों में आँसू आ गए। उनमें से एक बैल धीमे स्वर में बोला, "आह! तुम्हारे भाग्य में यही लिखा था।"
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हर किसी का भाग्य अलग होता है और मेहनत करने वालों को ही सच्चा सुख मिलता है। बिना मेहनत के मिली सुविधा हमेशा टिकाऊ नहीं होती। बैलों की मेहनत उन्हें सुरक्षित रखती है, जबकि बकरे का आराम उसके लिए मुसीबत बन जाता है।
इसलिए हमें दूसरों के जीवन से ईर्ष्या करने के बजाय अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। सतत मेहनत और ईमानदारी ही लंबे समय का सच्चा सहारा है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







