सुप्रभात बालमित्रों!
23 जुलाई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 23 जुलाई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"काम में व्यस्तता उदासी का उत्तम प्रतिकार है।"
"Work is always an antidote to depression."
काम में व्यस्त रहना उदासी से निपटने का एक अच्छा तरीका हो सकता है। व्यस्तता मन को नकारात्मक विचारों से दूर रखने और सकारात्मकता लाने में मदद करती है।
काम के दौरान, हम अपनी क्षमताओं का उपयोग करते हैं, उपलब्धियां हासिल करते हैं, और दूसरों के लिए योगदान करते हैं, जिससे आत्म-सम्मान और आत्म-संतुष्टि की भावना बढ़ती है। साथ ही, काम में व्यस्त रहने से सामाजिक संपर्क भी बढ़ सकता है, जो उदासी से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: EDITOR: एडिटर: संपादक का अर्थ होता है – वह व्यक्ति जो किसी लेख, पुस्तक, समाचार पत्र, पत्रिका आदि की सामग्री को जांचता, संशोधित करता और अंतिम रूप देता है।
The editor reviewed the article carefully before publishing it. संपादक ने लेख को प्रकाशित करने से पहले ध्यान से जांचा।
कच्ची खाओ पक्की खाओ, सिर पर उसका तेल लगाओ।
उत्तर: नारियल
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 23 जुलाई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1829 – अमेरिका के विलियम ऑस्टिन बर्ट ने टाइपोग्राफ का पेटेंट कराया, जो टाइपराइटर का प्रारंभिक रूप था। यह लेखन और संचार में एक क्रांतिकारी बदलाव था।
- 1856 – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का जन्म हुआ। उन्होंने "स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" जैसे क्रांतिकारी विचारों से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी।
- 1906 – महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म हुआ। वे भगत सिंह और अन्य युवाओं के प्रेरणास्रोत बने।
- 1916 – प्रसिद्ध ब्रिटिश रसायनज्ञ और नोबेल पुरस्कार विजेता सर विलियम रामसे का निधन हुआ।
- 1926 – न्यूयॉर्क में फॉक्स फिल्म कंपनी ने पहली बार मूक फिल्मों में ध्वनि प्रभाव का प्रदर्शन किया।
- 1927 – बॉम्बे (अब मुंबई) में पहली बार रेडियो प्रसारण शुरू हुआ।
- 1952 – मिस्र में क्रांति हुई, जिसमें युवा सैन्य अधिकारियों ने बादशाह फारूक को अपदस्थ कर दिया।
- 1982 – श्रीलंका में तमिल टाइगर्स और सरकार के बीच गृहयुद्ध आरंभ हुआ।
- 1995 – धूमकेतु हेल-बॉप की खोज की गई।
- 2012 – भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के सम्मान में उनके जन्मस्थान में स्मारक का उद्घाटन किया गया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक" के बारे में।
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, महान समाज सुधारक और राष्ट्रवादी विचारक थे। उनका जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में हुआ था। वे शिक्षा, संस्कृति और स्वराज्य के प्रबल समर्थक थे।
तिलक पहले ऐसे नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ खुलकर "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा" जैसा ऐतिहासिक नारा दिया। उन्होंने द डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी और फर्ग्यूसन कॉलेज की स्थापना में भूमिका निभाई।
'केसरी' मराठी और 'मराठा' अंग्रेजी समाचार पत्रों के माध्यम से जन जागरूकता फैलाई। गणेशोत्सव और शिवाजी महोत्सव शुरू किए। वे गरमदल के 'लाल-बाल-पाल' तिकड़ी के प्रमुख स्तंभ थे।
1908 में मांडले जेल में कैद के दौरान 'गीता रहस्य' लिखी। 1 अगस्त 1920 को निधन। उनका जीवन देशभक्ति और निडरता की मिसाल है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 23 जुलाई को मनाये जाने वाले "राष्ट्रीय प्रसारण दिवस" के बारे में:
राष्ट्रीय प्रसारण दिवस हर वर्ष 23 जुलाई को मनाया जाता है। 23 जुलाई 1927 को बॉम्बे में भारतीय प्रसारण कंपनी द्वारा पहली बार आकाशवाणी का आयोजन किया गया था।
रेडियो ने स्वतंत्रता संग्राम में देशभक्ति जगाई। आकाशवाणी ने समाचार, संगीत, शिक्षा पहुँचाई। आज भी आपातकाल में उपयोगी।
यह दिवस स्वतंत्र, निष्पक्ष प्रसारण की नींव को सम्मानित करता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "जैसे को तैसा"
एक नदी के किनारे एक घना जंगल था, जहां एक भोला-भाला ऊँट अकेला रहता था। एक दिन उसकी मुलाकात एक धूर्त सियार से हुई। सियार ने ऊँट को मक्के के खेत में चलने का लालच दिया।
ऊँट ने सियार को पीठ पर बैठाकर नदी पार कर खेत में ले गया। सियार ने मक्का खाया और पेट दर्द का नाटक कर ऊँट से वापस आने को कहा। किसान ने ऊँट को पीटा, सियार भाग गया।
बाद में सियार ने फिर नदी पार करने को कहा। ऊँट ने उसे पीठ पर बैठाया। नदी के बीच में ऊँट बोला, "मुझे लोटने का मन कर रहा है।" सियार पानी में गिर गया।
जंगल के जानवरों ने कहा, "जैसे को तैसा!" यह कहानी सिखाती है कि हर कर्म का फल मिलता है। धोखा देने वाला अपने जाल में फँसता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







