सुप्रभात बालमित्रों!
22 जुलाई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 22 जुलाई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"जो चाहा वो मिल जाना सफलता है, और जो मिल जाए उसे चाहना ही सच्ची खुशी है।"
"Success is getting what you want. Happiness is wanting what you get."
सफलता को आमतौर पर अपनी इच्छाओं और लक्ष्यों की प्राप्ति के रूप में देखा जाता है। जब हम अपने तय किए गए लक्ष्य तक पहुंचते हैं, तो हमें संतोष और उपलब्धि की भावना होती है। लेकिन खुशी सिर्फ उपलब्धियों से नहीं आती, वह हमारे दृष्टिकोण और सोच पर भी निर्भर करती है।
यदि हम जो कुछ भी हमें मिला है, उसे सराहें और उसमें संतोष का भाव रखें, तो हम सच्चे अर्थों में खुश रह सकते हैं। खुशी का मूल स्रोत कृतज्ञता और संतुलित मन है, न कि केवल इच्छाओं की पूर्ति।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: COSTUME: कॉस्ट्यूम का अर्थ होता है – वेशभूषा या पोशाक, विशेषकर किसी खास अवसर, पात्र या परंपरा के अनुसार पहनी गई पोशाक।
वाक्य प्रयोग: रामलीला में हनुमान का किरदार निभाने के लिए बच्चे ने हनुमान की वेशभूषा पहनी।
The child wore a Hanuman costume to play the role in Ramlila.
वह कारीगर कैसा जो बिना पानी के घर बनाए ॥
उत्तर: मकड़ी
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 22 जुलाई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1099 – प्रथम क्रूसेड के दौरान ईसाई सैनिकों ने 22 जुलाई 1099 को यरुशलम को मुस्लिम शासन से छीन लिया। यह धार्मिक और सामरिक दृष्टि से एक ऐतिहासिक मोड़ था।
- 1784 – प्रसिद्ध जर्मन खगोलशास्त्री फ्रेडरिक बेसेल का जन्म हुआ, जिन्होंने तारों की दूरी मापने की वैज्ञानिक विधियाँ विकसित कीं।
- 1918 – भारत के पहले युद्धक पायलट इंद्रलाल राय प्रथम विश्व युद्ध में लंदन में लड़ते हुए शहीद हो गए। वे रॉयल फ्लाइंग कॉर्प्स में सेवा देने वाले पहले भारतीय थे।
- 1933 – अमेरिकी पायलट विली पोस्ट ने अकेले विमान से दुनिया का चक्कर लगाकर 7 दिन, 18 घंटे और 49 मिनट में उड़ान पूरी की — यह उस समय की एक बड़ी उपलब्धि थी।
- 1942 – द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों को वारसॉ यहूदी बस्ती से नाज़ी यातना शिविरों में भेजा जाने लगा। यह दिन होलोकॉस्ट की अमानवीयता की भयानक शुरुआत माना जाता है।
- 1947 – संविधान सभा ने पिंगली वेंकैया द्वारा डिज़ाइन किए गए तिरंगे को भारत का राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया। यह ध्वज साहस, बलिदान और शांति का प्रतीक बन गया।
- 1969 – सोवियत संघ ने दो संचार उपग्रह स्पूतनिक 50 और मोलनिया 112 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा।
- 1981 – भारत के पहले संचार उपग्रह 'APPLE' Ariane Passenger Payload Experiment ने कार्य करना शुरू किया।
- 2019 – इसरो ने 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान-2 को श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "पिंगली वेंकैया" के बारे में।
पिंगली वेंकैया एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् और बहुभाषाविद् थे, जिन्हें भारत के राष्ट्रीय ध्वज के जनक के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में हुआ था। वे एक बहुप्रतिभाशाली व्यक्ति थे—वे सैनिक भी रहे, भाषाओं के जानकार भी, और कृषि वैज्ञानिक भी।
वेंकैया ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह महसूस किया कि भारत को एक ऐसे ध्वज की आवश्यकता है जो देश की एकता, संस्कृति और आत्मसम्मान का प्रतीक हो। उन्होंने कई वर्षों तक ध्वज डिज़ाइन पर शोध किया और अंततः 1921 में महात्मा गांधी को एक झंडा प्रस्तावित किया।
बाद में इसमें सफेद रंग और अशोक चक्र जोड़ा गया, और यही झंडा 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया गया। पिंगली वेंकैया का योगदान भारतीय इतिहास में अमिट है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 22 जुलाई को मनाये जाने वाले "राष्ट्रीय ध्वज दिवस" के बारे में:
राष्ट्रीय ध्वज दिवस हर वर्ष 22 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन भारत के लिए गर्व, सम्मान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, क्योंकि इसी दिन सन् 1947 में संविधान सभा ने पिंगली वेंकैय्या द्वारा डिज़ाइन किए गए तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था।
इस दिन स्कूलों, सरकारी संस्थानों और सामाजिक संगठनों में राष्ट्रीय ध्वज की महत्ता और गरिमा को समझाने वाले विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। तिरंगा एक क्षैतिज आयताकार ध्वज है, जिसका अनुपात 3:2 होता है।
केसरिया रंग शौर्य और त्याग का प्रतीक है, सफेद रंग शांति और सच्चाई का, हरा रंग समृद्धि का, और अशोक चक्र धर्म, न्याय और प्रगति का प्रतीक है। तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "तीन नौकरानियाँ"
एक घर में तीन नौकरानियाँ काम करती थीं, जो बेहद आलसी थीं। उन्हें सुबह जल्दी उठना बिल्कुल पसंद नहीं था। लेकिन हर सुबह पड़ोस का एक मुर्गा समय पर बांग देता, जिससे उनकी मालकिन जाग जातीं।
नौकरानियाँ इस बात से बेहद परेशान थीं। उन्हें लगा कि उनकी सारी मुसीबतों की जड़ वही मुर्गा है। एक दिन उन्होंने तय किया कि अगर मुर्गा ही नहीं रहेगा, तो बांग भी नहीं होगी और वे चैन से देर तक सो सकेंगी।
सोच-समझकर नहीं, बस गुस्से में आकर उन्होंने उस मुर्गे को पकड़ लिया और चुपचाप मार डाला। अब वे निश्चिंत थीं कि अब कोई बांग नहीं होगी।
लेकिन जो हुआ, वो उनके सोच के बिल्कुल विपरीत था। अब उनकी मालकिन के पास सुबह उठने का कोई निश्चित संकेत नहीं बचा था। ऐसे में वह कभी आधी रात को तो कभी अंधेरे में ही उठ जातीं।
अब नौकरानियों की हालत पहले से भी बुरी हो गई थी। उन्होंने समस्या का हल तो निकाला, लेकिन उसके नतीजों पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया।
किसी भी काम को करने से पहले उसके परिणामों के बारे में अच्छी तरह से सोच-विचार करना ज़रूरी होता है। तात्कालिक लाभ के पीछे भागना कभी-कभी हमें और बड़ी परेशानी में डाल सकता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







