सुप्रभात बालमित्रों!
22 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 22 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"प्रबंधन अन्य लोगों के माध्यम से काम करवाने की कला है।" "Management is the art of getting things done through other people."
प्रबंधन का अर्थ है कि किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए दूसरों की मदद लेना और उन्हें सही दिशा में निर्देशित करना। यह एक कला है क्योंकि इसमें लोगों को प्रेरित करना, उनके साथ तालमेल बनाना, और उनकी क्षमताओं का सही उपयोग करना शामिल है। एक अच्छा प्रबंधक वह होता है जो अपनी टीम के सदस्यों की क्षमताओं को पहचानता है और उन्हें सही कार्य सौंपता है।
प्रबंधन में न केवल कार्यों को व्यवस्थित करना बल्कि लोगों को प्रेरित करना, उनके बीच समन्वय बनाना, और संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करना शामिल है। यही कारण है कि इसे "दूसरों के माध्यम से काम करवाने की कला" कहा जाता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Elaborate : शब्द का अर्थ है विस्तृत या विस्तार से, इसे किसी विषय, जानकारी, या वर्णन को पूरी तरह से या विस्तार से समझाने या गहराई और पूर्णता के साथ प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण वाक्य: He described his travel experience in an elaborate manner. उसने अपनी यात्रा के अनुभव को विस्तार से बताया।
जवाब : कैलेंडर
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 22 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 22 मार्च, 1877 को तमिलनाडु के थिरुक्कुरुंगुडी में टी.वी. सुंदरम अयंगर का जन्म हुआ। वे एक भारतीय उद्योगपति और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के अग्रणी उद्यमी थे, उन्होंने भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक टीवीएस ग्रुप की स्थापना की।
- 22 मार्च, 1882 को उर्दू के प्रसिद्ध पत्रकार और समाज सुधारक मुंशी दयानारायण निगम का जन्म कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ।
- 22 मार्च, 1912 को ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल प्रेसीडेंसी को विभाजित करके बिहार और ओडिशा राज्यों का गठन किया गया। इस दिन को हर साल बिहार दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 22 मार्च, 1947 को लार्ड लुईस माउंटबेटन भारत के आखिरी वायसराय के रूप में भारत आए।
- 22 मार्च, 2020 को कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए पूरे भारत में एक दिन का जनता कर्फ्यू लागू किया गया। इस दिन, मालगाड़ियों को छोड़कर सभी रेलगाड़ियों का परिचालन 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया। शाम 5:00 बजे, सभी भारतीयों ने कोरोना वायरस से लड़ रहे कर्मियों का उत्साह बढ़ाने के लिए एक साथ ताली बजाई।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “मुंशी दयानारायण निगम ” के बारे में।
मुंशी दयानारायण निगम एक प्रसिद्ध उर्दू पत्रकार, लेखक, और समाज सुधारक थे। उनका जन्म 1875 में कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने उर्दू पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुंशी दयानारायण निगम ने "जमींदार" और "ज़माना" जैसे प्रसिद्ध उर्दू अखबारों का संपादन किया। उन्होंने अपने लेखों और संपादकीय के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाई और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा दिया।
उन्होंने कई किताबें लिखीं, जिनमें "तहज़ीब-ए-निस्वाँ" और "मुसलमानों की तरक्की" प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ समाज सुधार, शिक्षा, और महिलाओं के अधिकारों पर केंद्रित थीं। मुंशी दयानारायण निगम ने महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ लिखा और लोगों को जागरूक किया। 1942 में मुंशी दयानारायण निगम का निधन हो गया।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 22 मार्च को मनाये जाने वाले “विश्व जल दिवस” के बारे में:
विश्व जल दिवस हर साल 22 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन पानी के महत्व और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। यह दिन दुनिया भर में स्वच्छ और सुरक्षित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को उजागर करता है। इस दिवस को मनाने की घोषणा 1992 में रियो डी जनेरियो में आयोजित पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन UNCED में की गई थी। और 1993 में पहली बार विश्व जल दिवस मनाया गया।
तब से, हर साल इस दिन को एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। जैसे "जलवायु परिवर्तन का सामना" या "भूजल: अदृश्य को दृश्यमान बनाना"। इस दिन लोग जल संरक्षण पर सेमिनार, सफाई अभियान और शिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। विश्व जल दिवस हमें याद दिलाता है कि पानी एक अनमोल संसाधन है और इसका सतत उपयोग और संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "बीस हजार का चक्कर"
एक बार एक व्यक्ति कुछ पैसे निकालने के लिए बैंक गया। कैशियर ने उसे पैसे दिए, और उसने चुपचाप उन्हें अपने बैग में रख लिया। घर पहुँचकर जब उसने पैसे गिने, तो पाया कि कैशियर ने गलती से 20,000 रुपये अधिक दे दिए थे। यह देखकर उसके मन में उधेड़बुन शुरू हो गई। एक तरफ उसने सोचा कि इन पैसों को वापस लौटा देना चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ उसके मन में आया कि जब वह किसी को गलती से अधिक पैसे दे देता है, तो कोई उसे वापस नहीं लौटाता। बार-बार उसके मन में यह विचार आया कि पैसे लौटा दे, लेकिन हर बार उसका दिमाग कोई न कोई बहाना बना देता।
फिर भी, उसके अंदर से एक आवाज़ आ रही थी, "क्या तुम किसी की गलती से फायदा उठाना चाहते हो? क्या यही ईमानदारी है?" यह सोचकर उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी। अंत में, उसने निर्णय लिया कि उसे यह पैसे वापस करने चाहिए। उसने बैग से 20,000 रुपये निकाले और बैंक जाकर कैशियर को लौटा दिए। पैसे लौटाने के बाद उसकी बेचैनी और तनाव दूर हो गया। वह हल्का और खुश महसूस कर रहा था, जैसे किसी बड़ी लड़ाई को जीत लिया हो।
दोस्तों, ईमानदारी का कोई बाहरी पुरस्कार नहीं होता, लेकिन यह स्वयं में एक बहुत बड़ा पुरस्कार है। ईमानदारी से मिलने वाली मानसिक शांति और आत्मसंतुष्टि किसी भी भौतिक लाभ से बड़ी होती है। हमें हमेशा सही रास्ता चुनना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!
निर्माता : प्रेम वर्मा, PS बैजनाथपुर जमुनहा







