सुप्रभात बालमित्रों!
22 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 22 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
यदि आप गलती नहीं कर सकते हैं तो आप कुछ नहीं कर सकते।
"If you can't make a mistake, you can't make anything."
यह कथन हमें सिखाता है कि गलतियाँ करने का साहस ही हमें कुछ नया सीखने और बनाने में मदद करता है। बिना गलतियों के हम कभी अपनी क्षमताओं और सीमाओं का पता नहीं लगा सकते। गलतियाँ हमें सुधारने, नए दृष्टिकोण अपनाने और अपनी क्षमताओं को बेहतर बनाने का अवसर देती हैं। वे हमारी यात्रा का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और हमें सफलता की ओर ले जाती हैं। इसलिए, गलतियाँ करने से न डरें। उन्हें अपनाएं, उनसे सीखें और निरंतर आगे बढ़ते रहें। याद रखें, सफलता की राह में हर गलती एक कदम आगे बढ़ाने में मददगार होती है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: FAILURE: फेलियर : असफलता, यह शब्द तब उपयोग किया जाता है जब किसी कार्य, योजना, या प्रयास में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं।
उदाहरण : उसने कठिन परिश्रम किया, फिर भी उसे असफलता का सामना करना पड़ा। Despite his hard work, he faced failure.
उत्तर : अमीबा
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 22 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1851– भारत में पहली मालगाड़ी यानी Goods Train का संचालन रुड़की से किया गया, जो ईस्ट इंडियन रेलवे द्वारा निर्माण सामग्री ढोने के लिए चली तथा रेलवे नेटवर्क की शुरुआत का प्रतीक बनी।
- 1666 – सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह का पटना बिहार में जन्म हुआ। वे नौवें गुरु तेग बहादुर के इकलौते पुत्र थे तथा 1699 में बैसाखी पर खालसा पंथ की स्थापना कर पांच प्यारों को अमृत छकाया।
- 1866 – प्रसिद्ध भारतीय न्यायाधीश, समाज सुधारक तथा राष्ट्रवादी नेता महादेव गोविंद रानाडे का निफाड़ नासिक, महाराष्ट्र में जन्म हुआ। उन्होंने प्रार्थना समाज की स्थापना की तथा विधवा पुनर्विवाह तथा महिला शिक्षा के लिए संघर्ष किया।
- 1882 – थॉमस एडिसन के सहयोगी एडवर्ड एच. जॉनसन ने न्यूयॉर्क में पहली बार लाल, सफेद और नीली इलेक्ट्रिक बल्बों से क्रिसमस ट्री को सजाया, जो आधुनिक इलेक्ट्रिक क्रिसमस लाइट्स की शुरुआत थी।
- 1887 – भारत के महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन का इरोड तमिलनाडु में जन्म हुआ। उन्होंने संख्या सिद्धांत तथा अनंत श्रेणियों में क्रांतिकारी योगदान दिया तथा 2012 से 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 22 दिसंबर 1940 – प्रख्यात क्रांतिकारी तथा राजनीतिक सिद्धांतकार मानवेंद्र नाथ राय ने रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी के गठन की घोषणा की। वे भारत तथा मेक्सिको कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक थे तथा पहली बार संविधान सभा की मांग उठाई।
- 1947 – इटली की संविधान सभा ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नया संविधान मंजूर किया, जो 1 जनवरी 1948 से लागू हुआ तथा लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव रखी।
- 1966 – संसद के एक अधिनियम द्वारा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय JNU की स्थापना हुई, जो सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे दसवें गुरु, महान संत, अद्भुत योद्धा “गुरु गोविंद सिंह” के बारे में।
गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु, महान संत, अद्भुत योद्धा और उच्च विचारों वाले समाज सुधारक थे। उनका जन्म 22 दिसंबर 1666 को बिहार के पटना साहिब में हुआ था। बचपन से ही उनमें साहस, तेज और नेतृत्व के गुण दिखाई देते थे। वे आध्यात्मिकता और शौर्य का अनोखा संगम थे, जिन्होंने अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सदा दृढ़ता से संघर्ष किया। गुरु गोविंद सिंह का सबसे महान योगदान 1699 में खालसा पंथ की स्थापना है। खालसा पंथ ने सिख समुदाय में समानता, साहस, त्याग, अनुशासन और सच्चाई के लिए लड़ने की भावना को जागृत किया। उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि धर्म की रक्षा और मानवता की सेवा के लिए किसी भी कठिनाई से पीछे नहीं हटना चाहिए। “सवा लाख से एक लड़ाऊँ” जैसे ओजस्वी वाक्य ने जनता में अद्भुत आत्मबल और उत्साह का संचार किया। गुरु गोविंद सिंह सिर्फ योद्धा ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के साहित्यकार और कवि भी थे। उनकी रचनाएँ—जप साहिब, अकाल उस्तत, जाफरनामा—आध्यात्मिकता, वीरता और मानवता का संदेश देती हैं। उन्होंने अपने जीवन में अपार त्याग किया; उनके पिता गुरु तेग बहादुर और स्वयं उनके चारों पुत्रों जिन्हें साहिबजादे कहा गया, ने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। अपने अंतिम संदेश में गुरु गोविंद सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का शाश्वत और अंतिम गुरु घोषित किया। गुरु गोविंद सिंह का जीवन साहस, निष्ठा, त्याग और सत्य की रक्षा का अमर उदाहरण है, जो आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 22 दिसंबर को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय गणित दिवस” के बारे में:
भारत में हर वर्ष 22 दिसंबर को महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन अयंगर की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं में गणित के प्रति रुचि जगाना और उन्हें गणित पढ़ने के लिए प्रेरित करना है। वर्ष 2011 में उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर, मद्रास विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष घोषित किया और इसी अवसर पर रामानुजन की स्मृति में विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया। रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड में हुआ था। उन्हें “अनंत को जानने वाला व्यक्ति” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने संख्याओं के सिद्धांत, गणितीय फलनों, निरंतर भिन्नों और अनंत श्रेणियों के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया। उनकी प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने गणित में ऐसे महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत किए, जिनका उपयोग आज भी आधुनिक गणित में किया जाता है। राष्ट्रीय गणित दिवस न केवल रामानुजन के अद्भुत योगदान को सम्मानित करता है, बल्कि विद्यार्थियों को यह संदेश भी देता है कि जिज्ञासा, परिश्रम और निरंतर अभ्यास से गणित को सरल और रोचक बनाया जा सकता है। यह दिवस पूरे देश में विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रतियोगिताओं के माध्यम से बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “संगति का असर”
एक बार एक राजा शिकार पर निकला और अपने काफ़िले के साथ घने जंगल से गुजर रहा था। तभी अचानक उसे डाकुओं की आहट सुनाई दी। वह तुरंत पास के एक पेड़ की आड़ में छिपने लगा। उसी पेड़ पर एक तोता बैठा था, जिसने जोर-जोर से बोलना शुरू कर दिया—“पकड़ो पकड़ो, एक राजा आ रहा है! इसके पास बहुत सारा धन है, जल्दी आओ, लूट लो!” तोते की आवाज सुनते ही डाकू राजा की ओर दौड़ पड़े। यह देखकर राजा और उसके सैनिक जान बचाने के लिए भाग निकले। भागते-भागते वे एक साधु की कुटिया तक पहुँचे। वहाँ एक और तोता बैठा था, जो बहुत मधुर स्वर में बोला—“आइए राजन, हमारे आश्रम में आपका स्वागत है। भीतर आइए, पानी पीजिए और विश्राम कीजिए।” तोते के विनम्र व्यवहार से राजा आश्चर्यचकित हो गया। वह कुटिया में गया, साधु को प्रणाम किया और पूरा घटनाक्रम सुनाया। फिर उसने पूछा, “ऋषिवर, एक ही प्रजाति के दोनों तोतों के व्यवहार में इतना अंतर कैसे?” साधु मुस्कुराए और बोले, “राजन, यह संगति का असर है। जो तोता डाकुओं के बीच रहता है, वही उनकी भाषा और स्वभाव सीख जाता है। और जो तोता साधु-संतों के साथ रहता है, वह शांत, विनम्र और शिष्ट बन जाता है। मनुष्य भी उसी प्रकार होता है—जिस वातावरण में रहता है, वह वैसा ही बन जाता है। मूर्ख भी विद्वानों की संगति में विद्वान बन सकता है और विद्वान भी बुरी संगति में जाकर गिर सकता है।” यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारी संगति हमारे स्वभाव, विचारों और चरित्र को गहराई से प्रभावित करती है। इसलिए हमेशा अच्छे लोगों का साथ चुनना चाहिए ताकि हमारा व्यक्तित्व भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सके।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







