सुप्रभात बालमित्रों!
21 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 21 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "श्रम के बिना सफलता प्राप्त नहीं होती" और “No pressure, no diamonds”
— सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम, धैर्य और संघर्ष आवश्यक हैं। जीवन में मिलने वाली हर चुनौती हमें अनुभव देती है, हमारे चरित्र को मजबूत बनाती है और हमारी क्षमताओं को निखारती है। जैसे धरती की गहराइयों में अत्यधिक दबाव और तापमान के कारण साधारण कार्बन हीरा बन जाता है, उसी प्रकार मनुष्य भी कठिन परिस्थितियों का सामना करके अपनी श्रेष्ठता और चमक को प्राप्त करता है। यदि हम संघर्षों से डरकर रुक जाएँ, तो सफलता दूर हो जाती है; परंतु यदि हम दृढ़ता, साहस और निरंतर श्रम के साथ आगे बढ़ें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। इसलिए जीवन में ऊँचाइयों को छूने के लिए कठिनाइयों को अवसर मानकर लगन से प्रयास करना ही सफलता का सच्चा मार्ग है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Factor फैक्टर: कारक, गुणक, या भाज्य। सामान्य अर्थ में यह किसी भी चीज़ को प्रभावित करने वाले कारण या तत्व होता है वहीं गणित में गुणक या भाज्य एक संख्या होती है जो किसी अन्य संख्या को पूरी तरह विभाजित कर सके।
वाक्य प्रयोग: Weather is a major factor in farming. खेती में मौसम एक प्रमुख कारक होता है।
उत्तर : पेड़
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 21 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1911 – भारत के पहले पूर्णतः स्वदेशी वाणिज्यिक बैंक सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना सोराबजी पोर्चखानवाला ने की, जो भारतीयों द्वारा स्वामित्व एवं प्रबंधित पहला बैंक था तथा आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक बना।
- 1913 – न्यूयॉर्क वर्ल्ड अखबार के 'फन' सप्लीमेंट में आर्थर विन द्वारा बनाई गई दुनिया की पहली आधुनिक क्रॉसवर्ड पहेली प्रकाशित हुई, जो शब्दों को काटते हुए ग्रिड में भरने वाली पहेली थी तथा इस दिन को राष्ट्रीय क्रॉसवर्ड दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 1923 – नेपाल-ब्रिटेन मैत्री संधि पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत ब्रिटेन ने नेपाल को पूर्ण संप्रभु एवं स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी।
- 1937 – वॉल्ट डिज़्नी की पहली पूर्ण लंबाई वाली रंगीन एनिमेटेड फिल्म स्नो व्हाइट एंड द सेवन ड्वार्फ्स का लॉस एंजिल्स में प्रीमियर हुआ, जो सिनेमा इतिहास की पहली फीचर-लेंथ कार्टून फिल्म बनी।
- 1952 – भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शांति कार्यकर्ता सैफुद्दीन किचलू तत्कालीन सोवियत संघ का लेनिन शांति पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने।
- 1962 – नासाउ बहामास में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी एवं ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन ने बहस के बाद बहुआयामी नाटो परमाणु बल यानी मल्टीलेटरल फोर्स के निर्माण की नींव रखी।
- 1974: भारत का पहला पनडुब्बी प्रशिक्षण जंगी जहाज INS सतवाहन विशाखापट्टनम में नौसेना में शामिल किया गया।
- 21 दिसंबर 1991 – सोवियत संघ का औपचारिक विघटन अल्मा-अता प्रोटोकॉल से हुआ, जिससे 15 स्वतंत्र गणराज्य बने तथा शीत युद्ध का अंत हुआ।
- 21 दिसंबर 2011 – प्रसिद्ध भारतीय परमाणु वैज्ञानिक पी.के. अयंगर का मुंबई में 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जो पोखरण-I परीक्षण के प्रमुख वैज्ञानिक एवं पूर्व एईसी चेयरमैन थे।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक “पी. के. अयंगर” के बारे में।
पी. के. अयंगर जिनका पूरा नाम पार्थसारथी कृष्णन अयंगर था, भारत के प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक और देश के परमाणु कार्यक्रम के अग्रणी व्यक्तित्वों में से एक थे। उनका जन्म 29 जून 1927 को कर्नाटक में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन भारत की वैज्ञानिक प्रगति, विशेषकर परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र को समर्पित किया। पी. के. अयंगर ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र BARC में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और बाद में वे इसके निदेशक भी बने। भारतीय परमाणु कार्यक्रम को सशक्त बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा। वे वर्ष 1974 के पोखरण परमाणु परीक्षण Operation Smiling Buddha के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल थे, जिसने भारत को विश्व में परमाणु क्षमता वाले देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया। उनकी नेतृत्व क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टि और अनुसंधान भावना ने भारत की रणनीतिक और ऊर्जा आवश्यकताओं को नई दिशा प्रदान की। अयंगर जी ने केवल वैज्ञानिक प्रयोग ही नहीं किए, बल्कि युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 21 दिसंबर 2011 को उनका निधन हो गया, लेकिन भारत की परमाणु नीतियों और शोध कार्यक्रमों के विकास में उनका योगदान आज भी स्मरण किया जाता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 21 दिसंबर को मनाये जाने वाले “विश्व ध्यान दिवस” के बारे में:
विश्व ध्यान दिवस हर वर्ष 21 दिसंबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा UNGA ने 21 दिसंबर 2024 को आधिकारिक रूप से विश्व ध्यान दिवस घोषित किया, ताकि ध्यान यानी Meditation के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर होने वाले गहरे प्रभाव को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी जा सके। आधुनिक जीवन की तेज़ रफ्तार, तनावपूर्ण दिनचर्या और बढ़ते मानसिक दबाव के बीच ध्यान एक ऐसी पद्धति है, जो मन को शांत करती है, भावनाओं को संतुलित बनाती है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है। विश्व ध्यान दिवस लोगों को ध्यान को दैनिक अभ्यास के रूप में अपनाने, स्वयं से जुड़ने और आंतरिक शांति महसूस करने का अवसर प्रदान करता है। ध्यान के नियमित अभ्यास से व्यक्ति में भावनात्मक लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम होता है, और मन-शरीर का तालमेल सुधरता है। इसके साथ ही व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करता है और अपने आस-पास की दुनिया से गहरा जुड़ाव महसूस करता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन के लिए ध्यान एक शक्तिशाली साधन है, जिसे हर व्यक्ति को अपनाना चाहिए।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “स्वावलम्बन”
बहुत पुरानी बात है। बंगाल के एक छोटे से स्टेशन पर एक रेलगाड़ी रुकी और एक आधुनिक विचारों वाला नौजवान लड़का छोटा सा संदूक लेकर उतरा। स्टेशन छोटा था और वहाँ कोई कुली नहीं था, इसलिए लड़का परेशान होकर कुली को पुकारने लगा। तभी धोती-कुर्ता पहने एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति वहाँ से गुजरा। लड़के ने उसे कुली समझकर अपना संदूक उठाने को कहा। उस व्यक्ति ने बिना कुछ कहे संदूक उठा लिया और चुपचाप उसके घर तक पहुंचा दिया। घर पहुँचने पर लड़के ने पैसे देने चाहे, लेकिन उस सज्जन ने लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, “मुझे पैसों की आवश्यकता नहीं है। यदि तुम मुझे कुछ देना चाहते हो, तो बस इतना वचन दो कि भविष्य में अपना काम स्वयं करोगे। स्वावलम्बन से ही व्यक्ति और देश दोनों की उन्नति होती है।” धोती-कुर्ता पहने वह व्यक्ति कोई साधारण इंसान नहीं, बल्कि महान समाजसेवी और विद्वान ईश्वरचन्द्र विद्यासागर थे। यह घटना हमें सिखाती है कि हमें अपने कार्य स्वयं करने की आदत विकसित करनी चाहिए। स्वावलम्बन हमें आत्मनिर्भर बनाता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और समाज तथा राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







