21 September AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢








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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

21 सितम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 21 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "स्वप्रेरित होकर कार्य करना बुद्धिमान व्यक्ति का सबसे मजबूत गुण होता है।"
The strongest quality of a genius is the power of lighting its own fire.

स्वप्रेरणा का अर्थ है अपने भीतर से प्रेरित होना। स्वप्रेरणा, एक ऐसी शक्ति है जो व्यक्ति को बिना किसी बाहरी दबाव के, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है। यह एक ऐसा गुण है जो व्यक्ति को असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद करता है। यह व्यक्ति को स्वतंत्र, सफल, विकसित और आत्मविश्वासी बनाता है। इसलिए, हर व्यक्ति को स्वप्रेरणा विकसित करने का प्रयास करना चाहिए।

स्वप्रेरणा विकसित करने के लिए सबसे पहले स्पष्ट और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करें। सकारात्मक सोच रखें और नकारात्मक विचारों को दूर भगाएं। कठिन परिश्रम करें और लगातार प्रयास करते रहें। नई चीजें सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें। अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें और खुद को सराहें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: NEUTRAL: न्यूट्रल: तटस्थ, उदासीन, निष्पक्ष या बिना पक्षपात के।

वाक्य प्रयोग: It is important to stay neutral when judging a situation. किसी परिस्थिति का मूल्यांकन करते समय निष्पक्ष यानी neutral रहना महत्वपूर्ण है।

🧩 आज की पहेली
बिन तेल बिन बाती, नाक दबाते करे रोशनी।
जवाब - टॉर्च, बैटरी
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 21 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1792 : फ्रांसीसी क्रांति के दौरान फ्रांस में राजशाही समाप्त हुई और प्रथम गणराज्य की स्थापना हुई। राष्ट्रीय कन्वेंशन ने राजा लुई सोलहवें को औपचारिक रूप से अपदस्थ किया, जिसके बाद फ्रांसीसी विधायी सभा को राष्ट्रीय कन्वेंशन ने बदल दिया। यह फ्रांसीसी क्रांति का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
  • 1893 : ड्यूरिया बंधुओं चार्ल्स और फ्रैंक ड्यूरिया ने स्प्रिंगफील्ड, मैसाचुसेट्स में अपनी गाड़ी का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। इसे अमेरिका में बना पहला सफल गैस-इंजन ऑटोमोबाइल माना जाता है, जिसने ऑटोमोबाइल उद्योग की शुरुआत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1964 : माल्टा को यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता प्राप्त हुई, जिसके बाद यह एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया।
  • 1966 : भारत के प्रसिद्ध तैराक मिहिर सेन ने बास्फोरस चैनल (तुर्की) को तैरकर पार किया और एक और कीर्तिमान स्थापित किया। वे विश्व के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सात महासागरों को तैरकर पार किया, जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर गौरवान्वित किया।
  • 1981 : बेलीज ने यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता प्राप्त की और एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में उभरा।
  • 1981 : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाने की घोषणा की, जो सभी देशों और लोगों के बीच शांति के आदर्शों को मजबूत करने के लिए समर्पित है।
  • 1982 : पहली बार अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया गया, जिसका विषय "लोगों का शांति का अधिकार" था। इस दिन से शांति के लिए वैश्विक जागरूकता अभियान शुरू हुए।
  • 1991 : आर्मेनिया ने सोवियत संघ से स्वतंत्रता की घोषणा की और एक स्वतंत्र गणराज्य बना।
  • 2003 : गैलीलियो अंतरिक्ष यान, जो बृहस्पति ग्रह और उसके चंद्रमाओं का अध्ययन कर रहा था, नियंत्रित रूप से बृहस्पति के वायुमंडल में नष्ट किया गया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – तैराक मिहिर सेन

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “तैराक मिहिर सेन” के बारे में।

भारत के प्रसिद्ध तैराक मिहिर सेन का जन्म 16 नवंबर 1930 को पुरी, ओडिशा में हुआ था। वे भारत के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने समुद्री तैराकी यानी long-distance swimming में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया। 27 सितंबर 1958 को उन्होंने इंग्लिश चैनल पार कर भारत का गौरव बढ़ाया। इसके बाद उन्होंने पनामा नहर, जिब्राल्टर जलडमरूमध्य, बोस्फोरस, डार्डानेल्स और पलक जलडमरूमध्य को भी सफलतापूर्वक तैरकर पार किया। इस प्रकार वे विश्व के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने पाँच समुद्रों को एक ही वर्ष में तैरकर पार किया।

मिहिर सेन ने तैराकी को केवल खेल के रूप में ही नहीं देखा, बल्कि इसे भारत की शक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बनाया। उनकी अद्भुत उपलब्धियों के लिए उन्हें 1959 में पद्मश्री और 1967 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि यदि मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय हो, तो असंभव लगने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। मिहिर सेन हमेशा भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

🕊️ आज का दैनिक विशेष – अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 21 सितम्बर को मनाये जाने वाले “अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस” के बारे में:

हर साल 21 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में शांति और संघर्ष समाधान को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 30 सितंबर, 1981 को एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें वैश्विक युद्धविराम और उस दिन सभी शत्रुताएं समाप्त करने का आह्वान किया गया। पहला अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस 21 सितंबर, 1982 को मनाया गया था। 2001 में इसे आधिकारिक तौर पर 21 सितंबर को मनाने का निर्णय लिया गया।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का प्रतीक कबूतर और जैतून की शाखा है, जो शांति और स्वतंत्रता का प्रतिनिधित्व करते हैं। हर साल, संयुक्त राष्ट्र इस दिन के लिए एक विशेष थीम का चयन करता है, जो शांति-निर्माण और संघर्ष समाधान के विशिष्ट पहलुओं पर केंद्रित होती है।

इस दिन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव स्थायी मिशनों के प्रतिनिधियों और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय के अधिकारियों की उपस्थिति में, विश्व शांति के लिए प्रार्थना करने के लिए घंटी बजाते हैं। दुनिया भर में, शांति मार्च, शैक्षिक कार्यक्रम, कला प्रदर्शनियां और अंतरसांस्कृतिक संवाद आयोजित किए जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का उद्देश्य शांति और संघर्ष समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता को याद दिलाना है और व्यक्तियों, समुदायों और राष्ट्रों को अधिक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण दुनिया की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “खंभे ने पकड़ रखा है”

एक बार शराब का व्यसनी व्यक्ति एक संत के पास पहुँचा और विनम्रतापूर्वक बोला – “गुरुदेव, मैं शराब के व्यसन से बहुत दुखी हूँ। इस कारण मेरा घर उजड़ गया है, शांति नष्ट हो गई है। कृपया मुझे इससे छुटकारा पाने का उपाय बताइए।”

संत ने कहा –“जब यह व्यसन इतना नुकसान करता है, तो इसे छोड़ क्यों नहीं देते?” व्यक्ति बोला – “गुरुदेव, मैं छोड़ना तो चाहता हूँ, लेकिन शराब ने मुझे इस तरह जकड़ रखा है कि मैं कुछ कर ही नहीं पाता।” संत मुस्कुराए और बोले – “कल तुम फिर आना, मैं उपाय बताऊँगा।”

दूसरे दिन निश्चित समय पर वह व्यक्ति महात्मा के पास गया। उसे देख महात्मा झट से खड़े हुए और एक खंभे को कस कर पकड़ लिया। जब उस व्यक्ति ने महात्मा को इस दशा में देखा, तो कुछ समय तो वह मौन खड़ा रहा, पर जब काफी देर बाद भी महात्माजी ने खंभे को नहीं छोड़ा, तो उससे रहा नहीं गया और पूछ बैठा, कि "गुरुदेव, आपने व्यर्थ इस खंभे को क्यों पकड़ रखा है?"

संत बोले – “वत्स! मैंने खंभे को नहीं पकड़ा, यह खंभा मुझे पकड़कर छोड़े नहीं रहा।” व्यक्ति बोला – “गुरुदेव, यह तो निर्जीव है। आपने ही इसे पकड़ रखा है। यह आपको कैसे पकड़ सकता है?”

तब संत ने समझाया – “यही बात मैं तुम्हें समझाना चाहता हूँ। शराब ने तुम्हें नहीं पकड़ा है, बल्कि तुमने ही उसे पकड़ रखा है। अगर तुम मन में दृढ़ निश्चय कर लो कि मुझे यह बुरी आदत छोड़नी ही है, तो इसी क्षण तुम्हारा व्यसन छूट सकता है। मनुष्य के हर कर्म पर उसका मन नियंत्रण करता है। इच्छा-शक्ति जितनी प्रबल होगी, उतनी जल्दी सफलता मिलेगी।”

संत के इन वचनों से व्यक्ति इतना प्रभावित हुआ कि उसने उसी समय शराब छोड़ने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उसके घर में फिर से सुख-शांति लौट आई। इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कोई भी बुरी आदत हमें नहीं पकड़ती, बल्कि हम ही उसे पकड़कर रखते हैं। यदि हम दृढ़ निश्चय और मजबूत इच्छा-शक्ति से संकल्प कर लें, तो जीवन की सबसे बड़ी बुराई भी आसानी से छोड़ी जा सकती है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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