21 January AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

21 जनवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 21 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

भविष्य उनका है जो अपने सपनों की सुंदरता में यकीन करते हैं।
The future belongs to those who believe in the beauty of their dreams.

जब हम अपने सपनों की बात करते हैं, तो वे सिर्फ इच्छाएँ या आकांक्षाएँ नहीं होतीं, बल्कि हमारे भीतर की कल्पना और आत्मा की गहराई से जुड़े होते हैं। सपनों की सुंदरता यह है कि वे हमें प्रेरित करते हैं और हमारे लिए एक लक्ष्य तय करते हैं जिसके लिए हम मेहनत कर सकते हैं। लेकिन केवल सपने देखना ही पर्याप्त नहीं है। हमें अपने सपनों पर विश्वास भी करना होता है। विश्वास वह शक्ति है जो हमें कठिनाइयों का सामना करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह हमें यह महसूस कराता है कि हम अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। वे लोग जो अपने सपनों पर विश्वास करते हैं, वे अपने भविष्य को आकार देने में सक्षम होते हैं। वे मेहनत करते हैं, संघर्ष करते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। इस तरह, उनका भविष्य भी उनके सपनों के अनुसार बनता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: LABOUR : लेबर : श्रम, मेहनत, परिश्रम।

उदाहरण : "Hard labour is required to build a strong foundation. मजबूत नींव बनाने के लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है।"

🧩 आज की पहेली
एक सतह रहने की इच्छा, लेकर में जिंदा रहता हूं।
नदी-झील और ताल तलैया, झरनों में बैठा रहता हूं।
📜 आज का इतिहास

 अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 21 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1793: फ्रांसीसी क्रांति के दौरान, राजा लुई सोलहवें को राजद्रोह के आरोप में गिलोटिन द्वारा फाँसी दे दी गई थी।
  • 1924: बोलशेविक क्रांति के नेता और सोवियत संघ के पहले प्रमुख, व्लादिमीर लेनिन का निधन हुआ।
  • 1945: महान भारतीय क्रांतिकारी, प्रसिद्ध वकील और स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी बोस का निधन जापान के टोक्यो में हुआ था। उन्होंने आज़ाद हिंद फ़ौज INA के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • 1958: कॉपीराइट अधिनियम लागू हुआ। कॉपीराइट बौद्धिक संपदा का एक रूप है। कॉपीराइट एक कानूनी अधिकार है जो साहित्य, कला, संगीत, फिल्म और कंप्यूटर प्रोग्राम के मूल कार्यों को सुरक्षा प्रदान करता है। यह विचारों के बजाय विचारों की अभिव्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करता है। कॉपीराइट के स्वामी के पास कार्य को अनुकूलित करने, पुनरुत्पादित करने, प्रकाशित करने, अनुवाद करने और जनता तक पहुँचाने का विशेष अधिकार होता है।
  • 1959: प्रसिद्ध भारतीय रसायनज्ञ सर ज्ञान चंद्र घोष का निधन हुआ।
  • 1972: त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर को पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम, 1971 के तहत पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।
  • 2008: भारत ने इस्राइल के एक जासूसी उपग्रह टेकसार-1 का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया और उसे पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – सर ज्ञान चंद्र घोष

 अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'सर ज्ञान चंद्र घोष’ के बारे में।

सर ज्ञान चंद्र घोष, जिन्हें ज्ञानेंद्र चंद्र घोष के नाम से भी जाना जाता है उनका जन्म 4 सितंबर 1894 को ब्रिटिश भारत के झारखंड के गिरिडीह में एक बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध भारतीय रसायनज्ञ थे। उन्होंने भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान, औद्योगिक विकास और प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1950 में, वे नवगठित पूर्वी उच्च तकनीकी संस्थान के निदेशक बने, जिसका नाम 1951 में बदलकर आईआईटी खड़गपुर कर दिया गया। इसके अलावा, वे भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर के निदेशक और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।

घोष को मजबूत इलेक्ट्रोलाइट्स की विसंगति और पृथक्करण-आयनीकरण सिद्धांत के विकास के लिए भी जाना जाता है। उनके अन्य महत्वपूर्ण योगदानों में ध्रुवीकृत प्रकाश के प्रभाव में फोटोकैटेलिस्ट का व्यापक अध्ययन और हाइड्रोकार्बन के संश्लेषण के लिए फिशर-ट्रॉप्स प्रतिक्रिया का विकास शामिल है। डॉ. घोष ने ठोस उत्प्रेरकों के व्यवस्थित अध्ययन के लिए विभेदक थर्मल विश्लेषण डीटीए के अनुप्रयोग के क्षेत्र में भी योगदान दिया।

घोष ने भारतीय कच्चे माल से फॉस्फेटिक उर्वरक, अमोनियम सल्फेट, फॉर्मेल्डिहाइड, पोटेशियम क्लोरेट आदि के उत्पादन से संबंधित तकनीकी समस्याओं पर भी शोध कार्य का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया। अपने सक्रिय करियर के दौरान, वे ढाका विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान विभाग के प्रमुख, भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर के निदेशक, आईआईटी खड़गपुर के निदेशक, कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति और भारत सरकार के उद्योग और आपूर्ति के महानिदेशक रहे।

🎉 आज का दैनिक विशेष – त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय स्थापना दिवस

 आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 21 जनवरी को मनाये जाने वाले “त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय स्थापना दिवस” के बारे में:

हर साल 21 जनवरी को त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय अपने राज्य का स्थापना दिवस मनाते हैं। 21 जनवरी 1972 को इन तीनों राज्यों को पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम, 1971 के तहत पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। इससे पहले, मेघालय असम का हिस्सा था, जबकि त्रिपुरा और मणिपुर केंद्र शासित प्रदेश थे।

स्वतंत्रता के समय, पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय संरचना में असम के मैदान, पहाड़ी जिले और उत्तर-पूर्वी सीमा का क्षेत्र शामिल था। 1949 में मणिपुर और त्रिपुरा की रियासतों को भारत में मिला दिया गया और इन्हें केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। 1 दिसंबर 1963 को नागालैंड को राज्य का दर्जा मिला। भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत 1969 में मेघालय को असम के भीतर एक स्वायत्त राज्य बनाया गया।

अंततः 1972 में, पूर्वोत्तर पुनर्गठन अधिनियम के तहत त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। इसके अलावा, असम के मिजो पहाड़ी क्षेत्र और नेफा को केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया। 1986 के मिजो समझौते के अनुसार, 1987 में मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश (नेफा) को भी पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। इस प्रकार, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय का स्थापना दिवस एक राज्य के दर्जे की प्राप्ति का प्रतीक है और भारतीय संघ के हिस्से के रूप में उनकी स्वतंत्रता और पहचान का भी उत्सव है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – सुधार का मौका

अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: सुधार का मौका:

एक बार की बात है, एक व्यक्ति अपने बचपन के शिक्षक से मिला। वह उनके पैर छूकर अपना परिचय देता है। शिक्षक ने प्यार से पूछा, "अब आप क्या करते हैं?" वह व्यक्ति बोला, "मैं भी एक शिक्षक बन गया हूँ, और इसकी प्रेरणा मुझे आपसे मिली थी।"

व्यक्ति ने अपनी कहानी सुनाते हुए कहा, "जब मैं तीसरी कक्षा में था, तब एक दिन मेरे सहपाठी ने शिकायत की थी कि उसकी घड़ी चोरी हो गई है। आपने सभी बच्चों को पीछे लाइन में खड़ा किया और सबकी आंखें बंद करने को कहा। फिर आपने सबकी जेबें चेक कीं। मेरी जेब से आपको घड़ी मिली, जिसे मैंने चुराया था। पर चूंकि सबकी आंखें बंद थीं, इसलिए किसी को नहीं पता चला कि घड़ी मैंने चुराई थी।"

"उस दिन आपने मुझे शर्मिंदगी से बचा लिया था और कभी भी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैंने कोई गलती की थी। आपने मुझे बिना कुछ कहे माफ कर दिया और दूसरे बच्चों को मुझे चोर कहने से भी बचा लिया।"

यह सुनकर शिक्षक मुस्कुराए और बोले, "मुझे भी नहीं पता था कि घड़ी किसने चुराई थी।"

आश्चर्यचकित होकर व्यक्ति बोला, "कैसे संभव है? आपने अपनी आंखों से मेरी जेब से घड़ी निकाली थी।"

शिक्षक ने कहा, "जब मैंने सबकी जेबें चेक की थीं, मैंने भी अपनी आंखें बंद रखी थीं, ताकि मुझे भी यह न पता चले कि किसने घड़ी चुराई है।"

शिक्षक ने अपनी आंखें बंद रखते हुए, छात्र को एक दूसरा मौका दिया और उसे सार्वजनिक रूप से शर्मिंदगी से बचाया। यह कहानी हमें सिखाती है कि किसी की गलती जानने के बाद भी उसे शर्मिंदा नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे सुधरने का मौका देना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

 आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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