सुप्रभात बालमित्रों!
21 फ़रवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 21 फ़रवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से
प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"हम अगर किसी चीज़ की कल्पना कर सकते हैं तो उसे साकार भी कर सकते हैं।"
"What the mind can conceive, it can achieve."
यदि हम अपने मन में किसी लक्ष्य या विचार को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं, तो हम उसे वास्तविकता में भी बदल सकते हैं। यह उद्धरण हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने सपनों और लक्ष्यों को कभी न छोड़ें। यदि हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने और अपने सपनों पर विश्वास करने के लिए तैयार हैं, तो बहुत कुछ संभव हो जाता है।
हमारी सोच हमारे जीवन को आकार देती है। यदि हम सकारात्मक और आशावादी सोचते हैं, तो हम सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने की अधिक संभावना रखते हैं। इसलिए, हमेशा बड़ी सोचें और अपने सपनों पर विश्वास रखें। आप जो कुछ भी कल्पना कर सकते हैं, उसे आप प्राप्त कर सकते हैं – बस दृढ़ विश्वास और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: QUARTER : क्वार्टर
QUARTER का अर्थ होता है “चौथाई” या “चतुर्थ भाग”।
यह किसी वस्तु या राशि के चार बराबर भागों में से एक को संदर्भित करता है।
उदाहरण:
English: He drank a quarter of the milk.
हिंदी: उसने एक चौथाई दूध पिया।
कर्मशील का साथ में देता, कर्महीन को छलता हूं।
उत्तर : समय
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 21 फ़रवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1842: अमेरिका के जॉन ग्रीनॉफ ने सिलाई मशीन का पेटेंट करवाया।
1848: कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंजेल्स ने 'कम्युनिस्ट घोषणापत्र' प्रकाशित किया।
- 1896: हिन्दी साहित्य के महान कवि एवं लेखक सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म हुआ।
1952: ढाका में बांग्ला भाषा आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में छात्र शहीद हुए, जिसकी याद में मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।
1972: सोवियत मानवरहित अंतरिक्ष यान 'लूना-20' चंद्रमा की सतह पर उतरा।
- 2004: lawn tennis में सानिया मिर्जा WTA खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
- 2000 से: 21 फ़रवरी को पूरी दुनिया में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हुई।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला” के बारे में।
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म 21 फरवरी, 1899 को बंगाल के मेदिनीपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम पंडित रामसहाय त्रिपाठी था। निराला जी की शिक्षा घर पर ही हुई थी। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी का अध्ययन किया और वे स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद से बहुत प्रभावित थे। निराला जी ने कई पत्रिकाओं का संपादन भी किया।
वे हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवियों में से एक थे। उनकी कविताओं में प्रकृति, प्रेम और देशभक्ति का सशक्त चित्रण मिलता है। उन्होंने कई उपन्यास, कहानियाँ और निबंध भी लिखे। उनकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं – अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता, राम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति।
निराला जी को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण जैसे सम्मान भी प्राप्त हुए। वे एक विद्रोही कवि थे, जिन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ बेझिझक आवाज़ उठाई। उनकी मृत्यु 15 अक्टूबर, 1961 को इलाहाबाद में हुई।
निराला जी हिन्दी साहित्य के एक अनमोल रत्न थे। उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस देती हैं।
अभ्युदय वाणी दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 21 फ़रवरी को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” के बारे में।
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हर वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य विश्वभर में भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहित करना और मातृभाषाओं को संरक्षित करना है। यह दिन UNESCO द्वारा 1999 में घोषित किया गया था और 2000 से इसे विश्वभर में मनाया जा रहा है।
इस दिन की स्थापना बांग्लादेश में घटित घटनाओं की याद में की गई थी। 21 फरवरी, 1952 को, तब के पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में छात्रों ने अपनी मातृभाषा बंगला को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दिलाने के लिए आंदोलन किया। इस संघर्ष में कई छात्र शहीद हुए। उनकी स्मृति में ही इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य भाषाई विविधता और बहुभाषिकता को बढ़ावा देना है। मातृभाषा में शिक्षा को प्रोत्साहित करके, मातृभाषा में साहित्य और कला का विकास करके, विभिन्न भाषाओं में संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित करके और बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई-लिखाई की सुविधा देकर हम अपनी भाषाओं का संरक्षण कर सकते हैं।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “मैना चिड़िया”
एक हरे-भरे गाँव में, एक छोटी सी चिड़िया रहती थी जिसका नाम मैना था। मैना का सुरीला गीत और उसकी प्यारी-सी आवाज़ पूरे गाँव को मंत्रमुग्ध कर देती थी। उसके सुनहरे पंखों की चमक जैसे आसमान को सतरंगी बना देती थी।
एक दिन मैना एक खपरैल घर की छत पर बैठी थी और अपने मीठे गीत गा रही थी। उसी समय, एक शैतान लड़का, जिसकी शरारतें गाँव भर में मशहूर थीं, मैना को पकड़ने की तैयारी कर रहा था। उसने चुपचाप धीरे-धीरे मैना की ओर कदम बढ़ाए, ताकि मैना को उसकी चाल का पता न चले।
उसी समय, एक नेकदिल और समझदार व्यक्ति कैलाश वहाँ से गुजर रहा था। कैलाश ने उस लड़के की शरारती योजना को भांप लिया। उसने सोचा कि अगर वह सीधे लड़के को रोकेगा, तो शायद लड़का ज़िद में आकर मैना को पकड़ ही लेगा। इसलिए कैलाश ने एक कंकड़ उठाया और मैना की ओर उछाल दिया।
कंकड़ के मैना के पास पहुँचते ही वह डरकर “फुर्र” से उड़ गई। कैलाश की इस समझदारी भरी चाल ने मैना की जान बचा ली। मैना ने उड़ते हुए अपना गीत और भी मधुर कर दिया, जैसे वह कैलाश को धन्यवाद दे रही हो। कैलाश भी मुस्कुरा रहा था क्योंकि उसने एक निर्दोष प्राणी की जान बचाई थी।
सीख: इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि कठिन परिस्थिति में सही और समझदारी भरा निर्णय लेना बहुत जरूरी है। हमें हमेशा दयालु, करुणामय और विवेकपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। किसी की मदद करते समय केवल नीयत ही नहीं, तरीका भी समझदार होना चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







