सुप्रभात बालमित्रों!
2 दिसंबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 2 दिसंबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"ईश्वर को आसमान में न खोजें; अपने भीतर खोजें"
"Don't look for God in the sky; look within your own body."
यह कथन हमें बताता है कि ईश्वर केवल देवालयों, आसमान या बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे भीतर भी विद्यमान है। आत्म-चिंतन और आत्म-निरीक्षण के माध्यम से हम न केवल ईश्वर के अस्तित्व को महसूस कर सकते हैं, बल्कि स्वयं को भी गहराई से समझ सकते हैं। बाहरी दुनिया में ईश्वर को तलाशने के बजाय, यदि हम अपने भीतर झाँकें, तो हमें अपनी आत्मशक्ति, शांति और सच्चे स्वरूप का ज्ञान होता है। जब मन भीतर की यात्रा करता है, तो वह अहंकार, भय और भ्रम से मुक्त होकर सत्य के निकट पहुँचता है। यही आत्मज्ञान हमें वास्तविक शांति, आनंद और ईश्वर से जुड़ाव का अनुभव कराता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ADMINISTRATION : अडमिनिस्ट्रेशन : प्रशासन, प्रशासन का मतलब किसी संस्था, संगठन, विद्यालय, कार्यालय या सरकार के कार्यों का सुचारु रूप से संचालन और प्रबंधन करना होता है। इसमें नीतियों का निर्माण, निर्णय लेना, संसाधनों का प्रबंधन, और विभिन्न विभागों और सेवाओं का समन्वय शामिल होता है।
वाक्य प्रयोग: Good administration is essential for the development of any country. किसी भी देश के विकास के लिए अच्छा प्रशासन आवश्यक होता है।
उत्तर : चक्की ।
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 2 दिसंबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1804: नेपोलियन बोनापार्ट को फ्रांस का सम्राट घोषित किया गया, जिससे फ्रांसीसी साम्राज्य की स्थापना हुई तथा यह आधुनिक युग के साम्राज्यवाद का प्रतीक बना।
- 1942: पांडिचेरी अब पुडुचेरी में श्री अरविंदो आश्रम स्कूल की स्थापना हुई, जिसे द मदर ने बच्चों के लिए खोला तथा जो बाद में श्री अरविंदो इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एजुकेशन के नाम से जाना गया, जहाँ एकीकृत शिक्षा की प्रयोगात्मक प्रणाली विकसित की गई।
- 1963: प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक शिवा अय्यदुरई का जन्म मुंबई में हुआ, जिन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में 1978 में 'ईमेल' नामक कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया तथा 1982 में अमेरिकी सरकार से इसके लिए कॉपीराइट प्राप्त किया, जिसने इलेक्ट्रॉनिक मेल सिस्टम की नींव रखी।
- 1971: संयुक्त अरब अमीरात UAE ने ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त कर सात अमीरातों—अबू धाबी, दुबई, शारजाह, अजमान, उम्म अल कुवैन, फुजयरा तथा बाद में रस अल-खैमाह—के संघ के रूप में गठन किया, जिसकी राजधानी अबू धाबी बनी तथा शेख जायेद बिन सुल्तान अल नहयान इसके संस्थापक राष्ट्रपति बने।
- 1949: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दास प्रथा के दमन तथा मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति के शोषण पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन अपनाया, जिसके सम्मान में इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय दास प्रथा उन्मूलन दिवस मनाया जाता है, जो आधुनिक दासता जैसे मानव तस्करी, बाल श्रम और जबरन विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ाता है।
- 2001 में भारतीय कंप्यूटर कंपनी NIIT की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रतिवर्ष 2 दिसंबर को विश्व कंप्यूटर साक्षरता दिवस मनाने की शुरुवात हुई ।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “के महान स्वतंत्रता सेनानी, दार्शनिक और अध्यात्मिक गुरु श्री अरविंदो” के बारे में।
श्री अरविंदो भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, दार्शनिक, योगी, कवि और आध्यात्मिक गुरु थे। उनका जन्म 15 अगस्त 1872 को कोलकाता में हुआ। उनका वास्तविक नाम अरविंदो घोष था। वे बचपन से ही मेधावी छात्र थे और उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड भेजे गए। वहां से लौटने के बाद उन्होंने कुछ समय बड़ौदा कॉलेज में अध्यापन कार्य भी किया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने क्रांतिकारी विचारों को बढ़ावा दिया और ‘वंदे मातरम्’ तथा ‘कर्मयोगिन’ जैसे पत्रों के माध्यम से युवाओं को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें कई बार गिरफ्तार किया। जेल में रहते हुए उन्होंने आध्यात्मिक साधना की ओर रुझान बनाया और जीवन का वास्तविक उद्देश्य खोजने का प्रयास किया।
राजनीतिक जीवन से निवृत्त होकर वे पुदुचेरी चले गए, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिक साधना शुरू की और ‘इंटीग्रल योग’ यानी संपूर्ण योग का मार्ग प्रस्तुत किया। उनके सहयोग से ‘श्री अरविंदो आश्रम’ की स्थापना हुई, जो आज भी आध्यात्मिक साधना का केंद्र है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘सावित्री’, ‘द लाइफ डिवाइन’, ‘ए सिंथेसिस ऑफ योगा’ और ‘एसेज ऑन द गीता’ शामिल हैं। उनका जीवन संदेश था कि मनुष्य केवल भौतिक जीवन तक सीमित न रहे, बल्कि अपने भीतर की दिव्य चेतना को पहचानकर ऊंचे आदर्शों की ओर बढ़े। 5 दिसंबर 1950 को उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया। वे स्वतंत्रता सेनानी, आध्यात्मिकता और मानवता के नए युग के वाहक के रूप में श्री अरविंदो आज भी स्मरणीय हैं।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 2 दिसंबर को मनाये जाने वाले राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस” के बारे में:
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस हर वर्ष 2 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य देश में बढ़ते प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करना और पर्यावरण की रक्षा के लिए सभी को प्रेरित करना है। यह दिवस 1984 में भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए हजारों लोगों की स्मृति में मनाया जाता है। यह हादसा भारत ही नहीं, विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक हादसों में से एक था, जिसने पूरी दुनिया को पर्यावरण सुरक्षा और औद्योगिक सतर्कता का महत्व समझाया। इस दिन लोगों को वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण के दुष्परिणामों के बारे में बताया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा कई जागरूकता अभियान, रैलियाँ, वृक्षारोपण कार्यक्रम और चर्चाएँ आयोजित की जाती हैं। प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा कई नियम और नीतियाँ बनाई गई हैं, लेकिन वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे। हमें दैनिक जीवन में छोटे-छोटे कदम जैसे—पेड़ लगाना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना, वाहनों का सीमित प्रयोग, कचरा सही स्थान पर फेंकना और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण—अपनाने चाहिए। राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वच्छ पर्यावरण हमारा अधिकार ही नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “धूर्त सियार”
किसी जंगल में एक सियार रहता था। एक बार भोजन के लालच में वह शहर में चला आया। शहर के कुत्ते उसके पीछे पड़ गए। डर के कारण सियार एक धोबी के घर में घुस गया। वहाँ आँगन में एक नाँद थी। सियार उसी में कूद गया, जिससे वह पूरी तरह नीले रंग में रंग गया। कुत्तों ने जब उसका नीला शरीर देखा तो उसे कोई विचित्र और भयानक जीव समझकर भाग खड़े हुए। सियार मौका पाकर निकला और सीधे जंगल में चला गया। नीले रंगवाले विचित्र पशु को देखकर शेर और बाघ तक उससे भयभीत हो गए। वे इधर-उधर भागने लगे। धूर्त सियार ने सबको भय से व्याकुल देखकर कहा, "भाई, तुम मुझे देखकर इस तरह क्यों भाग रहे हो? मुझे तो विधाता ने आज स्वयं अपने हाथों से बनाया है। जानवरों का कोई राजा नहीं था। इसलिए ब्रह्मा ने मेरी रचना करके कहा, 'मैं तुम्हें सभी जानवरों का राजा बनाता हूँ। तुम धरती पर जाकर जंगली जंतुओं का पालन करो।' मैं ब्रह्मा के आदेश से ही आया हूँ।" नीला जानवर उन सबका स्वामी है - यह बात सुनकर सिंह, बाघ आदि सभी जंतु उसके समीप आकर बैठ गए। वे उसे प्रसन्न करने के लिए उसकी चापलूसी करने लगे। धूर्त सियार ने सिंह को अपना महामंत्री नियुक्त किया, बाघ को सेनानायक बनाया, चीते को पान लगाने का काम सौंपा और भेड़िए को द्वारपाल बना दिया। उसने सभी जीव-जंतुओं को कोई-न-कोई जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन अपनी जाति के सियारों से बात तक न की और उन्हें धक्के देकर बाहर निकलवा दिया। सिंह आदि जंतु जंगल में शिकार करके लाते और उसके सामने रख देते थे। सियार स्वामी की तरह मांस को सभी जीवों में बाँट देता था। इस प्रकार उसका राजकाज आराम से चलता रहा।
एक दिन वह अपनी राजसभा में बैठा था, जब उसे दूर से सियारों के चिल्लाने की आवाज सुनाई पड़ी। सियारों की 'हुआ-हुआ' सुनकर वह पुलकित हो गया और आनंद-विभोर होकर सुर में सुर मिलाकर 'हुआ-हुआ' करने लगा। उसके चिल्लाने से सिंह आदि जानवरों को पता चल गया कि यह तो मामूली सियार है। वह मक्कारी के बल पर राजा बनकर हम पर शासन कर रहा है। वे लज्जा और क्रोध से भर गए और उन्होंने एक ही प्रहार से सियार को मार डाला। इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि धूर्तता और धोखाधड़ी के बल पर कोई भी अधिक समय तक सफल नहीं हो सकता। सच की हमेशा जीत होती है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







