18 September AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

18 सितम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 18 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: “जियो ऐसे कि कल ही मरना है और सीखो ऐसे जैसे आपको हमेशा जीना है।”
Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever."

यह महात्मा गांधी का प्रसिद्ध कथन है जिसका अर्थ है कि हमें हर पल को पूरे उत्साह और खुशी के साथ जीना चाहिए, ताकि जीवन में कोई पछतावा न रहे। अपने प्रियजनों के साथ समय बिताना, अच्छे कार्य करना और वर्तमान को महत्व देना ही सच्चा जीवन है।

वहीं दूसरी ओर, सीखना एक ऐसी प्रक्रिया है जो कभी समाप्त नहीं होती। यदि हम लगातार नई बातें सीखते रहेंगे, तो हमारा ज्ञान बढ़ेगा और जीवन में प्रगति होगी। यह हमें आत्मविश्वासी बनाता है और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। इसलिए जीवन को संपूर्णता से जीते हुए निरंतर सीखते रहना ही सच्चा और सार्थक जीवन है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: INQUIRY (इन्क्वाइरी) का अर्थ: जांच करना, पूछताछ करना, छानबीन, जानकारी प्राप्त करना या निरीक्षण। मूल रूप से INQUIRY का मतलब होता है किसी विषय, घटना, या समस्या के बारे में जानकारी प्राप्त करने या सत्य की खोज करने की प्रक्रिया।

वाक्य प्रयोग: The police started an inquiry into the cause of the accident. पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की।

🧩 आज की पहेली
ऐसी कौन सी चीज है जिसे हम पानी के अन्दर खाते हैं?
जवाब : गोता
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 18 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1615: इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के राजदूत सर थॉमस रो मुगल सम्राट जहांगीर से मिलने के लिए सूरत पहुँचे। यह ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए भारत में व्यापारिक संबंधों की शुरुआत का प्रतीक था।
  • 1851: न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ। इस अखबार ने समाचार पत्रकारिता में एक नया मानक स्थापित किया।
  • 18 सितम्बर 1883 को महान क्रांतिकारी मदन लाल धींगरा का जन्म अमृतसर, पंजाब में हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने विदेश की धरती पर अपने प्राणों का बलिदान दिया।
  • 1949: डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में संविधान सभा में देश के नाम पर बहस हुई। "इंडिया दैट इज भारत" नाम तय हुआ।
  • 1973: पूर्वी जर्मनी यानी जर्मन डेमोक्रेटिक रिपब्लिक और पश्चिमी जर्मनी यानी फेडरल रिपब्लिक ऑफ जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया।
  • 1998: इंटरनेट कॉर्पोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स (ICANN) की स्थापना हेतु चर्चा शुरू की गई। यह संगठन इंटरनेट के डोमेन नाम सिस्टम और IP पतों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है, जो इंटरनेट की तकनीकी संरचना को व्यवस्थित करता है।
  • 2009: थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित 8वीं विश्व बांस कांग्रेस के दौरान बांस के पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए विश्व बांस दिवस यानी World Bamboo Day मनाने की घोषणा की गई।
  • 2015: भारत के निर्वाचन आयोग ने नोटा (None of the Above) विकल्प के लिए एक आधिकारिक प्रतीक चिन्ह जारी किया। इस प्रतीक के साथ, मतदाताओं को मतपत्र पर “उपर्युक्त में से कोई नहीं” चुनने का विकल्प दिया गया, ताकि वे किसी भी उम्मीदवार को पसंद न करने की स्थिति में अपनी राय व्यक्त कर सकें।
  • 2016: जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के एक शिविर पर आतंकवादी हमला हुआ। इस हमले में 19 भारतीय सैनिक शहीद हो गए।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – मदन लाल धींगरा

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “आंध्र केसरी प्रकाशम पंतुलु” के बारे में।

महान क्रांतिकारी मदन लाल धींगरा का जन्म 18 सितम्बर 1883 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। एक संपन्न परिवार से संबंध रखने के बावजूद उनके हृदय में देशभक्ति की गहरी भावना थी। वे उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए, जहाँ वे स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े और वीर सावरकर जैसे महान नेताओं से प्रेरित हुए।

अंग्रेज़ों की गुलामी से भारत को मुक्त कराने की तीव्र इच्छा ने उन्हें कठोर मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। 1909 में लंदन में आयोजित एक सभा के दौरान उन्होंने ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम कर्ज़न वायली की हत्या कर दी, क्योंकि वे उसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का शत्रु मानते थे। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 17 अगस्त 1909 को लंदन की पेंटनविल जेल में फाँसी दे दी गई।

अपने जीवन, संघर्ष और बलिदान से मदन लाल धींगरा ने यह सिद्ध कर दिया कि स्वतंत्रता सबसे बड़ा आदर्श है और इसके लिए प्राणों की आहुति देना भी गौरव की बात है। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों में सदा स्मरण किए जाते रहेंगे।

🎋 आज का दैनिक विशेष – विश्व बांस दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 18 सितम्बर को मनाये जाने वाले “विश्व बांस दिवस” के बारे में:

हर साल 18 सितंबर को विश्व बांस दिवस मनाया जाता है। यह दिन बांस के लाभों के बारे में जागरूकता फैलाने और रोज़मर्रा के जीवन में इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

बांस, जिसे अक्सर “ग्रीन गोल्ड” कहा जाता है, एक ऐसा पौधा है जो सतत विकास, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बांस वास्तव में पेड़ नहीं, बल्कि पोएसी परिवार की एक लंबी, पेड़ जैसी घास है। इसकी 115 से अधिक जातियाँ यानी genera और लगभग 1,400 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।

भारत में बांस की अनेक प्रजातियाँ मौजूद हैं। विशेषकर उत्तर-पूर्वी राज्यों में इसकी खेती व्यापक रूप से की जाती है। यहाँ बांस का उपयोग पारंपरिक रूप से घर बनाने, हस्तशिल्प, फर्नीचर, टोकरी, वाद्ययंत्र और कई उपयोगी वस्तुओं के निर्माण में किया जाता है।

2009 में थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित 8वीं विश्व बांस कांग्रेस के दौरान विश्व बांस संगठन ने 18 सितंबर को आधिकारिक रूप से विश्व बांस दिवस घोषित किया। इस दिवस का उद्देश्य बांस की असीम क्षमता को पहचानना, दुनिया भर में बांस उद्योग को बढ़ावा देना और स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास के साथ पारंपरिक उपयोगों को प्रोत्साहित करना है। विश्व बांस दिवस हमें याद दिलाता है कि बांस न केवल प्रकृति का उपहार है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक टिकाऊ और पर्यावरण–अनुकूल जीवनशैली की कुंजी भी है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – शरारती बंदर

एक शहर के पास एक भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा था। मंदिर में दिन-रात मजदूर लकड़ी काटने और गढ़ने का काम कर रहे थे। दोपहर का समय हुआ तो सब मजदूर खाना खाने चले गए। काम अधूरा था, इसलिए एक लकड़ी का मोटा लठ आधा कटा रह गया। उसे खुलने से रोकने के लिए मजदूरों ने बीच में एक कीला यानी लकड़ी का टुकड़ा फँसा दिया।

तभी वहाँ बंदरों का झुंड आ धमका। सब इधर-उधर उछल-कूद करने लगे। उनमें से एक बंदर बहुत ही शरारती था। उसकी नजर आधे कटे लकड़ी और उसमें लगे कीले पर पड़ी। उसने सोचा—“यहाँ यह कीला क्यों लगाया है? ज़रा मैं इसे निकालकर देखता हूँ।”

पहले उसने धीरे-धीरे कीले को खींचा, फिर जोर लगाकर खींचने लगा। बाकी बंदर उसका तमाशा देख हँस रहे थे। आखिरकार उसने पूरी ताकत लगाई और कीला निकाल ही लिया।

लेकिन जैसे ही कीला निकला, लकड़ी के दोनों हिस्से जोर से आपस में बंद हो गए। उस समय शरारती बंदर की पूँछ बीच में फँस चुकी थी। दर्द से चीखते हुए वह तड़प उठा और जैसे-तैसे भाग निकला।

यह कहानी हमें सिखाती है कि बिना सोचे-समझे किसी काम में हाथ नहीं डालना चाहिए। जल्दबाजी और लापरवाही अक्सर नुकसान और पछतावे का कारण बनती हैं। सोच-समझकर और धैर्य से किया गया काम ही सफलता और सुरक्षा देता है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!


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