सुप्रभात बालमित्रों!
17 जून – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 17 जून है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"एक अच्छे व्यक्ति बनो, लेकिन इसे साबित करने के लिए समय बर्बाद मत करो।
Be a good person, but don't waste time to prove it."
एक अच्छा इंसान बनना ही सबसे महत्वपूर्ण बात है, चाहे दूसरों को यकीन हो या ना हो। अच्छे कर्मों का फल ज़रूर मिलता है, धैर्य रखें।
अपनी ऊर्जा और समय उन कामों में लगाएं जो आपके लिए और दूसरों के लिए सार्थक हों। दूसरों की राय पर ज़्यादा ध्यान देने से बचें, बस अपना काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करते रहें। याद रखें, सच्ची अच्छाई खुद ही बोलती है, इसे साबित करने की ज़रूरत नहीं होती।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है:
WHISPER : जिसका अर्थ होता है बहुत धीमी और शांत आवाज़ में बोलना, फुसफुसाना या कानाफूसी करना।
WHISPER अक्सर गुप्त बातचीत या गोपनीय जानकारी को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।
वाक्य प्रयोग: He leaned closer and whispered a secret in my ear.
वह पास आया और मेरे कान में फुसफुसाकर एक राज़ बताया।
उत्तर - गर्मी
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 17 जून की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1631: मुमताज़ महल का निधन हुआ। मुगल सम्राट शाहजहाँ की पत्नी मुमताज़ की याद में उन्होंने ताजमहल बनवाया, जो प्रेम और वास्तुकला का प्रतीक है।
- 1903: असम के प्रसिद्ध साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी और फिल्म निर्माता ज्योति प्रसाद अगरवाला का जन्म हुआ। उन्होंने असमिया साहित्य, संस्कृति और सिनेमा को समृद्ध किया।
- 17 जून, 1925 को, प्रथम विश्व युद्ध के विनाशकारी अनुभवों के जवाब में जिनेवा प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए, जिसने युद्ध में रासायनिक और जैविक हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया।
- 17 जून, 1928 को, अमेलिया ईयरहार्ट ने "फ्रेंडशिप" विमान से अटलांटिक महासागर पार करना शुरू किया, और 18 जून, 1928 को यह उड़ान पूरी की, जिससे वह ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं।
- 17 जून, 1944 को, आइसलैंड ने डेनमार्क से स्वतंत्रता हासिल की और खुद को गणराज्य घोषित किया, जिसे आज आइसलैंड का राष्ट्रीय दिवस माना जाता है।
- 17 जून, 1973 को, भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का जन्म हुआ। उन्होंने कई ग्रैंड स्लैम खिताब और 1996 ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
- 17 जून, 1980 को, अमेरिकी टेनिस स्टार वीनस विलियम्स का जन्म हुआ। उन्होंने अपनी बहन सेरेना के साथ मिलकर टेनिस में कई ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और खेल को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रसिद्ध असमिया साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी, कवि, नाटककार, संगीतकार और फिल्म निर्माता “ज्योति प्रसाद अगरवाला” के बारे में।
ज्योति प्रसाद अगरवाला, जिन्हें 'रूपकोंवर' के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 17 जून, 1903 को असम के तेजपुर में एक समृद्ध मराठा परिवार में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध असमिया साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी, कवि, नाटककार, संगीतकार और फिल्म निर्माता थे, जिन्होंने असमिया संस्कृति और साहित्य को समृद्ध करने में अमूल्य योगदान दिया।
उन्होंने 1935 में पहली असमिया फिल्म "जोयमती" का निर्माण और निर्देशन किया, जिसने भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय फिल्मों की नींव रखी। उनकी रचनाएँ, जैसे नाटक "सोनित कुँवरी" और गीत "लुइत परिया", असमिया पहचान और लोक संस्कृति को दर्शाते हैं।
स्वतंत्रता संग्राम में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई, अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज उठाई और असम में नॉन-कोऑपरेशन आंदोलन को बढ़ावा दिया। अपनी कलात्मक और देशभक्ति विरासत के साथ, ज्योति प्रसाद अगरवाला ने असम की सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी।
उनका निधन 17 जनवरी, 1951 को हुआ, लेकिन उनकी कृतियाँ आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 17 जून को मनाये जाने वाले “विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस” के बारे में:
विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस यानी World Day to Combat Desertification and Drought हर साल 17 जून को मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम संधि UNCCD के 1994 में अपनाए जाने की याद में चुना गया। इसका मुख्य उद्देश्य सतत भूमि प्रबंधन को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करना है।
मरुस्थलीकरण भूमि की उर्वरता में कमी का परिणाम है, जो वनों की कटाई, अतिचारण, सूखा और बाढ़ जैसे कारणों से होता है। सूखा भी एक गंभीर समस्या है, जिससे जल की कमी और फसलें प्रभावित होती हैं।
ये समस्याएँ गरीबी, खाद्य असुरक्षा और विस्थापन का कारण बन सकती हैं। यह दिवस लोगों को पर्यावरण संरक्षण, भूमि बचाव और समाधान की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। इस अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण और नीति चर्चाएं आयोजित की जाती हैं।
पिंकी नाम की एक प्यारी सी लड़की थी जो दूसरी कक्षा में पढ़ती थी। एक दिन जब वह अपनी किताब पढ़ रही थी, तो उसे रेलगाड़ी की तस्वीर दिखी। यह तस्वीर देखकर उसे अपनी रेल यात्रा याद आ गई, जो उसने कुछ दिन पहले अपने पापा-मम्मी के साथ की थी।
उसी उत्साह में, पिंकी ने चाक उठाया और दीवार पर रेलगाड़ी का इंजन बनाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, उसने पहला डब्बा बनाया, फिर दूसरा, और धीरे-धीरे पूरी रेलगाड़ी बनने लगी। इतने में, चाक खत्म हो गई। पिंकी उठी और उसने देखा कि कक्षा की आधी दीवार पर उसकी बनाई हुई रेलगाड़ी पूरी तरह तैयार हो चुकी थी।
पिंकी अपनी बनाई हुई रेलगाड़ी को देखकर बहुत खुश थी। उसने कल्पना की कि उसकी यह रेलगाड़ी दिल्ली जा रही है, मुंबई जा रही है, अमेरिका जा रही है, नानी के घर जा रही है, और दादाजी के घर भी जा रही है। रास्ते में, उसने खिड़की से बाहर के खूबसूरत दृश्यों का आनंद लिया, नए दोस्त बनाए, और कई रोमांचक अनुभव किए।
यह कहानी हमें सिखाती है कि बच्चों में असीमित कल्पना और रचनात्मकता होती है। हमें बच्चों का मनोबल बढ़ाकर उन्हें अपनी कल्पनाओं को उड़ने देना चाहिए और उनके सपनों को पूरा करने में उनकी मदद करनी चाहिए।
आज हम जो बीज बोते हैं, वही हमारे बच्चों का भविष्य तय करते हैं। इसलिए, हमें ज़रूरी है कि हम उन्हें प्रेरित करें, उनका समर्थन करें, और उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका दें।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में।
आपका दिन शुभ हो!







